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रोवर दिवालिएपन के कगार पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ब्रिटेन में सरकार के लिए प्रतिष्ठा का मुद्दा बन चुकी एमजी रोवर कार कंपनी के वजूद के लिए ख़तरा पैदा हो गया है क्योंकि चीन की सबसे बड़ी कार कंपनी शंघाई ऑटोमोटिव कॉरपोरेशन के साथ इसके साझे व्यापार का सौदा नाकाम हो गया है. ब्रितानी सरकार ने घोषणा की है कि गुरूवार को इस सौदे की बातचीत समाप्त होने के बाद रोवर के दिवालिएपन की कार्यवाही शुरू हो गई है. रोवर कंपनी के चेयरमैन जॉन टॉवर्स नेबीबीसी को बताया कि शंघाई ऑटोमोटिव कॉरपोरेशन ने साझेदारी पर हो रही बातचीत ख़त्म कर दी है क्योंकि उसे रोवर के तमाम क़र्ज़ चुकाने की क्षमता के बारे में चिंताएँ पैदा हो गई हैं. जॉन टॉवर्स ने चीन से रवाना होते वक़्त कहा कि वह लंदन इस चिंता के साथ वापस लौट रहे हैं कि अब आगे क्या किया जाए हालाँकि उन्होंने यह पुष्टि नहीं की कि रोवर कंपनी अब दीवालिएपन की तरफ़ बढ़ रही है या नहीं. रोवर कंपनी में क़रीब छह हज़ार लोग काम करते हैं और इसका कारख़ाना बरमिंघम के पास लोंगब्रिज में है. बीबीसी के राजनीतिक मामलों के संवाददाता का कहना है कि इस सौदे की नाकामी से सबसे ज़्यादा राजनीतिक नुक़सान सत्तारूढ़ लेबर पार्टी को होगा क्योंकि मई में ही आम चुनाव होने वाले हैं. संवाददाताओं का कहना है कि रोवर मुद्दा सरकार के लिए प्रतिष्ठा का का सवाल बन चुका है. सरकार का कहना है कि वह मज़दूर संगठनों के साथ मिलकर अब इस पर विचार करेगी की फ़ैक्टरी में कार निर्माण का काम जारी रहे. |
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