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'निजी क्षेत्र में आरक्षण क़ानून से न हो' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय उद्योग जगत ने कहा है कि वह निजी क्षेत्र की नौकरियों में आरक्षण देने की जगह इन वर्गों को नौकरी तथा प्रशिक्षण में बढ़ावा देने के बारे में प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है. उद्योग जगत की शीर्ष संस्थाओं के प्रतिनिधियों की शनिवार को राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव टीकेए नायर के साथ बैठक हुई. निजी क्षेत्र में आरक्षण देने के लिए गठित समन्वय समिति की इस दूसरी बैठक में उद्योग जगत ने आरक्षण मसले पर संसद के किसी क़ानून की बजाय इस पर उद्योग जगत के 'एफ़ेरमेटिव एक्शन' यानि स्वैच्छिक कार्रवाई की वकालत की है. इस बैठक में समिति की अक्तूबर 2006 में हुई पहली बैठक के बाद से हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई. बैठक में शीर्ष भारतीय उद्योग संस्थाए - भारतीय उद्योग महासंघ (सीआईआई), भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (फ़िक्की) तथा एसोचैम जैसे संगठनों के अध्यक्ष तथा पूर्व अध्यक्ष मौजूद थे. सीआईआई के अध्यक्ष तथा उद्योगपति सुनील भारती मित्तल ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया, "बातचीत 'एफ़ेरमेटिव एक्शन' यानि स्वैच्छिक कार्रवाई के इर्द गिर्द ही केंद्रित रही और सरकार ने आरक्षण के लिए उद्योग जगत पर कोई दबाव नहीं डाला."
उद्योग जगत की पहल एसोचैम के अध्यक्ष वीएन धूत ने कहा कि उद्योग जगत ने पहले ही अनुसूचित जातियों और जनजातियों के उम्मीदवारों को नौकरी देने की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. उन्होंने बताया कि इन उम्मीदवारों को योग्य बनाने के लिए पाँच करोड़ रूपए का कोष बनाया है. सीआईआई के मुताब़िक उसने 345 अनुसूचित जातियों और जनजाति के उम्मीदवारों को चुना है जो इस समय देश के सात शीर्ष केंद्रों में प्रशिक्षण हासिल कर रहे हैं. इस वित्तवर्ष के दौरान उसकी 500 लोगों को प्रशिक्षित करने की योजना है. फ़िक्की ने भी चार केंद्रों में 600 लोगों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है. एसोचैम के अनुसार उसके द्वारा प्रशिक्षित किए जा रहे एक हज़ार अनुसूचित जातियों और जनजातियों के प्रशिक्षुओं में से 300 लोग रोज़गार हासिल भी कर चुके है. उद्योग जगत ने सरकार से इन अनुसूचित जाति-जनजाति बाहुल्य 40-45 ज़िलों में पड़ने वाले उद्योगों को वित्तीय मदद मुहैया कराने की मांग की है. निज़ी क्षेत्रों द्वारा आरक्षण पर किए जा रहे प्रयासों पर निग़रानी करने वाली इस समन्वय समिति की अगली समीक्षा बैठक दो महीने बाद होगी. पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री मनामोहन सिंह ने यह समिति गठित की थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'आरक्षण से समाज में विघटन बढ़ा है'05 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस पिछड़े वर्ग के धनी लोगों को भी आरक्षण08 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस आरक्षण का मामला संविधान पीठ को17 मई, 2007 | भारत और पड़ोस निजी क्षेत्र का आरक्षण से इनकार25 मई, 2007 | कारोबार 'सोशल चार्टर का विरोध करेगा निजी क्षेत्र'25 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'जातीय आधार पर आरक्षण मंज़ूर नहीं'16 जून, 2007 | भारत और पड़ोस अमरीका में 'आरक्षण' पर कोर्ट की रोक29 जून, 2007 | पहला पन्ना राजनीतिक बनाम सामाजिक परिवर्तन08 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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