बेरोजगारी भयानक स्तर पर, 2016 तक राहत नहीं: आईएलओ

विश्व मजदूर संगठन ने कहा अफ्रीका और मध्य पूर्व बेरोजगारी से सामाजिक उथल-पुथल का खतरा है

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विश्व मजदूर संगठन (आईएलओ) ने चेतावनी दी है कि पूरी दुनिया में बेरोजगारी की स्थिति 'भयानक' है और इसमें जल्द कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है.

जिनेवा में आईएलओ की रोजगार पर प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप में चलाए जा रहे आर्थिक कटौती के विभिन्न कार्यक्रमों से बेरोजगारी की स्थिति ज्यादा बिगड़ रही है.

दो करोड़ से अधिक बेरोजगार

रिपोर्ट के अनुसार इस साल के अंत तक बेरोजगारों की संख्या दो करोड़ बारह लाख हो जाएगी.

यही नहीं, दुनिया को आर्थिक मंदी से निबटने और रोजगार के क्षेत्र को मंदी के दौर से पहले के स्तर पर पहुँचने में 2016 तक का समय लग जाएगा.

आईएलओ के मुताबिक रोजगार के कुछ नए अवसर भी होगें, लेकिन वे अंशकालिक और कम तनख्वाह वाले होंगे. कुल मिलाकर वह बेरोजगारी की तुलना में नाम मात्र का होगा.

मजदूरी बढ़ाने पर जोर

आईएलओ ने सबसे ज्यादा चिंता यूरोप को लेकर प्रकट की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां के देशों में बेरोजगारी में लगातार वृद्धि हो रही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां के देशों में जिस तरह सरकारी खर्च में कटौती की योजनाएं चल रही हैं, वो रोजगार बढ़ाने में कारगर नहीं हुई हैं, बल्कि इनसे बेरोजगारों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है.

बेरोजगारी से निपटने के लिए विश्व मजदूर संगठन ने कुछ सुझाव भी दिए हैं. आईएलओ ने सुझाया है कि नागरिक सुविधा और न्यूनतम मजदूरी की दर को भी बढ़ा दिया जाना चाहिए.

आईएलओ ने यूरोप के देशों पर नाराजगी जताते हुए कहा है कि जिस तरह अंश कालीन काम तलाशे जा रहे हैं उससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है.

आईएलओ ने कहा है कि विशेष तौर पर कुछ अफ्रीकी देशों और मध्य पूर्व में यदि युवा पीढ़ी के पास रोजगार नहीं होगा तो आशा नहीं होगी जिसके चलते सामाजिक उथल-पुथल का खतरा हो सकता है.