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भारतीय मूल के अमेरिकी खिलाड़ी की कहानी, जो कभी ‘फेक न्यूज़ का शिकार’ हुआ था
- Author, जसपाल सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
यह 2000 का दशक था, मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के स्कूल टूर्नामेंट का फाइनल चल रहा था. उस मैच को देखने के लिए पूर्व भारतीय क्रिकेटर दिलीप सरदेसाई पहुंचे थे.
बाएं हाथ के स्पिन गेंदबाज़ हरमीत सिंह मुंबई के स्वामी विवेकानंद स्कूल से खेल रहे थे. हरमीत की गेंदबाज़ी से दिलीप सरदेसाई प्रभावित हुए. उन्हें उस युवा गेंदबाज़ में पूर्व भारतीय क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी की झलक दिखी.
इन्हीं हरमीत सिंह ने आगे चल कर महज़ 17 साल की उम्र में मुंबई की टीम में जगह बनाई. इस टीम में शामिल होने के लिए खिलाड़ियों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता था.
हरमीत भारत की अंडर-19 विश्व कप विजेता टीम का भी हिस्सा थे और फिर उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब वह अमेरिकी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा बने और अमेरिका को टी20 विश्व कप 2024 के लिए क्वालीफाई करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
टी20 वर्ल्ड कप 2024 से ठीक पहले जब बांग्लादेश टीम ने अमेरिका का दौरा किया तो क्रिकेट जगत का ध्यान हरमीत की ओर गया.
उस टी20 सीरीज़ के पहले मैच में हरमीत सिंह की शानदार गेंदबाज़ी और फिर उनकी 13 गेंदों पर 33 रनों की पारी ने बांग्लादेश के हाथों से जीत छीन ली.
"हमें हल्के में नहीं लिया जा सकता"
इस मैच में मैन ऑफ द मैच का ख़िताब हरमीत सिंह को मिला. मैच के बाद हरमीत ने कहा, "हमें हल्के में नहीं लिया जा सकता."
दूसरे मैच में हरमीत सिंह कुछ ख़ास नहीं कर सके लेकिन उनकी टीम ने इतिहास रच दिया और दूसरा मैच भी जीतकर सीरीज़ पर क़ब्ज़ा कर लिया.
टी20 वर्ल्ड कप के लिए अमेरिकी टीम की तैयारी को लेकर हरमीत सिंह काफी संतुष्ट नजर आ रहे हैं.
वे कहते हैं, ''हाल ही में हमने कनाडा को 4-0 से हराया है. इसके बाद हमने बांग्लादेश के ख़िलाफ़ भी अच्छा प्रदर्शन किया. हमारी टीम का संतुलन भी बहुत अच्छा है और टीम में पर्याप्त ऑलराउंडर मौजूद हैं जो टीम को मज़बूती प्रदान करते हैं.”
टी20 वर्ल्ड कप में 12 जून को भारत का मुकाबला अमेरिका से भी होना है.
जब हरमीत से अमेरिका में क्रिकेट को लेकर माहौल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''आईसीसी को पता है कि अमेरिका खेलों के लिए एक बड़ा बाज़ार है. अगर अमेरिकी टीम अच्छा प्रदर्शन करती है तो पता चलेगा कि यहां भी क्रिकेट के प्रति जुनून है और आईसीसी को भी निवेश करने का भरोसा मिलेगा.''
वो आगे कहते हैं, ''अमेरिका में उपमहाद्वीप मूल के लोगों में क्रिकेट के प्रति बहुत जुनून है. यहां बेसबॉल से जुड़े लोग क्रिकेट में भी अब रुचि दिखा रहे हैं जो खेल के लिए अच्छा है.’’
भारत के लिए दो अंडर-19 वर्ल्ड कप खेल चुके हैं हरमीत
हरमीत सिंह अमेरिकी टीम में ऑलराउंडर के तौर पर खेल रहे हैं. भारत के लिए दो अंडर-19 विश्व कप खेल चुके हरमीत अब अमेरिकी टीम के प्रमुख खिलाड़ी हैं.
लेकिन एक खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं.
स्पॉट फिक्सिंग के आरोपों से घिरे, फिर वापस आए हरमीत ने क्रिकेट के इस सफर में अपनों को भी गंवाया है.
मुंबई के एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले हरमीत सिंह ने सबसे पहले मुंबई में स्कूल क्रिकेट खेलना शुरू किया. हरमीत का हुनर ऐसा था कि उन्हें मुंबई की अंडर-14, अंडर-16 और अंडर-19 टीम के लिए भी चुना गया.
17 साल की उम्र में हरमीत का चयन मुंबई रणजी टीम के लिए हो गया. प्रथम श्रेणी क्रिकेटर के रूप में हरमीत की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन उन्हें मुंबई के लिए अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला. एक सीज़न में जब वह घर बैठे थे तो उन्हें जम्मू-कश्मीर टीम के लिए खेलने का ऑफर मिला.
उन्होंने जम्मू-कश्मीर टीम के लिए दो मैच खेले लेकिन वो ज़्यादा समय तक टीम के साथ नहीं रहे और वह मुंबई लौट आए. इसके बाद उन्हें त्रिपुरा के लिए खेलने का मौका मिला.
हरमीत त्रिपुरा टीम के लिए खेलना अपने करियर के लिए अच्छा मानते हैं. इस पर टिप्पणी करते हुए वह कहते हैं, ''एक पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर मुझे त्रिपुरा टीम में खेलने से बहुत फायदा हुआ. उनकी वजह से ही मुझे 30 फर्स्ट क्लास मैच मिले.”
अमेरिका जाने की वजह क्या रही?
