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शेयर बाज़ार में 223 अंकों की गिरावट | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केंद्र में नई गठबंधन सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम का शेयर बाज़ार पर नकारात्मक असर पड़ा है. मुंबई शेयर बाज़ार कारोबारी हफ़्ते के आख़िरी दिन 4.41 प्रतिशत यानी 223 अंक नीचे गिरकर 4835 पर बंद हुआ. सरकारी शेयरों के साथ-साथ रुपए की क़ीमतों में भी गिरावट आई. 17 मई को आई ऐतिहासिक गिरावट के बाद बाज़ार में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. इस कारोबारी सप्ताह में शेयर बाज़ार में 2.5 फ़ीसदी की गिरावट आई. हालाँकि आर्थिक उदारीकरण के जनक मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री और पी चिदंबरम के वित्त मंत्री बनने से बाज़ार ने शुरू में सकारात्मक असर दिखाया था. लेकिन लग रहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों में वामपंथी पार्टियों के असर का बाज़ार स्वागत नहीं कर रहा. नकारात्मक असर शुक्रवार को मुंबई शेयर बाज़ार में शुरू से ही नकारात्मक असर दिख रहा था. गुरुवार देर शाम को जारी काँग्रेस की अगुआई वाली गठबंधन सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर बाज़ार ने उत्साह नहीं दिखाया. काँग्रेस गठबंधन वाली सरकार ने पिछली सरकार के निजीकरण कार्यक्रम में कई बदलाव करने की घोषणा की है और अपना ध्यान ग्रामीण इलाक़ों ख़ासकर कृषि क्षेत्र की ओर देने की बात कही है. लेकिन लगता है कि शेयर बाज़ार वामपंथी झुकाव वाली आर्थिक नीतियों को लेकर उत्साहित नहीं. काँग्रेस गठबंधन वाली सरकार के चुनाव में जीत हासिल करने के बाद से शेयर बाज़ार में 900 अंकों की गिरावट आई है. कुछ जानकार बाज़ार की प्रतिक्रिया को गंभीरता से ले रहे हैं तो कुछ इसे बहुत ज़्यादा तरज़ीह देने के पक्ष में नहीं. |
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