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डॉक्टर रेड्डीज़ ख़रीदेगा जर्मन कंपनी को | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दवा बनाने वाली भारत की अग्रणी कंपनी डॉक्टर रेड्डीज़ जर्मनी की कंपनी बीटाफार्म को ख़रीदने जा रही है. यह सौदा साढ़े पाँच करोड़ डॉलर में होने वाला है. बीटाफार्म को ख़रीदने का फ़ैसला रेड्डीज़ लेबोरेट्रीज़ ने यूरोपीय बाज़ार में अपनी पैठ बनाने के लिए किया है. इस समय बीटाफार्म की मिल्कियत ब्रिटेन की एक कंपनी 3आई के पास है. डॉक्टर रेड्डीज़ के चेयरमैन अंजी रेड्डी ने इस सौदे को विस्तार की कंपनी की नीति के अनुरूप एक बड़ा क़दम बताया है. बीटाफार्म जर्मनी की चौथी सबसे बड़ी दवा निर्माता कंपनी है, बीटाफार्म को ख़रीदने की दौड़ में भारत की ही एक और कंपनी रैनबैक्सी भी शामिल थी लेकिन डॉक्टर रेड्डीज़ ने बाज़ी मार ली. रैनबैक्सी ने इस सप्ताह के शुरू में कहा था कि वह जर्मनी की एक दवा कंपनी को ख़रीदने के लिए बातचीत कर रही है लेकिन उसने बीटाफार्म का नाम नहीं लिया था. डॉक्टर रेड्डीज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जीवी प्रसाद ने कहा, "यह निवेश हमें मज़बूत बुनियाद देगा जिसके आधार पर हम यूरोप में अच्छी पैठ बना सकेंगे." डॉक्टर रेड्डीज़ लगभग 2000 करोड़ रूपए का कारोबार करने वाली कंपनी है जिसकी शुरूआत 1984 में हुई थी. डॉक्टर रेड्डीज़ न्यूयॉर्क शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध होने वाली पहली भारतीय दवा कंपनी है, उसके शेयरों का कारोबार न्यूयॉर्क में पिछले पाँछ वर्षों से हो रहा है. | इससे जुड़ी ख़बरें आगे बढ़ा भारतीय विज्ञान जगत22 दिसंबर, 2004 | विज्ञान रैनबैक्सी की 'एड्स दवा' अमरीका पहुँची13 जनवरी, 2005 | विज्ञान गोमूत्र से साबुन, टूथपेस्ट और दवा भी! 21 मार्च, 2005 | विज्ञान सस्ती दवाएं नहीं बन सकेंगी23 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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