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महँगाई दो साल के सर्वोच्च स्तर पर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सरकार भले ही महँगाई पर काबू पाने के लिए कई क़दम उठा रही हो लेकिन यह थमती नज़र नहीं आ रही है. शुक्रवार को जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार खाद्य पदार्थों की क़ीमतें बढ़ने की वजह से 27 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर बढ़कर 6.58 प्रतिशत हो गई. पिछले दो वर्षों में मुद्रास्फीति की यह सबसे ऊँची दर है. पिछले सप्ताह मुद्रास्फीति की दर 6.11 प्रतिशत दर्ज की गई थी. जबकि गत वर्ष यानी 2006 में इसी सप्ताह के दौरान मुद्रास्फीति की दर 4.04 फ़ीसदी थी. 27 जनवरी को समाप्त हुए सप्ताह के लिए जारी सामानों के थोक मूल्य सूचकांक में पिछले सप्ताह के मुक़ाबले मामूली बढ़ोत्तरी हुई है और यह 208.5 के स्तर से 208.8 के स्तर पर पहुँच गया. आँकड़ों के अनुसार सब्ज़ी, अंडा, माँस, दूध और फलों की बढ़ती क़ीमतों की वजह से ही मुद्रास्फीति की दर बढ़ी है. ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में सरकार महँगाई की रफ़्तार थामने के लिए कई क़दम उठा चुकी है. इसके तहत 31 तारीख़ को रिज़र्व बैंक ने छोटी अवधि के लिए बैंकों को दी जाने वाली उधारी पर ब्याज़ दर यानी रेपो रेट चौथाई अंक बढा कर 7.25 प्रतिशत करने की घोषणा की थी. साथ ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी कह चुके हैं कि सरकार महँगाई को नियंत्रित रखने के लिए कृतसंकल्प है और इसके लिए कुछ नीतिगत फ़ैसले लिए जा सकते हैं. जानकारों का मानना है कि सरकार के इस क़दम का असर अगले सप्ताह जारी होने वाली मुद्रास्फीति की दर पर दिख सकता है. | इससे जुड़ी ख़बरें किसानों की हालत पर प्रधानमंत्री चिंतित18 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस दुनिया में तेज़ विकास का अनुमान14 सितंबर, 2006 | कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ24 जून, 2006 | कारोबार महंगाई घटाने के लिए आयात की छूट22 जून, 2006 | भारत और पड़ोस 'विकास दर दस प्रतिशत हो सकती है'18 अप्रैल, 2006 | कारोबार ब्याज दर में कटौती25 जून, 2003 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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