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तेल की क़ीमतों में ज़बर्दस्त गिरावट | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आर्थिक मंदी और गहराने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का भाव 16 महीनों के न्यूनतम स्तर पर आ गया है. अमरीका के न्यूयॉर्क कमोडिटी बाज़ार में इसकी क़ीमत लगभग 66 डॉलर प्रति बैरल रह गई. लगभग तीन महीने पहले कच्चे तेल का भाव तेज़ी से उछले हुए 150 डॉलर के क़रीब आ गया था. उस समय भारत ने भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए थे. हालाँकि क़ीमतों में लगभग 50 फ़ीसदी की कमी आने के बावजूद भारत सरकार अभी पेट्रोलियम पदार्थों के दाम घटाने के पक्ष में नहीं है. वित्त मंत्री पी चिदंबरम का कहना है कि भारत में क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के अनुरुप नहीं है और तेल कंपनियाँ अभी भी घाटे में हैं. उनका कहना है कि भाव 61 डॉलर के नीचे जाने के बाद ही दाम घटाने पर विचार किया जाएगा. तेल के दाम में आई भारी गिरावट से ये माना जा रहा है कि इसकी माँग घट रही है जो वैश्विक आर्थिक मंदी के और गहराने का संकेत है. अमरीकी तेल भंडार में 32 लाख बैरल की वृद्धि हुई है और जैसे ही ये ख़बर आई इसके दाम घट गए. इस बीच तेल निर्यातक देशों के संगठन ओपेक की शुक्रवार को बैठक हो रही है जिसमें तेल उत्पादन में कटौती का फ़ैसला लिए जाने की संभावना जताई जा रही है. इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि तेल का दाम 60 डॉलर प्रति बैरल तक नीचे आ सकता है क्योंकि मंदी के कारण आर्थिक गतिविधियाँ सुस्त हो रही हैं. तेल ही नहीं सोना-चांदी, तांबा, कांसा और अन्य धातुओं के दाम भी घटे हैं. |
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