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'जातीय आधार पर आरक्षण मंज़ूर नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुसलमानों को आरक्षण देने का मामला आंध्र प्रदेश सरकार के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है. सरकार की पहल पर नियुक्त किए गए विशेषज्ञ की चार प्रतिशत आरक्षण देने की सिफ़ारिश को मुस्लिम नेताओं ने ठुकरा दिया है. पिछले तीन वर्षों में मुस्लिम समुदाय को पाँच प्रतिशत आरक्षण देने की दो असफल कोशिशों के बाद आंध्र प्रदेश सरकार जल्द ही ऐसा प्रयास फिर करने जा रही है. सरकार के नियुक्त किए हुए एक विशेषज्ञ ने सिफ़ारिश की है कि सरकार जाति के आधार पर मुस्लिम समुदाय के कुछ गुटों को चार प्रतिशत आरक्षण दे. लेकिन मुस्लिम समुदाय के नेताओं ने इसे मुसलमानों को जाति के आधार पर बाँटने की एक कोशिश बताकर ठुकरा दिया है. पिछले महीने ही आंध्र प्रदेश सरकार ने एक रिटायर्ड आईएएस अधिकारी पीएस कृष्णन को मुस्लिम समुदाय के पिछड़े वर्गों का पता लगाने और उन्हें आरक्षण देने की सिफ़ारिश के लिए नियुक्त किया था. अब कृष्णन ने अपने आकलन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद राज्य सरकार से कहा है कि वो राज्य के मुसलमानों के 14 गुटों को चार प्रतिशत आरक्षण दे सकती है. इनमें पत्थर तोड़ने, बोरियाँ बनाने वालों से लेकर क़ब्र खोदने वाले और भीख मांगने वालों अनेक वर्ग शामिल हैं. कृष्णन की रिपोर्ट में कहा गया है की सैयद, पठान और मुग़ल जैसे उच्च मुस्लिम वर्गों को आरक्षण ना दिया जाए. जबकि शेख़ मुसलमानों को आरक्षण दिया जा सकता है. इस सिफ़ारिश पर मुस्लिम समुदाय ने काफ़ी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. कई मुस्लिम संगठनों की एक्शन कमेटी इस रिपोर्ट और उसकी सिफ़ारिश को ठुकरा दिया है. अभियान इस समिति के एक सदस्य और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस सिफ़ारिश के विरोध का कारण बताया. उन्होंने कहा, "मुसलमानों में कोई जाति व्यवस्था है ही नहीं. ये इस्लाम की शिक्षा के ख़िलाफ़ है."
उन्होंने कहा कि अगर इस तरह आरक्षण की बात की जाएगी, तो मुसलमान इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे. एक्शन कमेटी ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर वो इस सिफ़ारिश को लागू करने की कोशिश करती है, तो वह इसके ख़िलाफ़ अभियान चलाएगी. इससे पहले राज्य सरकार ने आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर मुसलमानों को पाँच प्रतिशत आरक्षण देने का क़ानून बनाया था, जिसे हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया था. इसके ख़िलाफ़ सरकार की अपील अभी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है. मुसलमानों की मांग है कि सरकार पहले सुप्रीम कोर्ट में ये केस लड़े. सरकार के सूत्रों का कहना है कि वह इस रिपोर्ट पर विचार कर रही है. और वो इस आधार पर अगले महीने एक आदेश जारी करेगी ताकि इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए इसी वर्ष से मुसलमान छात्रों को आरक्षण मिल सके. | इससे जुड़ी ख़बरें बिगड़ते हालात का ज़िम्मेदार कौन?02 जून, 2007 | भारत और पड़ोस आरक्षण का मामला संविधान पीठ को17 मई, 2007 | भारत और पड़ोस आईआईएम, आईआईटी में प्रवेश को मंज़ूरी26 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस आरक्षण पर कोर्ट का फ़ैसला सुरक्षित09 मई, 2007 | भारत और पड़ोस ओबीसी आरक्षण पर जल्द सुनवाई24 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस मुसलमानों और ईसाइयों के लिए आरक्षण05 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस स्टे हटाने का उपाय करेगी सरकार31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस 'आरक्षण पर फ़ैसला विशेषज्ञ करेंगे'31 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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