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यूरोपीय आयोग में सब सदस्यों को प्रतिनिधित्व
नेपल्स में यूरोपीय संघ की दो दिन की बैठक के बाद यूरोपीय संघ की कार्यकारिणी यानी यूरोपीय आयोग में हर सदस्य देश को प्रतिनिधित्व देने पर सहमति हो गई है. यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की बैठक में हुए इस फ़ैसले को यूरोपीय संघ के 'छोटे' देशों की एक महत्त्वपूर्ण जीत माना जा रहा है. इससे पहले ये प्रस्ताव आया था कि यदि यूरोपीय आयोग में 25 या ज़्यादा सदस्य होगें तो उसका काम करना मुश्किल हो जाएगा. इसीलिए सुझाया जा रहा था कि प्रमुख देशों के पास ही मतदान का अधिकार होना चाहिए. इसके अलवा ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के बीच समझौता हो गया है कि यूरोपीय संघ को रक्षा के क्षेत्र में एक मज़बूत भूमिका देने के साथ-साथ वे नैटो के साथ भी रिश्ते क़ायम रखेंगे. इटली के विदेश मंत्री फ़्रैंको फ़्रैटिनी ने इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा, "यह एक महत्त्वपूर्ण क़दम है क्योंकि कुछ ही हफ़्ते पहले इस विषय पर मतभेद थे. " लेकिन इस बैठक के बाद भी इस बात पर मतभेद बने हुए है कि मतदान में किस देश के मत का कितना वज़न हो. स्पेन और पोलैंड दोनों देश इस अधिकार के बंटवारे का कड़ा विरोध कर रहे हैं. दो हफ़्ते में यूरोपीय संघ के संविधान की स्वीकृति इस बात पर निर्भर कर सकती है कि इन देशों को क्या हासिल होता है. |
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