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अमरीका के बाद अब विश्व बैंक भी... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक ने दुनिया भर में और ख़ास तौर पर दक्षिण एशिया में खाद्यान्न की बढ़ती क़ीमतों के लिए काफ़ी हद तक भारत को ज़िम्मेदार ठहराया है. अमरीका ने भी भारत पर उँगली उठाते हुए कहा है कि भारत की ओर से चावल के निर्यात पर लगे प्रतिबंध ने दुनिया के बाज़ारों को हिला कर रख दिया है. कुछ ही हफ़्तों पहले जब राष्ट्रपति बुश ने खाद्यान्न के दामों में वृद्धि के लिए भारत और चीन में बढ़ती मांग को ज़िम्मेदार ठहराया था तो दिल्ली में भारतीय अधिकारियों ने सख़्त नाराज़गी जताई थी और कई अमरीकी अधिकारियों को कहना पड़ा था कि बुश इसे भारत की ग़लती के तौर पर नहीं पेश कर रहे थे. लेकिन अब विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में खाद्यान्न की बढ़ती कीमत को लेकर भारत पर उँगली उठाई है...बढ़ती मांग की वजह से नहीं बल्कि आपूर्ति पर रोक लगाने के लिए. रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, चीन और वियतनाम जैसे देशों ने चावल के निर्यात पर जो रोक लगाई है उससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में अनाज की क़ीमत उपर चली गई है. स्थिति बिगड़ी है ख़ासकर दक्षिण एशिया में अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में स्थिति और विकट हो गई है. इस रिपोर्ट के आने से ठीक पहले अमरीकी वाणिज्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी क्रिस्टोफ़र पडिला ने भी भारत की निर्यात नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत ने चावल और खानेवाले तेल के निर्यात पर जो प्रतिबंध लगाया उससे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में हड़कंप मच गया. उनका कहना था,"इस तरह की निर्यात नीति से कुछ समय के लिए तो खाद्यान्न के मामले में सुरक्षा मिल सकती है लेकिन बाद में इसका बुरा असर होता है". भारत के जाने माने आर्थिक विश्लेषक और बहुचर्चित स्तंभ स्वामीनौमिक्स के लेखक स्वामीनाथन अय्यर इन दिनों वाशिंगटन में हैं और उन्होंने भी इस भारतीय नीति की आलोचना की है. स्वामीनाथन अय्यर का कहना है कि ये वैसी ही नीति है कि "अपना गोदाम भरा रहे, पड़ोसी भूखा सोए". उन्होंने कहा,"भारत सरकार कह रही है कि वो जमाखोरी के ख़िलाफ़ क़दम उठाएगी लेकिन आज सबसे बड़ा जमाखोर एक तरह से भारत है". उनका कहना है कि निर्यात पर रोक लगाकर भारत ने दुनिया के बाज़ारों में चावल की जो आपूर्ति है उसमें दस प्रतिशत की कमी ला दी है. प्रतिबंध हटाने का आग्रह संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी भारत से अनुरोध किया है कि वो इस प्रतिबंध को हटा ले. कई जानकारों का मानना है कि दुनिया में अनाज की बढ़ती क़ीमत कुछ हद तक घबराहट के कारण है, भंडारों में कमी की वजह से नहीं क्योंकि ऑस्ट्रेलिया में सूखे के बावजूद बाकी दुनिया में रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है. उनका ये भी कहना है कि ये स्थिति कुछ ही समय के लिए है और आनेवाले दिनों में उत्पादन और ज़्यादा होने की संभावना है जिससे क़ीमतें नीचे आएँगी. लेकिन ये तय है कि फ़िलहाल दुनिया के दूसरे सबसे बड़े चावल उत्पादक भारत पर निर्यात पर से रोक हटाने का दबाव और बढ़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें विश्व बैंक भारत को नौ अरब डॉलर देगा20 अगस्त, 2005 | कारोबार भारत 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था09 जुलाई, 2006 | कारोबार सिंगापुर सबसे आगे: विश्व बैंक 06 सितंबर, 2006 | कारोबार ज़ोएलिक होंगे विश्व बैंक के अगले अध्यक्ष30 मई, 2007 | कारोबार ग़रीब देशों को मदद में इजाफ़ा28 सितंबर, 2007 | कारोबार कम होगी वैश्विक विकास दर : विश्व बैंक09 जनवरी, 2008 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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