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ग़रीब देशों को मदद में इजाफ़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व बैंक ने दुनिया के निर्धनतम देशों के लिए रिकॉर्ड साढ़े तीन अरब डॉलर की मदद करने का वादा किया है. यह विश्व बैंक की ओर से पहले कही गई राशि से दोगुनी है. विश्व बैंक के नए राष्ट्रपति रॉबर्ट ज़ोएलिक ने कहा यह क़दम अमीर देशों को दान की राशि को बढ़ाने की दिशा में प्रेरित करने के लिए उठाया गया है. उन्होंने चीन जैसे विकासशील देशों के लिए ऋण पर लिए जाने वाले शुल्कों को भी घटा दिया है. नौ साल में पहली बार ऐसा हुआ है. ज़ोएलिक ने कहा, ''बोर्ड ने इस बात पर सहमति जताई कि ऋण देने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए ज़्यादतर शुल्कों को हटा लिया जाए. इससे हम खर्च में कटौती करके वर्ष 1988 के स्तर पर पहुँच जाएंगे.'' नाटकीय बदलाव विश्व बैंक ने रणनीति में नाटकीय बदलाव लाते हुए मध्यम आय वाले देशों में शामिल माने जाने वाले भारत, ब्राज़ील, रूस और दक्षिण अफ़्रीका जैसे 79 देशों के साथ संबंध बढ़ाने और गरीबी उन्मूलन के प्रयासों में इन देशों की मदद करने का भी फ़ैसला किया है. इस बीच ज़ोएलिक ने चेतावनी दी है कि अगर आठ औद्योगिक देशों का समूह निर्धनतम देशों के ऋण को माफ़ करने के वर्ष 2005 के वादे पर कायम रहता है तो विश्व बैंक के सहायता कोष में कमी आ सकती है. उन्होंने विकसित देशों से दान की राशि बढ़ाने और निर्धनतम देशों के ढांचागत सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद करने की भी अपील की. ज़ोएलिक ने कहा कि इन्हें उन देशों के पैसों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए जिनके इरादे नेक नहीं हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ज़ोएलिक होंगे विश्व बैंक के अगले अध्यक्ष30 मई, 2007 | कारोबार मीडिया से नाराज़ हैं वुल्फ़ोवित्ज़28 मई, 2007 | पहला पन्ना वुल्फ़ोवित्ज़ ने इस्तीफ़े की घोषणा की17 मई, 2007 | पहला पन्ना वुल्फ़ोवित्ज़ के भाग्य का फ़ैसला टला13 अप्रैल, 2007 | पहला पन्ना विश्व बैंक आंध्र को एक अरब डॉलर देगा25 अक्तूबर, 2006 | कारोबार सिंगापुर सबसे आगे: विश्व बैंक 06 सितंबर, 2006 | कारोबार भारत 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था09 जुलाई, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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