अमेरिका जाने के फैसले के पीछे की वजह बताते हुए हरमीत सिंह कहते हैं, ''जब मुझे ऑफर मिला तो मैंने सोचा कि अगले पांच साल में मैं ख़ुद को क्रिकेट में कहां देखता हूं. जब आप रणजी ट्रॉफी में प्रो क्रिकेट खेलते हैं तो आपको नहीं पता होता है कि अगले साल आपको टीम में जगह मिलेगी या नहीं. ''
वो कहते हैं,"यह एक अच्छा ऑफर था जिससे क्रिकेट के प्रति मेरा प्यार भी पूरा हो रहा था और पैसे भी अच्छे मिल रहे थे."
हरमीत सिंह का कहना है,“एक रणजी खिलाड़ी को उस मैच के लिए पैसे मिलते हैं जिसमें वह खेल रहा होता है. जब कोई मैच नहीं, तो पैसा भी नहीं. परिवार का भी ख्याल रखना है.”
"मैंने 2009-2010 में प्रथम श्रेणी में पहला मैच खेला और 2018-19 तक केवल 30 मैच खेलने का मौका मिला, इसलिए मैंने अमेरिका जाने का फैसला किया."
जो खिलाड़ी बीसीसीआई से पंजीकृत हैं, वे रिटायरमेंट के बाद ही विदेशी लीग में क्रिकेट खेल सकते हैं.
ये पूछे जाने पर कि क्या युवा भारतीय खिलाड़ियों को विदेशी लीग में खेलने की अनुमति दी जानी चाहिए, हरमीत सिंह ने इस मुद्दे के दो पहलुओं की ओर इशारा किया.
हरमीत सिंह कहते हैं, ''जो खिलाड़ी भारत के लिए खेल रहे हैं उन्हें विदेशी लीग में नहीं खेलना चाहिए क्योंकि बीसीसीआई उन्हें अच्छे पैसे देता है लेकिन जो खिलाड़ी प्रथम श्रेणी तक भी नहीं पहुंच रहे हैं, उनके पास कमाई का कोई साधन नहीं है. इसलिए उन्हें विदेशी लीगों में क्रिकेट खेलने के लिए बीसीसीआई से अनुमति मिलनी चाहिए.”
उन्होंने कहा, ''वो खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की तरह कड़ी मेहनत कर रहे हैं. उन्हें विदेशी लीग में खेलने की इजाज़त मिलनी चाहिए. मेरे साथ खेल चुके कई लड़के अभी भी संघर्ष कर रहे हैं.’’
जब हरमीत का नाम स्पॉट फिक्सिंग से जुड़ा था
साल 2013 में भारतीय क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग का मुद्दा बड़े पैमाने पर गरमा रहा था. इस केस से कई बड़े नाम जुड़े थे. हरमीत सिंह उसी साल आईपीएल की राजस्थान रॉयल्स टीम के लिए भी खेले थे .
इस मामले में हरमीत सिंह का नाम भी जुड़ा था. उन पर आरोप लगाया था कि हरमीत को उनके साथी खिलाड़ी के स्पॉट फिक्सिंग करने के बारे में पता था, जिसका खुलासा उन्होंने बीसीसीआई को नहीं किया था.
जांच के बाद हरमीत सिंह पर लगे ये आरोप झूठे साबित हुए.
दिल्ली पुलिस ने भी उन्हें क्लीन चिट दे दी थी. हरमीत का कहना है कि वैसे तो इस पूरे प्रकरण ने उन पर काफी असर डाला, लेकिन उससे भी ज्यादा मीडिया की गलत रिपोर्टिंग ने उनका करियर बर्बाद कर दिया.
हरमीत सिंह कहते हैं, “एक प्रमुख मीडिया आउटलेट ने झूठी ख़बर छाप दी कि हरमीत सिंह को बीसीसीआई ने जांच चलने तक निलंबित कर दिया है. हालांकि, यह सच नहीं था, बीसीसीआई ने मुझे कभी निलंबित नहीं किया."
“एक प्रमुख समाचार पत्र ने ख़बर छापी, तो सभी मीडिया ने वही समाचार प्रकाशित किया. मैं मीडिया को समझाता रहा लेकिन वे नहीं रुके.”
हरमीत सिंह बताते हैं, "फिर जब मैंने अख़बार के संपादक से बात की, तो उन्होंने अख़बार में एक तरह की माफी छाप दी. लेकिन इस फ़र्ज़ी ख़बर ने तब तक मुझे नुक़सान पहुंचा दिया था.'
"मुझे उस समय विदर्भ का कॉन्ट्रैक्ट मिला था जो इस पूरी घटना के कारण मेरे हाथ से चला गया और मुझे ग़लत नज़र से देखा जाने लगा."
कोविड के दौरान मां के आख़िरी पलों में साथ ना होने का मलाल
साल 2020 में हरमीत अमेरिका चले गए. 2021 में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान हरमीत सिंह की मां का निधन हो गया.
उनकी मौत से हरमीत को गहरा सदमा लगा. उन्होंने अपनी मां को लेकर एक इमोशनल पोस्ट भी किया था.
हरमीत बताते हैं, “जब मेरी माँ का निधन हुआ तब मैं अमेरिका में था. मेरी पत्नी भी गर्भवती थी. भारत में कोविड की दूसरी लहर थी और मैं वापस नहीं आ सका. मुझे अफसोस है कि उस वक्त मैं अपनी मां के साथ नहीं था. मैं पहले कभी नहीं रोया था लेकिन जब मां का निधन हुआ तो मैं बहुत रोया.’’
हरमीत की मां की मौत के एक महीने बाद उनके दादा का भी निधन हो गया.
कुछ समय बाद हरमीत की बेटी का जन्म हुआ. हरमीत के मुताबिक़, उनकी बेटी के आने से उनकी ज़िंदग़ी फिर से पटरी पर आ गई.
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