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मंगलवार, 24 अप्रैल, 2007 को 10:07 GMT तक के समाचार
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ओबीसी आरक्षण पर जल्द सुनवाई
भारत का सुप्रीम कोर्ट
अंतरिम आदेश में ओबीसी आरक्षण पर रोक लगाई गई थी
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उच्च शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के उम्मीदवारों को आरक्षण दिए जाने के मसले पर जल्दी सुनवाई करने के केंद्र के आग्रह को स्वीकार कर लिया है. सुनवाई की तारीख आठ मई तय की है.

अटॉर्नी जनरल मिलन कुमार बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष यह मामला उठाते हुए दलील दी कि यह जनहित से जुड़ा मुद्दा है और जल्दी सुनवाई नहीं होने से बड़ी संख्या में छात्रों का एक साल बर्बाद हो सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ओबीसी वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षण पर लगी रोक के मामले में केंद्र सरकार की याचिका को ख़ारिज़ कर दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख अगस्त में तय की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 29 मार्च को आगामी शैक्षणिक सत्र में उच्च शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को आरक्षण देने के फ़ैसले पर रोक लगा दी थी.

विरोध

सोमवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अरिजीत पसायत की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा था कि विवादास्पद क़ानून केंद्रीय शैक्षणिक संस्थान (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम 2006 की संवैधानिक वैधता पर सुनवाई अगस्त के तीसरे सप्ताह में होगी.

 मैं उम्मीद करता हूँ कि मुख्य न्यायाधीश भावनाओं को ध्यान में रख न्यायपूर्ण फ़ैसला करेंगे
अर्जुन सिंह, मानव संसाधन विकास मंत्री

केंद्र के जल्दी सुनवाई के आग्रह का याचिकाकर्ता के वकील ने विरोध किया.

वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि केंद्र को उसी खंडपीठ के सामने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करना चाहिए जिसने 29 मार्च को अंतरिम आदेश पारित किया था और सोमवार को स्थगन आदेश देने से इनकार किया था.

उन्होंने दलील दी कि चूँकि यह मामला खंडपीठ के विचाराधीन है और उसने सुनवाई की अगली तारीख अगस्त में तय की है, लिहाज़ा यह मुद्दा सिर्फ़ वहीं उठाया जा सकता है.

दलील

ग़ौरतलब है कि सरकार ने पूर्व में इस मामले की सुनवाई के लिए पाँच न्यायाधीशों वाली संवैधानिक पीठ का गठन करने की भी माँग की थी.

सरकार ने अपनी दलील में कहा कि मंडल मामले में नौ सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने ओबीसी आरक्षण पर मुहर लगाई थी और यह सभी संबंधित पक्षों के लिए लागू होती है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केंद्र सरकार की ओर से इस बारे में दी गई दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता है.

इससे पूर्व, मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "मैं उम्मीद करता हूँ कि मुख्य न्यायाधीश भावनाओं को ध्यान में रख न्यायपूर्ण फ़ैसला करेंगे."

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