क्या है अमरीका का बजट संकट?

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
अमरीका में सरकार का कामकाज ठप्प होने का ख़तरा बढ़ता जा रहा है.अगर शुक्रवार की रात तक डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के बीच बजट को लेकर समझौता नहीं हुआ और कोई अंतरिम बजट पारित नहीं हुआ तो सरकार का कामकाज ठप्प पड़ जाएगा.
हालांकि ज़रूरी सेवाओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा. अगर कोई समझौता हो भी जाता है तो यह सितंबर तक ही लागू रहेगा.
ऐसा इसलिए क्योंकि 2011 के बजट को प्रस्तुत करने के समय एक बार फिर रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच बजट के ख़र्च को कम करने पर तनाव पैदा होगा और उस समय एक बार फिर सरकार के कामकाज के ठप होने का खतरा पैदा हो जाएगा.
अमरीका में सरकार के कामकाज का ठप्प पड़ जाना कोई अनहोनी बात नहीं है.
पूर्व राष्ट्रपति जिमी कार्टर और रोनाल्ड रीगन के समय सरकारों का काम दस बार ठप्प हो गया था.
क्लिंटन के ज़माने में दो बार ऐसा हुआ था. अमरीका में आख़िरी बार साल 1996 में सरकार का काम इस तरह प्रभावित हुआ था.
तब बिल क्लिंटन राष्ट्रपति के पद के लिए दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और विशेषज्ञों का कहना था की वह इस संकट के कारण चुनाव हार जाएगें. लेकिन इस पूरे प्रकरण से उन्हें फ़ायदा हुआ और वह चुनाव जीत गए.
दरअसल हुआ ये था कि आम अमरीकी जनता ने इस संकट का ज़िम्मेदार रिपब्लिकन पार्टी को ठहराया जिनकी ज़िद के कारण बजट समय पर पारित नहीं हुआ और सरकार का काम ठप्प पड़ गया.
पहले भी हो चुका है

सोलह साल बाद इतिहास अपने आप को दोहरा सकता है.राष्ट्रपति बराक ओबामा भी दूसरी बार राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए खुद को उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं.
क्लिंटन के ज़माने की तरह इस बार भी रिपब्लिकन पार्टी विचारधारा के आधार पर बजट में कटौती करने पर अड़ी है और सरकार के साइज़ को कम करने पर ज़ोर दे रही है.
इसका सीधा मतलब यह हुआ की अगर पार्टी की बात मान ली जाए तो बूढ़े लोगों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं या तो कम हो जाएँगी या ख़त्म. ग़रीब तबके पर रिपब्लिकन पार्टी के प्रस्ताव का सीधा असर पड़ेगा.
डेमोक्रेट नेता और यहाँ तक की राष्ट्रपति ओबामा की भी इतिहास के पन्नों पर नज़र ज़रूर होगी.
अदंर ही अंदर सरकार के ठप्प पड़ जाने से ज़्यादा परेशान नहीं होंगे. लेकिन इससे पहले वह रिपब्लिकन पार्टी को जनता की निगाह में विलेन की तरह पेश करने की सफल कोशिश करेंगे.
रिपब्लिकन पार्टी 40 अरब डॉलर की कटौती चाहती है जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी 33 अरब डॉलर तक की कटौती मंज़ूर कर चुकी है. सवाल केवल सात अरब डॉलर का है.
सियासत

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लेकिन यह मामला इतना आसान नहीं जितना नज़र आता है. रिपब्लिकन पार्टी न केवल बजट में कटौती चाहती है बल्कि उसका यह भी प्रस्ताव है कि किन सेवाओं में कितने पैसे कम करें होंगे.
कांग्रेस के हॉउस ऑफ रिप्रेस्नटेटिव में उनको बहुमत प्राप्त है.इन लोगों के पास सुझाव देने और उस पर अड़े रहने का अधिकार है.
दूसरी तरफ़ राष्ट्रपति ओबामा भी कम सियासत नहीं कर रहे हैं. शायद इसीलिए वह बार-बार यह कह रहे हैं की कुछ लोग कटौती को लेकर सियासत कर रहे हैं.
वे ये भी कह रहे हैं कि जनता के हित को यह लोग नज़रअंदाज़ कर रहे हैं और निजी फ़ायदे के लिए यह संकट पैदा कर रहे हैं. ज़ाहिर है उनका इशारा रिपब्लिकन पार्टी की तरफ़ है.
यह मामला अगले साल चुनाव के समय जनता की अदालत में जा सकता है और ओबामा उम्मीद करेंगे कि बिल क्लिंटन की तरह इस संकट का फ़ायदा उनको हो.












