टी-20 वर्ल्ड कप: पाकिस्तान ने मैच नहीं खेलने की घोषणा की है फिर भी टीम इंडिया श्रीलंका क्यों जा रही है?

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राजनीतिक तनाव और अनिश्चतताओं के बीच शनिवार से भारत और श्रीलंका में आईसीसी मेन्स टी-20 वर्ल्ड कप का आग़ाज़ होने जा रहा है.
बांग्लादेश ने पहले ही टूर्नामेंट का बहिष्कार कर दिया है जबकि पाकिस्तान ने कहा है कि वह भारत के साथ मैच नहीं खेलेगा.
इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) की प्लेइंग कंडीशंस के मुताबिक, अगर पाकिस्तान कोई मैच खेलने से इनकार करता है तो उसे मुक़ाबले के अंक गंवाने होंगे. वहीं, भारत को उस मैच के लिए तय अधिकतम अंक मिलेंगे.
इस बीच श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने पाकिस्तान के बोर्ड को एक चिट्ठी लिखी है और भारत के साथ न खेलने के फ़ैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है.
श्रीलंका की ओर से कहा गया है कि उसे इस फ़ैसले के परिणामस्वरूप काफ़ी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा.
मगर पाकिस्तान के भारत के ख़िलाफ़ न खेलने से असर क्या होगा इस पर अब भी अनिश्चितता बरकरार है. चर्चा टी-20 वर्ल्ड कप के कॉन्ट्रैक्ट के से जुड़े उस क्लॉज़ की भी है, जो शायद पाकिस्तान को किसी बड़े जुर्माने से बचा सकता है.

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श्रीलंका की पीसीबी को चिट्ठी
समाचार एजेंसी पीटीआई ने श्रीलंकाई मीडिया हाउस न्यूज़वायर के हवाले से बताया है कि श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने पीसीबी को चिट्ठी लिखी है.
एसएलसी एग्ज़ीक्यूटिव कमिटी की ओर से जारी चिट्ठी में पीसीबी को बताया गया है कि भारत के ख़िलाफ़ मैच न खेलने से नुक़सान होगा. इससे होटल बुकिंग कैंसल होंगी, फ़्लाइट रिज़र्वेशन प्रभावित होंगे और साथ में लॉजिस्टिकल से जुड़ी असुविधाएं भी होंगी.
चिट्ठी में ये भी कहा गया है कि पाकिस्तान के भारत के ख़िलाफ़ न खेलने का असर न सिर्फ़ श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड पर होगा बल्कि टूर्नामेंट में लगे हर स्टेकहोल्डर इससे प्रभावित होंगे.
चिट्ठी में एसएलसी ने पीसीबी को यह भी याद दिलाया है कि उसने किस तरह पाकिस्तान क्रिकेट को अंतरराष्ट्रीय अलगाव से बाहर निकालने में भूमिका निभाई थी.
एसएलसी ने लिखा है कि जब दूसरी क्रिकेट टीमें पाकिस्तान का दौरा करने से हिचक रही थीं, तब उसने कई बार पाकिस्तान का दौरा किया.
दरअसल, ये उस दौर की ओर इशारा है, जब 2009 में लाहौर में श्रीलंकाई टीम की बस पर हुए चरमपंथी हमले के बाद दूसरी टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करना बंद कर दिया था.
भारत और पाकिस्तान के ताज़ा बयान

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प्री-टूर्नामेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में कप्तान सूर्यकुमार यादव ने ये कन्फर्म किया कि भारतीय टीम 15 फ़रवरी के मुक़ाबले के लिए श्रीलंका जाएगी. उन्होंने ये भी कहा कि उनकी टीम को मैच न खेलने से जुड़ा कोई निर्देश नहीं मिला है.
उन्होंने कहा, "माइंडसेट क्लियर है...हमने मना नहीं किया खेलने के लिए. उधर से मना किया है. आईसीसी ने फ़िक्सचर दिया है, गवर्नमेंट ने डिसाइड किया है न्यूट्रल वेन्यू. हमारी फ्लाइट कोलंबो की बुक है. हम तो जा रहे हैं. बाक़ी देख लेंगे."
वहीं, पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सलमान आगा ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "भारत के साथ गेम हमारे कंट्रोल में नहीं है. ये सरकार का फ़ैसला है और हम उसका सम्मान करते हैं. वो जो भी कहेंगे, हम करेंगे."
