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शेयर बाज़ार शुक्रवार को भी गिरा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय शेयर बाज़ार में गुरूवार को आई ऐतिहासिक गिरावट के बाद नज़रें शुक्रवार के व्यवसाय पर लगी रहीं और लगातार दूसरे दिन भी सूचकांक में भारी गिरावट आई.. हालांकि शुक्रवार को शेयर बाज़ार में नाटकीय उतार चढ़ाव का दौर दिखाई दिया. शुरुआती व्यवसाय में बाज़ार में पहले तो मज़बूती दिखाई दी और बाज़ार ऊपर गया लेकिन जल्दी ही बाज़ार फिर नीचे आने लगा. दिन का कारोबार ख़त्म होने तक सूचकांक 452.82 अंक गिरकर 10938.61 पर बंद हुआ. नेशलन स्टॉक एक्सचेंज में भी 142 अंकों यानी 4.19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. सूचकांक मार्च 2006 में 11 हज़ार को पार कर गया था. शुक्रवार को दोपहर बाद बीएसई सूचकांक और नीचे गिरकर 11003 अंको तक चला गया फिर इसमें सुधार शुरु हुआ और फिर सूचकांक गुरुवार के स्तर से कुछ ऊपर गया. बाज़ार खुलने के घंटे भर बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक गुरुवार की तुलना में 281 अंक नीचे आ गया था. उधर वित्तमंत्री ने गुरुवार को ही स्पष्टीकरण दे दिया है कि भारत सरकार की ओर से विदेशी संस्थागत निवेशकों पर किसी नए कर का कोई प्रस्ताव नहीं है. ऐतिहासिक गिरावट गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के संवेदी सूचकांक 826 अंक नीचे गिर कर 11,391 अंकों पर बंद हुआ था. ये गिरावट 6.76 प्रतिशत की थी. इसी तरह नेशलन स्टॉक एक्सचेंज (एनएसए) का संवेदी सूचकांक निफ़्टी 246 अंक नीचे गिरकर 3,388 अंक पर बंद हुआ था. एनएसई में गिरावट 6.77 प्रतिशत थी. ये भारतीय शेयर बाज़ार की एक दिन के व्यवसाय में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट है. अनुमान है कि इस गिरावट से निवेशकों को ही दो लाख करोड़ से अधिक का नुक़सान उठाना पड़ा है. कई बड़ी कंपनियाँ भी इससे बुरी तरह प्रभावित हुई हैं. कारण गुरुवार को बाज़ार खुला तो अंतरराष्ट्रीय शेयर बाज़ार में गिरावट का असर भारत में भी दिखाई दिया और मुंबई शेयर बाज़ार के सूचकांक में शुरुआती कुछ मिनटों में ही बीएसई सूचकांकों में 542 अंकों की गिरावट दर्ज की गई. दोपहर तक ये गिरावट 600 के क़रीब पहुँच चुकी थी.
लेकिन दोपहर बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों पर टैक्स लगाए जाने की ख़बरों के बाद निवेशकों ने बिकवाली जारी रखी और बाज़ार गिरता ही रहा. हालांकि शाम को वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने सफ़ाई दे दी थी कि भारत सरकार ने किसी भी विदेशी संस्थागत निवेशक (एफ़आईआई) का आकलन व्यावसायिक संस्था के रुप में नहीं कर रही है. उन्होंने साफ़ किया कि एफ़आईआई को सरकार निवेशक ही मानती है. लेकिन तब तक बाज़ार धराशाई हो चुका था. उल्लेखनीय है कि बुधवार को अमरीका और यूरोप के शेयर बाज़ार में तीन साल की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी. वैसे इस सप्ताह की शुरुआत से ही शेयर बाज़ार में मंदी दिखाई पड़ रही है. सोमवार को शेयर बाज़ार में 462 अंकों की गिरावट आई थी जिसके कारण इसे एक और ब्लैक मंडे कहा गया था. उल्लेखनीय है कि 17 अप्रैल 2004 को भी सोमवार था जब सेंसेक्स 565 से ज़्यादा अंकों से नीचे आया था. मंगलवार को भी सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 400 अंको की डुबकी लगा चुका था लेकिन अंतिम कारोबारी घंटों में 50 अंकों की सुधार के साथ बाज़ार बंद हुआ था. | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई शेयर बाज़ार में रिकॉर्ड गिरावट18 मई, 2006 | कारोबार अमरीका-यूरोप के शेयर बाज़ार धराशाई18 मई, 2006 | कारोबार शुरुआती झटकों से उबरा शेयर बाज़ार16 मई, 2006 | कारोबार शेयर बाज़ार में एक और 'ब्लैक मंडे'15 मई, 2006 | कारोबार मुंबई शेयर बाज़ार की रिकॉर्ड ऊँचाई06 फ़रवरी, 2006 | कारोबार सूचकांक साढ़े बारह हज़ार से ऊपर10 मई, 2006 | कारोबार सेंसेक्स भारी गिरावट के बाद संभला28 अप्रैल, 2006 | कारोबार 16 दिनों में सूचकांक 12 हज़ार पर पहुँचा20 अप्रैल, 2006 | कारोबार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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