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तेल का दाम 115 डॉलर तक पहुँचा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तेल के दामों में एक बार फिर उछाल आया है और ये 115 डॉलर के आसपास पहुँच गया है. गुरुवार को अमरीका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के बाद तेल के दाम में ये वृद्दि दर्ज की गई. इस रिपोर्ट में तेल की आपूर्ति के बारे में चिंता जताई गई थी. न्यूयॉर्क में कच्चे तेल के दाम 115 डॉलर की ऊंचाई छूने के बाद 114 डॉलर पर लौट आए. कमज़ोर पड़ते डॉलर को तेल के बढ़ते दामों के लिए ज़िम्मेदार माना जा रहा है. अमरीका के ऊर्जा संचार प्रशासन की रिपोर्ट के मुताबिक 11 अप्रैल को ख़त्म होने वाले सप्ताह में अमरीका में तेल के भंडार में 2.3 मिलियन टन की कमी आई. उधर पेट्रोल के भंडार में भी पांच मिलियन टन तक की कमी दर्ज की गई. इस ख़बर के आने के बाद अमरीका में चिंता बढ़ गई है. ग़ौरतलब है कि आने वाले कुछ दिनों में अमरीका में गर्मियों के मौसम में लोग अपनी कारें लेकर घूमने निकल जाते हैं. इस वजह से अमरीका में ग़ैसोलीन की ख़पत में वृद्धि होने की उम्मीद है. कमज़ोर डॉलर इधर विशेषज्ञों का कहना है कि कमज़ोर डॉलर की वजह से तेल के दाम प्रभावित हो रहे हैं. ऊर्जा विशेषज्ञ विक्टर शुम का कहना है कि कमज़ोर होते डॉलर की वजह से निवेशक तेल में जम कर पैसा लगा रहे हैं.
विक्टर शुम का कहना है कि जब तक डॉलर का दाम स्थिर नहीं होगा, तब तक निवेशक पूरी कोशिश करते रहेंगे कि तेल के दाम बढ़ते रहें. उधर तेल का उत्पादन करने वाले समूह ओपेक का कहना है कि बाज़ार में तेल की कमी नहीं है और दामों में तेज़ी तेल के आपूर्ति की वजह से नही हो रही है. हालांकि पिछले सप्ताह उत्तरी अमरीका और नाइजीरिया में तेल आपूर्ति में हुए व्यवधान की वजह से तेल के दाम बढ़ गए थे. हाल ही में आई ख़बरों में कहा गया है कि नाइजीरिया में तेल और गैस के उत्पादन में साल 2015 तक 30 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है. उल्लेखनीय है कि नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है. |
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