|
बीस साल की हुई मोबाइल तकनीक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मोबाइल फ़ोन ने आज दुनिया का रंग रूप ही बदल दिया है. इसके पीछे काम करने वाली तकनीक आज 20 साल पुरानी हो गई है. संचार के क्षेत्र में ग्लोबल सिस्टम फॉ़र मोबाइल (जीएसएम) यानी वैश्विक व्यवस्था पर आधारित मोबाइल नेटवर्क तैयार करने के लिए 7 सितम्बर, 1987 को 15 फ़ोन कंपनियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. जीएसएम एसोसिएशन के अनुसार आज ढाई अरब से ज़्यादा लोग मोबाइल फ़ोन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है. इसकी लोकप्रियता का पता इससे लगता है कि विकासशील देशों में मोबाइल हैंडसेट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. जीएसएम एसोसिएशन के प्रमुख राबर्ट कान्वे बताते हैं, "इस तकनीक पर काफ़ी पहले से काम हो रहा था लेकिन 1987 में हुए समझौते के बाद विश्व का मोबाइल उद्योग इस पर आधारित नेटवर्क बनाने में जुट गया." वे कहते हैं, "जीएसएम मानक तय करने के बाद किसी को इसकी व्यापक क्षमताओं का अंदाज़ा नहीं था. तब से जीएसएम मोबाइल का प्रयोग करने वाले लोगों की संख्या में लगातार बढ़ी है." भविष्य का मोबाइल सेट
राबर्ट कान्वे का मानना हैं कि एक समय अमीरों के पास ही दिखने वाले मोबाइल सेट अब हर आम व्यक्ति की ज़रूरत बन गया है. जीएसएम एसोसिएशन के आंकड़े बताते हैं कि मोबाइल फ़ोन के कनेक्शन की संख्या एक अरब तक पहुंचने में पूरे 12 साल लगे थे जबकि यही संख्या सिर्फ़ 30 महीनों में दो अरब तक पहुंच गई. रॉबर्ट कान्वे बताते हैं कि विकासशील देशों में भी अब लोगों का काम इसके बिना नहीं चलता है क्योंकि अब मोबाइल हैंडसेट और नेटवर्क कनेक्शन फ़िक्स फ़ोन से भी सस्ते हो गए हैं. रॉबर्ट कान्वे के मुताबिक अरबों लोगों के हाथ में मोबाइल होना तो मात्र शुरूआत भर है और इस तकनीक में और भी बहुत सारे अनुसंधान होने बाकी हैं. वे कहते हैं, आने वाले समय में आपके कपड़ों, आपके जूतों और आपकी कार में भी यही तकनीक काम करने वाली है. उदाहरण के लिए मोबाइल की यह सर्वव्यापी तकनीक स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी क्रांति ला सकती है. लोग कंप्यूटर मॉनिटर पहनकर चलेंगे जिसमें महत्वपूर्ण जानकारियों को एकत्र और प्रसारित किया जा सकेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें युवा हैकर ने 'अनलॉक' किया आईफ़ोन को25 अगस्त, 2007 | विज्ञान मोबाइल से गाँवों को जोड़ेगी बायोडीजल08 फ़रवरी, 2007 | विज्ञान ख़तरनाक हो सकता है मोबाइल कचरा01 दिसंबर, 2006 | विज्ञान अब रीचार्जिंग की बेतार तकनीक 15 नवंबर, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||