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'आय की तुलना में मँहगाई की गति तेज' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उद्योग और वाणिज्य संगठन एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पिछले एक साल के दौरान बुनियादी सामानों की कीमतों में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. दूसरी ओर इसी अवधि में भारतीयों की औसत प्रति व्यक्ति आय में सिर्फ़ छह फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई. एसेचैम इको पल्स रिपोर्ट यानी एईपी के मुताबिक जुलाई 2005 से अगस्त 2006 के बीच दाल, कॉफी, चाय और मसालों के दामों में 25 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत का उछाल आया. गेहूँ, चीनी, दूध, अंडे, मछली और माँस की कीमतें इस दौरान लगभग आठ प्रतिशत बढ़ी. आय वर्ष 2005 में एक भारतीय की औसत वार्षिक आय 19 हज़ार 500 रुपए थी जो पिछले एक साल के दौरान सिर्फ़ 1200 रुपए बढ़ कर 20 हज़ार 700 रुपए हो गई. रिपोर्ट में मँहगाई की दर और आय वृद्धि दर में कोई संतुलन नहीं होने पर चिंता जताई गई है. एसोचैम का कहना है कि गेहूँ की कीमतों में बढ़ोत्तरी माँग के अनुरुप आपूर्ति नहीं होने के कारण हुई है. ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने पिछले चार वर्षों में पहली बार लगभग 40 लाख टन गेहूँ आयात करने का फ़ैसला किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गेहूँ की आपूर्ति घटने से खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है, इसलिए सरकार को समय रहते इसका पैदावार बढ़ाने के उपाए करने चाहिए. गन्ना उत्पादक राज्यों में ख़राब मौसम के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ जिससे कीमतें बढ़ी हैं. दुनिया में चीनी की सबसे अधिक खपत भारत में होती है और यह दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'ब्याज दर नहीं बढ़ाने की अपील'02 अक्तूबर, 2006 | कारोबार कश्मीर में बाढ़ के कारण लाखों प्रभावित04 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस बाड़मेर ज़िले में बाढ़ का क़हर28 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का विरोध07 जून, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार की आश्वस्त करने की कोशिश21 मई, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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