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हच को ख़रीदने की मुहिम अंतिम चरण में | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में मोबाइल सेवा देने वाली चौथी सबसे बड़ी कंपनी हचिसन-एस्सार के लिए ब्रिटिश कंपनी वोदाफोन, रिलायंस कम्युनिकेशंस और हिंदुजा ने बोली लगा दी है. दरअसल हचिसन-एस्सार में हॉंगकॉंग स्थित हचिसन टेलीकॉम इंटरनेशनल की 67 फ़ीसदी हिस्सेदारी है और 33 फ़ीसदी हिस्सा भारतीय कंपनी एस्सार समूह का है. हचिसन इस साझा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी को बेचने का फ़ैसला किया था जिसके बाद दुनिया भर की कंपनियाँ इस ओर अग्रसर हुईं. समाचार पीटीआई के मुताबिक तीनों कंपनियों के अलावा एस्सार ने भी हच की हिस्सेदारी ख़रीदने के लिए बोली लगाई है. चारों कंपनियों ने भारतीय समयानुसार शनिवार की मध्यरात्री तक हॉंगकॉंग में बोली लगाई. हालाँकि यह पता नहीं चल सका है कि किसने कितनी रक़म देने की पेशकश की है. जानकारों का कहना है कि हच-एस्सार में हच के सारे शेयर ख़रीदने का सौदा 20 अरब डॉलर तक जा सकता है. ऐसी संभावना है कि हचिसन टेलीकॉम इन रविवार को अपने बोर्ड की बैठक करेगा जिसमें चारों कंपनियों की पेशकश पर चर्चा होगी जिसमें यह तय हो सकता है कि हिस्सेदारी किस कंपनी को बेची जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें एस्सार ख़रीद की दौड़ में हिंदुजा भी 04 जनवरी, 2007 | कारोबार 'एस्सार और हिस्सा पाने की कोशिश में'28 दिसंबर, 2006 | कारोबार वोडाफ़ोन और रिलायंस के बीच मुक़ाबला21 दिसंबर, 2006 | कारोबार मोबाइल फोन का बढ़ता बाज़ार06 अक्तूबर, 2006 | कारोबार एयरटेल ने अमरीकी बाज़ार में दस्तक दी07 दिसंबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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