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'लंदन को भारत से व्यापार बढ़ाना होगा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन की राजधानी लंदन में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि लंदन को भारत और चीन से व्यापारिक रिश्ते बढ़ाने की ज़रूरत है वरना वो अन्य जगहों से पिछड़ जाएगा. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लंदन की वैश्विक छवि को बावजूद भारतीय कंपनियाँ अमरीका और दुबई से बेहतर रिश्ते बना रही हैं. इसके अलावा ये भी कहा गया है कि चीनी कंपनियाँ भी अमरीका, हॉंगकॉंग और सिंगापुर का रुख़ कर रही हैं. ये रिपोर्ट सामी कन्सल्टिंग एंड ऑक्सफ़र्ड अनालिटिका ने तैयार की है और इसके मुताबिक लंदन अपनी क्षमता के अनुसार काम नहीं कर रहा. रिपोर्ट को सिटी ऑफ़ लंदन ने कमिश्न किया था और इसमें भारत और ब्रिटेन के बीच ऐतिहासिक रिश्तों की बात की गई है. भारतीय और चीनी अर्थव्यवस्था काफ़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं और रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में प्रोजेक्ट फ़ाइनेन्सिंग यानी योजनाओं के लिए पैसा जुटाने की काफ़ी संभनाएँ हैं और चीन में पेंशन उप्पादों की काफ़ी माँग है. रिपोर्ट के मुताबिक लंदन में कंपनियों को आगे बढ़कर भारतीय और चीनी वित्तीय संस्थाओं से मेल जोल बढ़ाना होगा. रिपोर्ट ने अनुशंसा की है कि ब्रितानी कंपनियाँ भारत में निवेश करने की संभावनाएँ तलाशें और सिर्फ़ मुंबई और बंगलौर जैसी जगहों तक सीमित न रहें. वर्ष 2001 की जनसंख्या गणना के मुताबिक ब्रिटेन की कुल छह करोड़ की आबादी में से करीब 1.8 फ़ीसदी आबादी भारतीय है और करीब 0.4 फ़ीसदी चीनी हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें चीन में घूसखोरों की शामत24 अक्तूबर, 2006 | कारोबार 'दूसरे देशों से पूँजी निवेश नियंत्रित हो'23 अक्तूबर, 2006 | कारोबार टाटा पाँचवी सबसे बड़ी इस्पात कंपनी20 अक्तूबर, 2006 | कारोबार भारत में प्रशिक्षित युवकों की किल्लत!12 अक्तूबर, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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