हालांकि, जब उनसे पूछा गया कि अगर सेमीफ़ाइनल में दोनों टीमों का आमना-सामना हुआ तो क्या किया जाएगा, तो उन्होंने कहा, "अगर हमें उनके (भारत) साथ फिर से सेमीफ़ाइनल या फ़ाइनल में खेलना पड़ा, तो हम फिर से उनके (सरकार) के पास जाएंगे और उनकी सलाह पर ही आगे क़दम रखेंगे."
यानी ग्रुप स्टेज के बाद के मुक़ाबलों पर पाकिस्तान के रुख़ को लेकर भी अनिश्चतता बरकरार है.
क्रिकेट के इतिहास में इससे पहले भी टीमें टूर्नामेंट के मैचों से हट चुकी हैं. साल 1996 वर्ल्ड कप में, जिसकी सह-मेज़बानी भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका ने की थी, ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ दोनों ने श्रीलंका न जाने का फैसला किया था.
इंग्लैंड ने भी 2003 वर्ल्ड कप में हरारे में देश में सुरक्षा चिंताओं और सामाजिक अशांति का हवाला देते हुए ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ अपना मैच खेलने से इनकार किया था.
इनमें से किसी भी देश पर बाद में आईसीसी ने जुर्माना नहीं लगाया था और न ही सज़ा दी थी. हालांकि सभी को अपने-अपने मैच गंवाने पड़े थे.
मगर खेल में सरकारी दखल देने पर आईसीसी पहले भी कई देशों को सज़ा दे चुकी है. इसलिए पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनों को ही कुछ पाबंदियों का सामना करना पड़ सकता है.
आईसीसी का जो संविधान है, उसके अनुच्छेद 2.4 ये स्पष्ट किया गया है कि क्रिकेट बोर्ड को अपने मामलों को स्वायत्त रूप से संभालना चाहिए और ये सुनिश्चित करना चाहिए कि क्रिकेट के गवर्नेंस, रेग्युलेशन या एडमिनिस्ट्रेशन में किसी तरह का सरकारी दखल न हो.
साल 2019 में ज़िम्बॉब्वे की सरकार ने क्रिकेट बोर्ड को भंग कर दिया था जिसकी वजह से उसके क्रिकेट बोर्ड को आईसीसी ने तीन महीने के लिए सस्पेंड किया. इसकी वजह से फंडिंग पर रोक लगी और ज़िम्बॉब्वे को वर्ल्ड कप क्वालिफ़ायर्स से बाहर कर दिया गया.
इसके चार साल बाद ख़राब प्रदर्शन की वजह से श्रीलंका सरकार ने क्रिकेट बोर्ड को बर्खास्त किया. नतीजतन श्रीलंका से अंडर-19 वर्ल्ड कप की मेज़बानी का अधिकार छीन लिया गया.
बाद में, दोनों देशों की आईसीसी सदस्यता बहाल कर दी गई थी.
'फ़ोर्स मैजर' पर चर्चा तेज़

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आईसीसी और पीसीबी की ओर से अभी तक कुछ साफ़ तस्वीर न दिखने के बाद मेंबर्स पार्टिसिपेशन अग्रीमेंट (एमपीए) की ओर सारा ध्यान खिंच गया है. ख़ासतौर पर इसके एक क्लॉज़ 'फ़ोर्स मैज़र' पर चर्चा तेज़ है.
ये कहा जा रहा है कि शायद पाकिस्तान इस प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए जुर्माने से बच जाएगा.
दरअसल, टी-20 विश्व कप में खेल रही सभी टीमों ने एमपीए पर साइन किए हैं. फ़ोर्स मैज़र वह प्रावधान है जो किसी सदस्य को कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों को अपरिहार्य परिस्थितियों में न मानने की छूट देती है. हालांकि, इन परिस्थितियों में युद्ध, आतंकवाद या प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं.
ईएसपीएन क्रिकइन्फ़ो ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि उसके पास एमपीए की कॉपी है, जिसके आधार पर लीगल एक्सपर्ट नंदन कामथ और रज़ा अली ने पाकिस्तान के बायकॉट के परिणामों पर बात की है.
इस बातचीत के मुताबिक, एमपीए के क्लॉज़ 12 में यह बताया गया है कि आईसीसी के किसी इवेंट के दौरान ऐसी परिस्थितियां पैदा होने पर उसके क्या नतीजे होंगे. लेकिन अहम बात ये है कि इसमें सरकारी आदेश को भी 'फोर्स मैज़र' बताया गया है.
