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यूरोपीय संघ को भारत से शिकायत
यूरोपीय संघ ने भारत पर व्यापारिक कानूनों के दुरुपयोग और निर्माताओं को आयात से ग़लत तरीक़े से बचाने का आरोप लगाया है. संघ ने विश्व व्यापार संघ से शिकायत की है कि भारत 'डंपिंग रोधी' मामलों की सुनवाई के समय सही प्रक्रिया नहीं अपना रहा है. संघ का दावा है कि इसकी वजह से यूरोपीय कंपनियों को नुक़सान हो रहा है और रसायन, दवाओं के साथ ही वस्त्रों पर आयात शुल्क भी काफ़ी ऊँचा है. ये मामला उस समय उठाया गया है जब अमरीका ने यूरोप के साथ बढ़ते एक विवाद को थामने के लिए स्टील पर लगने वाला शुल्क हटा लिया था. अमरीका और भारत जैसे देश उस समय शुल्क लगा देते हैं जब उन्हें लगता है कि विदेशी उत्पादक बाज़ार भाव से कम में कोई उत्पाद उनके यहाँ भेज रहे हैं. इस तरह ये देश बाज़ार पर अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए ये क़दम उठाते हैं या फिर इसलिए उठाते हैं क्योंकि उत्पादकों को सरकारी सब्सिडी मिल रही होती है. यूरोपीय संघ के व्यापार आयुक्त पास्कल लेमी की प्रवक्ता अरांशा गोंज़ालेज़ ने कहा कि यूरोपीय संघ ने ये मामला विश्व व्यापार संघ के हवाले तब किया है जब भारत के साथ इस बारे में वार्ता विफल हो गई. अब विश्व व्यापार संघ इस मामले में दोनों के बीच मध्यस्थता करेगा और तब भी अगर मामला हल नहीं होता है तो वह कोई निर्णय सुनाएगा. गोंज़ालेज़ के अनुसार चिंता इसलिए है क्योंकि भारत ने डंपिंग रोधी क़ानून का दुरुपयोग किया है और 1999 से लेकर अब तक 27 मामलों में यूरोपीय संघ के विरुद्ध फ़ैसला सुनाया गया है. यूरोपीय संघ का आरोप है कि कंपनियों को अक़सर पूरी जानकारी नहीं दी जाती. गोंज़ालेज़ के अनुसार भारत ने जिस तरह इस मामले में सुनवाइयाँ की हैं उसमें काफ़ी ख़ामियाँ हैं. |
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