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तेल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें अब तक की रिकॉर्ड ऊँचाई यानी 102 अमरीकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई हैं. बताया जा रहा है कि इसकी वजह डॉलर का कमज़ोर होना और तेल की मांग बढ़ना बताया जा रहा है. न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में महज कुछ ही घंटों की ख़रीद-फ़रोख्त के बाद कच्चे तेल की कीमत 102.59 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गईं. बाज़ार के जानकार इसकी वजह लगातार अमरीकी बाज़ार का गिरना और घटती ब्याज़ दरों को बता रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार 1980 में भी तेल की कीमतें 102.53 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई थीं. गैस प्लांट में आग तेल की कीमतें बढ़ने की वजह दक्षिणी इंग्लैंड के नोरफोल्क के बैकटन गैस टर्मिनल में लगी आग को भी बताया जा रहा है. अमरीका की एक ऊर्जा कंपनी सिटी ग्रुप फ्यूचर्स के विश्लेषक टिम इवान्स का कहना है, "यूरोपीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का कारण ब्रिटेन के प्राकृतिक गैस टर्मिनल पर लगी आग भी है." वहीं, यूरो के मुक़ाबले डॉलर गुरुवार को भी लगातार कमज़ोर पड़ा. एक यूरो की तुलना में डॉलर की कीमत 1.52 डॉलर दर्ज की गई. लगातार कमज़ोर होती अमरीका की आर्थिक स्थिति के कारण निवेशक तेल बाज़ार में पैसा लगाने से बच रहे हैं. निवेशकों ने अपना पैसा सोने-चांदी के बाज़ार में ही लगाना बेहतर समझा. ऑरमेट ट्रेडिंग के उपाध्यक्ष ब्रूस डन का कहना है, "अमरीकी बाज़ार के लगातार गिरते रुख को देखते हुए निवेशक ज़्यादा सुरक्षित समझे जाने वाले बाज़ार पर पैसा लगाना बेहतर समझ रहे हैं." |
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