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'कंपनियाँ ही करें ज़मीन का अधिग्रहण' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय जनता पार्टी का मानना है कि विशेष आर्थिक ज़ोन (एसईजेड) के लिए ज़मीन का अधिग्रहण सरकार को नहीं बल्कि डेवलपर को खुद करना चाहिए. हाँ, कुछ विवाद होने पर सरकार हस्तक्षेप कर सकती है. एसईजेड नीति की घोषणा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार ने ही अप्रैल 2000 में विदेशी व्यापार नीति के तहत शुरू की थी और अब भी सैद्धांतिक तौर पर भाजपा एसईजेड के पक्ष में हैं. लेकिन पिछले पाँच साल के अनुभवों की समीक्षा के बाद इसमें जो कुछ कमियाँ और त्रुटियाँ पाई गई हैं उन्हें ठीक किया जाना चाहिए. आरोप काँग्रेस सरकार ने एसईजेड को रीयल एस्टेट प्रोजेक्ट के रूप में बदल दिया है और इन्हें लगातार मंजूरी दी जा रही है. पार्टी ने एसईजेड पर मेरी अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है और हमने इस मामले के सभी पहलुओं को खंगाला है. पश्चिम बंगाल का सिंगूर का विवाद सामने है. वहाँ राज्य सरकार ने उपजाऊ ज़मीन का ही अधिग्रहण कर दिया. देश के सामने वैसे ही खाद्यान्न सुरक्षा का सवाल है. देश की आबादी 1.6 फ़ीसदी की दर से बढ़ रही है, जबकि खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि दर महज़ 1.3 फ़ीसदी है. इसलिए उपजाऊ ज़मीन का अधिग्रहण किसी कीमत पर नहीं होना चाहिए. हमने सरकार को सिफ़ारिश की है कि जिन किसानों की ज़मीन अधिग्रहित की जा रही है, उसमें उन्हें भागीदार बनाया जाना चाहिए. किसानों को बाज़ार दर से तीन गुना मुआवज़ा दिया जाना चाहिए.
एनडीए सरकार के समय में काम कर रहे एसईजेड अच्छा काम कर रहे थे. निश्चित रूप से इनसे निर्यात बढ़ा. एसईजेड में निवेश भी बढ़ा, लेकिन अब डीएलएफ जैसी कंपनियाँ आ रही हैं जो इनका इस्तेमाल रीयल एस्टेट के रूप में कर रही हैं. निगरानी भाजपा चाहती है कि अधिग्रहित भूमि का 60 फ़ीसदी इस्तेमाल निर्माण और प्रोसेसिंग से जुड़े काम के लिए हो. बचे हुए 40 फ़ीसदी क्षेत्र में एसईजेड में काम करने वाले लोगों और उनके परिवारों के लिए घर, अस्पताल और स्कूल आदि बनाए जा सकते हैं. भाजपा एसईजेड के नाम पर बिल्डरों को ज़मीन सौंपने का पुरजोर विरोध करेगी. पूरी आशंका है कि ये लोग इस ज़मीन पर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर मोटा मुनाफ़ा कमाएंगे. हजारों एकड़ ज़मीन को अधिग्रहित कर ऐसे लोगों को सौंपना और फ़िर उन पर कोई निगरानी नहीं रखा जाना अच्छा नहीं है. हमने सरकार को समिति की सिफ़ारिशें सौंप दी हैं और संसद के इसी सत्र में ये मसला उठाने के लिए सरकार को नोटिस भी दे दिया है. इस मामले में सरकार का रुख क्या है संसद में बहस के दौरान पता चल जाएगा. (आलोक कुमार के साथ बातचीत पर आधारित) | इससे जुड़ी ख़बरें ओएनजीसी को मिला गैस का भंडार17 दिसंबर, 2006 | कारोबार 'एसईजेड से 15 लाख लोगों को रोज़गार'17 दिसंबर, 2006 | कारोबार खेती के बढ़ते संकट से एसईजेड पर उठे सवाल17 दिसंबर, 2006 | कारोबार असमानता बढ़ाने वाला है एसईजेड17 दिसंबर, 2006 | कारोबार एसईजेड के इतिहास पर एक नज़र17 दिसंबर, 2006 | कारोबार ज़्यादातर प्रस्ताव आईटी क्षेत्र के लिए17 दिसंबर, 2006 | कारोबार टाटा मोटर्स की परियोजना विवादों में18 दिसंबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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