|
भारतीय धनकुबेरों को लुभा रही ब्रिटिश संपत्ति | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन के रियल एस्टेट कारोबारी महँगे मकान के ग्राहकों की तलाश में भारतीय धनकुबेरों का रुख़ कर रहे हैं. आप सोच रहे होंगे कि लंदन के उथल-पुथल भरे रियल एस्टेट बाज़ार में भला कोई क्यों निवेश करेगा लेकिन इन 'महाअमीरों' के पास ख़र्च करने के लिए नगदी की कमी नहीं है. दुनिया में सबसे बड़ी लागत से मकान इस समय भारतीय महानगर मुंबई में बन रहा है जिसके स्वामी हैं रिलायंस कंपनी के प्रमुख मुकेश अंबानी. अंबानी की इस इमारत की छह तलें तो सिर्फ़ पार्किंग के काम आएँगी. अनुमान है कि पूरी होने तक इस गगनचुंबी इमारत का ख़र्च 2 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुँच जाएगा. अंबानी की इमारत इस बात की मिसाल है कि देश का एक तबका कितना कमा रहा है और यही वजह है कि विदेशी कारोबारियों की नज़रें भी भारत पर ठहरी हैं. डिज़ाइन और इमारतें बनाने वाली बड़ी कंपनी कैंडी एण्ड कैंडी के निक कैंडी इस समय मुंबई में हैं. वे अपनी सुपर लग्ज़री आवासीय परियोजना 'वन हाइड पार्क' में निवेश के लिए यहाँ के लोगों में रुचि जगा रहे हैं. मध्य लंदन में बनने वाली इस इमारत में एक फ्लैट की औसत क़ीमत होगी 2 करोड़ पाउंड या लगभग 160 करोड़ रुपए. कैंडी ऐसे शख़्श हैं जो बड़े-बड़े अमीरों के साथ सौदा करने के आदी हैं लेकिन वे कहते हैं, "भारत में कितना पैसा है, यह देखकर मैं चकित हूँ. यह अद्भुत है." शीर्ष पर नज़र
कैंडी एण्ड कैंडी ख़ास तौर पर ऊँची क़ीमत वाली संपत्तियों के कारोबार से जुड़ी है जिसके ग्राहकों में शाही परिवार, उद्यमी, निजी कंपनियों के मालिक शामिल हैं. रूस, खाड़ी जैसे क्षेत्रों के ये अमीर ऐसे लोग हैं जो सबसे सुंदर, सबसे बेहतर चीज़ों की चाहत रखते हैं. अब यह कंपनी भारत में अपना दफ़्तर खोलने की तैयारी कर रही है. लेकिन जब अमरीकी बाज़ार में मंदी हो और ब्रिटेन में भी बूम ख़त्म होता दिख रहा हो तो भला वहाँ कोई क्यों निवेश करेगा. कैंडी स्वीकार करते हैं कि ब्रिटेन में अमरीकी रियल एस्टेट बाज़ार की मंदी जैसा हाल अगले छह महीने बाद दिख सकता है. लेकिन वे यह भी कहते हैं कि यह सिर्फ़ उन संपत्तियों पर लागू होता है जिनकी क़ीमत 20 लाख़ पाउंड से कम है क्योंकि ऐसे लोगों को ही कर्ज़ लेने ज़रूरत होती है. वे मानते हैं कि मक़ान की क़ीमतों में भारी कमी हो सकती है और यह दस फ़ीसदी से ज़्यादा तक गिर सकती है. मगर वे यह भी मानते हैं कि 50 लाख़ पाउंड से ऊपर के मकानों की क़ीमतों में बदलाव नहीं आएगा. भारत में इस समय एशिया के सबसे ज़्यादा अरबपति रहते हैं. अंतिम गणना के मुताबिक़ उनकी संख्या 36 है और उनकी पूरी संपत्ति मिला दी जाए तो यह 200 अरब अमरीकी डॉलर होती है. |
इससे जुड़ी ख़बरें कुछ ख़ास नहीं बदली गाँवों की तस्वीर14 फ़रवरी, 2008 | कारोबार ब्याज दर स्थिर रखने का फ़ैसला24 अप्रैल, 2007 | कारोबार अहम ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं 31 अक्तूबर, 2006 | कारोबार पेपर क्लिप के बदले मकान19 अप्रैल, 2006 | कारोबार 'सबसे बड़ा' क्रेडिट कार्ड घपला09 सितंबर, 2003 | कारोबार वित्तीय संकट का ख़तरा01 सितंबर, 2003 | कारोबार तीन भारतीय 'टॉप लिस्ट' में21 जनवरी, 2003 | कारोबार मकान के लिए कर्ज़ आसान15 जनवरी, 2003 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||