जानकारों ने ये संभावना जताई है कि पीसीबी यह तर्क दे सकता है कि वह अपनी सरकार के आदेशों से बंधा है और भारत के ख़िलाफ़ ग्रुप मैच खेलने की स्थिति में नहीं है.
एमपीए में ये भी कहा गया है कि मैच न खेलने वाली टीम को इसकी औपचारिक सूचना आईसीसी को देनी होगी. इस मामले में पीसीबी को अपनी सरकार के लिखित आदेश को आईसीसी को बताना होगा.
इस सूचना में पीसीबी को यह भी बताना होगा कि ऐसा आदेश क्यों, कैसे और किस हद तक उसकी कॉन्ट्रैक्ट संबंधित ज़िम्मेदारियों और प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की उसकी क्षमता को सीमित करता है.
पाकिस्तान पर क्या होगा असर?

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पाकिस्तान सरकार ने 15 फ़रवरी को भारत के ख़िलाफ़ होने वाले अपने मैच में टीम के मैदान पर न उतरने की घोषणा की है.
इसके बाद 2026 टी-20 वर्ल्ड कप को लेकर चर्चा इस बात पर नहीं हो रही कि किन मैचों का इंतज़ार किया जाए, बल्कि चर्चा एक ख़ास मैच को लेकर है, जो पाकिस्तान नहीं खेलेगा.
नियमों के मुताबिक, पाकिस्तान का फ़ैसला सीधे तौर पर अंक तालिका यानी पॉइंट्स टेबल पर असर डालेगा, जहां हर मैच के अंक सेमीफाइनल की राह तय करते हैं.
इसके अलावा, इस बात को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तान के मैच न खेलने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराए जाने का ख़तरा, भविष्य के टीवी राइट्स से जुड़े सौदों पर किस तरह का असर डालेगा.
खासतौर पर इसलिए क्योंकि भारत और पाकिस्तान का मुकाबला ज़्यादा कमाई वाला होता है. पिछले साल चैंपियंस ट्रॉफ़ी में भारत और पाकिस्तान के बीच मुक़ाबले को स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म जियो हॉटस्टार पर 60 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा था.
बीबीसी स्पोर्ट्ल ने टी-20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट की प्लेइंग कंडीशंस देखी हैं. इसके मुताबिक, "अगर कोई टीम हार स्वीकार कर ले या मैच रेफ़री की राय में खेलने से इनकार कर दे, तो ये माना जाएगा कि वह टीम मैच हार गई."
प्लेइंग कंडीशंस में ये भी कहा गया है कि "मैच खेलने से किसी भी तरह का इनकार" किए जाने पर आईसीसी की आचार संहिता के तहत ज़िम्मेदार टीम और उसके कप्तान पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है.
इससे पाकिस्तान पर आगे और सज़ा दिए जाने की आशंका का दरवाज़ा खुला हुआ है. हालांकि यही प्रावधान 2024 टी-20 वर्ल्ड कप में भी मौजूद था, इसलिए ऐसा नहीं है कि यह केवल ताज़ा मामले से जुड़ा हो.
मगर आईसीसी के नियमों के तहत मैच न खेलने वाली टीम के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट है. भारत तय कार्यक्रम के तहत कोलंबो जाएगा, प्रैक्टिस करेगा और मैच से पहले की प्रेस कॉन्फ़्रेंस भी करेगा.
अगर इसके बाद पाकिस्तान खेलने से इनकार करता है, तो मैच को फॉरफिट (हारा हुआ) माना जाएगा. भारत को दो अंक दिए जाएंगे, पाकिस्तान को कोई अंक नहीं मिलेगा और सबसे अहम बात यह है कि पाकिस्तान के नेट रन रेट पर भी इसका नाकारात्मक असर होगा.
हां, अगर भारत भी इस मैच के लिए श्रीलंका न जाए तो फिर इस मैच को रद्द माना जाएगा और दोनों टीमों को एक-एक अंक मिल जाएंगे. हालांकि, मौजूदा हालात में इसकी संभावना कम ही है.
वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में एक भी मैच के दो अंक बेहद अहम होते हैं और इनका नुकसान पाकिस्तान को अन्य टीमों से पीछे धकेल सकता है.
पाकिस्तान को ग्रुप स्टेज में चार मुक़ाबले खेलने हैं. इनमें से एक यानी भारत के साथ होने वाला मुकाबला खेलने से टीम पहले ही मना कर चुकी है.
पाकिस्तान को ग्रुप स्टेज के अपने दूसरे मुकाबलों में नीदरलैंड्स, यूएसए और नामीबिया के साथ खेलना है. इन टीमों से जीतना आसान लग सकता है लेकिन 2024 के टी-20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान को यूएसए की टीम से चौंकाने वाली हार मिल चुकी है.
