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आलिया भट्ट को है एडीडी डिसऑर्डर, ये क्या होता है?
- Author, स्नेहा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
फ़िल्म अभिनेत्री आलिया भट्ट ने हाल ही में एक इंटरव्यू में ज़िक्र किया कि उन्हें एडीडी है. मतलब अटेंशन डेफ़िसिट डिसऑर्डर.
उनके बयान के बाद से इस डिसऑर्डर पर काफ़ी चर्चा हो रही है.
आलिया ने एक अमेरिकी पत्रिका एल्यूर के साथ बातचीत में अपनी शादी के मेकअप का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनके मेकअप आर्टिस्ट ने उन्हें तैयार करने के लिए दो घंटे का समय मांगा था लेकिन उन्होंने मना कर दिया.
उनका कहना था कि वो 45 मिनट से ज़्यादा मेकअप चेयर पर नहीं बैठ सकती हैं.
आइए जानते हैं यहां अटेंशन डेफ़िसिट डिसऑर्डर के बारे में
एडीडी क्या है?
एडीडी यानी अटेंशन डेफ़िसिट डिसऑर्डर. अटेंशन डेफ़िसिट का मतलब ध्यान केंद्रित रखने की क्षमता में कमी का होना. इसमें किसी चीज़ पर ध्यान देना और उसे लगातार बनाए रखने में परेशानी आती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ये पैदाइशी दिक्कत है. ये ऐसा डिसऑर्डर नहीं है जो कभी भी हो जाए और इसको ख़राब व्यवहार से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
एडीडी आमतौर पर बच्चों में होता है लेकिन कुछ लोग वयस्क होने पर भी इसका सामना करते रहते हैं.
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉक्टर पूजाशिवम जेटली कहती हैं, "जब हम किसी चीज़ पर ध्यान देते हैं तो उसे अपने दिमाग़ में रखते हैं, ये चीज़ अटेंशन डेफ़िसिट वालों में नहीं होती है. क्योंकि उनमें होल्ड करने की क्षमता ही नहीं होती है. कुछ चीज़ें उनके पास रहती हैं और कुछ चीज़ें नहीं रहती हैं."
साइकोलॉजिस्ट पूजाशिवम जेटली कहती हैं कि इस डिसऑर्डर वाले लोगों में न्यूरोलॉजिकल कनेक्शन अलग तरह के होते हैं.
एडीडी में 1987 में एच शब्द यानी 'हाइपर एक्टिव' भी जोड़ा गया. अब इसे एडीएचडी यानी अटेंशन डेफ़िसिट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर भी कहते हैं.
वर्ल्ड फ़ेडरेशन ऑफ़ एडीएचडी के मुताबिक़, ये डिसऑर्डर 2.5 प्रतिशत वयस्कों में होता है.
एडीएचडी के तीन रूप होते हैं.
- ध्यान न देना- भूल जाना, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, ख़ुद को व्यवस्थित रखने में समस्या.
- अति सक्रियता या आवेग- इस डिसऑर्डर वाले लोगों को स्थिर रहने में दिक्कत होती है, वो बातचीत के दौरान लोगों को बार-बार टोकते हैं, ख़तरों के प्रति आगाह नहीं रह पाते हैं.
- संयुक्त- यानी किसी में ये दोनों ही लक्षण हो सकते हैं.
डॉक्टर पूजाशिवम जेटली बताती हैं कि इस डिसऑर्डर का सामना कर रहे कुछ लोगों में ये भी देखा गया है कि उन्हें समय का भी ठीक से ध्यान नहीं रह पाता है. ख़ासतौर पर बच्चों में ये ज़्यादा होता है.
वो कहती हैं कि अगर ऐसे बच्चे आधा घंटा खेल रहे हैं तो उन्हें पता ही नहीं चलता कि कितना टाइम हो गया.
वो कहती हैं कि 'ऐसे बच्चों को पैरेंट्स ये कह देते हैं कि ये बच्चा चंचल है. ध्यान नहीं दे पा रहा है, ये लापरवाह है. भारत में अब तक इन चीज़ों पर बहुत ज़्यादा बातचीत नहीं होती है और इस स्थिति में बच्चा वास्तव में भी इस समस्या से गुज़र रहा होता है तो लोग उसकी बात समझ नहीं पाते हैं.'
कैसे होती है पहचान और क्या है इलाज?
क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट पूजाशिवम जेटली कहती हैं कि अगर किसी को लगता है कि वो बचपन से ही इस स्थिति से गुज़र रहे हैं तो उन्हें ट्रेंड साइकोलॉजिस्ट से मदद लेनी चाहिए. इसके लिए टेस्ट भी होते हैं जो रेटिंग स्केल वाले होते हैं.
वो कहती हैं कि इसके लिए दवाइयां भी होती हैं लेकिन इस स्थिति में सबसे बड़ी बात होती है कि ख़ुद के बारे में ये स्वीकार करना.
मनोचिकित्सक कहती हैं कि अक्सर ऐसे लोग कामकाज वाली जगहों पर भी परेशानियों से गुज़र रहे होते हैं. अगर किसी को ये दिक्कत हो तो वो मनोचिकित्सक की मदद से बेहतर प्लानिंग कर सकते हैं. ताकि इसका असर उनके सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन पर कम पड़े.
आलिया भट्ट ने अपनी शादी के मेकअप पर क्या कहा?
आलिया भट्ट ने अमेरिकी पत्रिका अल्योर को इंटरव्यू दिया है. इसमें उन्होंने अपने बचपन से लेकर करियर तक पर बात की है.
इस इंटरव्यू में उन्होंने मेकअप और ब्यूटी पर बातचीत के दौरान कहा कि मेकअप उनके लिए कुछ ऐसा है जिसके बारे में वो मानती हैं वो जल्द से जल्द हो जाए. यानी वो इस पर बहुत ज़्यादा समय नहीं देना चाहती हैं.
इसी क्रम में वो कहती हैं, ''मुझे एडीडी है. मेकअप में बहुत ज़्यादा समय लगाने में मुझे दिलचस्पी नहीं है. जो भी कुछ करने की ज़रूरत हो वो बस जल्द से जल्द हो."
इसके बाद उन्होंने कहा, "मेरी शादी के दिन मेरे मेकअप आर्टिस्ट पुनीत ने कहा कि आलिया इस बार आपको मुझे दो घंटे का समय देना होगा. मैंने उनसे कहा- ऐसा संभव नहीं है. खासतौर पर मेरी शादी के दिन मैं आपको दो घंटे नहीं दे सकती क्योंकि मुझे चिल करना है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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