अगर इस टूर्नामेंट में भी यूएसए क टीम बड़ा उलटफेर करेगी तो पाकिस्तान के लिए चुनौती हो सकती है.
नियमों के मुताबिक, मैच न होने पर इनकार करने वाली टीम को ही नेट रन रेट में भी नुकसान झेलना पड़ेगा. हालांकि, नुकसान कितना होगा ये टूर्नामेंट के प्लेइंग कंडीशंस में दिए गए नियमों पर निर्भर करता है. मगर नेट रन रेट कई बार बराबर अंकों की स्थिति में निर्णायक भूमिका निभाता है.
नेट रन रेट से जुड़ा नियम ये कहता है कि जो भी टीम मैदान पर नहीं उतरेगी, उसके लिए ये माना जाएगा कि उसने मैच के 20 ओवरों में ज़ीरो रन बनाए हैं. जबकि, दूसरी टीम के लिए नेट रन रेट सामान्य तरीके से लागू होगा.
टी-20 वर्ल्ड कप का पूरा शेड्यूल

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सात फ़रवरी से शुरू हो रहा टी-20 वर्ल्ड कप आठ मार्च तक चलेगा. इन 30 दिनों के भीतर कुल 55 मैच होंगे, जिनके लिए आठ अलग-अलग वेन्यू तय किए गए हैं. इनमें से पांच भारत के हैं और तीन श्रीलंका के.
टूर्नामेंट का पहला मैच पाकिस्तान और नीदरलैंड्स के बीच कोलंबो में होगा. वहीं, फ़ाइनल मुकाबले अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में होना है.
टूर्नामेंट में कुल 20 टीमें हिस्सा ले रही हैं. इसमें अफ़ग़ानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इंग्लैड, भारत, आयरलैंड, इटली, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड्स, न्यूज़ीलैंड, ओमान, पाकिस्तान, स्कॉटलैंड, साउथ अफ़्रीका, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका, वेस्ट इंडीज़ और ज़िम्बाब्वे हैं.
बांग्लादेश इस लिस्ट में नहीं है क्योंकि सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बांग्लादेश सरकार ने आईसीसी से अपने सारे मैच भारत से बाहर करवाने की मांग की थी.
आईसीसी ने ये रिक्वेस्ट खारिज कर दी थी और बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए बुलाया था. ये पहली बार है जब बांग्लादेश की टीम-20 वर्ल्ड कप का हिस्सा नहीं होगी.
इसी के विरोध में पाकिस्तान सरकार ने भी कहा कि वह 15 फ़रवरी को होने वाले भारत के ख़िलाफ़ मुक़ाबले के लिए मैदान में नहीं उतरेगी.
हालांकि, इस बीच बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने एक नए टी-20 टूर्नामेंट शुरू कर दिया है. पांच फ़रवरी से हो रहे इस टूर्नामेंट में तीन टीमें हैं, जिसमें लिटन दास, नजमुल हुसैन शांतो और अकबल अली जैसे बांग्लादेश के उन शीर्ष क्रिकेटरों को शामिल किया गया है, जो वर्ल्ड कप में हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं. नौ फ़रवरी को इस टूर्नामेंट का फ़ाइनल होगा.
भारत ने साल 2007 में पहली बार हुए टी-20 वर्ल्ड कप का ख़िताब पाकिस्तान को हराकर अपने नाम किया था. उसके बाद साल 2024 में उसने टी-20 विश्व कप जीता.
वहीं, साल 2009 में पाकिस्तान ने टी-20 वर्ल्ड कप जीता था. इसके बाद इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया ने ये ख़िताब जीता. लेकिन अभी तक लगातार दो बार कोई टीम टी-20 विश्व कप जीतने में कामयाब नहीं रही है.
20 टीमों को चार ग्रुप में बांटा गया है और ग्रुप स्टेज के 40 मुक़ाबले होने हैं. हर ग्रुप की टॉप 2 टीमें सुपर 8 राउंड के लिए आगे जाएंगी. यहां चार-चार टीमों के दो ग्रुप होंगे. दोनों ग्रुप की टॉप टीमें सेमीफ़ाइनल के लिए आगे जाएंगे और फिर आख़िर के दो टॉप टीमों के बीच आठ मार्च को फ़ाइनल खेला जाएगा.
बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.















