पाकिस्तान पर इंग्लैंड को भरोसा नहीं, सेलिब्रिटी शेफ़ लेकर आ रही है क्रिकेट टीम

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- Author, अब्दुल रशीद शकूर
- पदनाम, बीबीसी उर्दू, कराची
पाकिस्तान के क्रिकेट हलकों में यह ख़बर बड़ी दिलचस्पी के साथ पढ़ी और सुनी गई कि पाकिस्तान दौरे पर आने वाली इंग्लैंड की क्रिकेट टीम अपने साथ उमर मज़ियान नाम का एक शेफ़ लेकर आ रही है.
लोग इस बात में भी दिलचस्पी ले रहे हैं कि उमर मज़ियान कौन हैं और उनका खेल की दुनिया से क्या कनेक्शन है?
सबसे पहले यह जानना ज़रूरी है कि इंग्लैंड को अपने साथ शेफ़ लाने की ज़रूरत क्यों महसूस हुई.
इस सवाल का जवाब पाकिस्तान में इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पिछले दौरे के मौक़े पर लाहौर में हुई कप्तान मोईन अली की प्रेस कॉन्फ्रेंस से मिलता है.
इसमें उन्होंने कहा था कि खाने के मामले में कराची अच्छा है, लेकिन लाहौर में खाने की गुणवत्ता के मामले में उन्हें निराशा हुई है.
एक वेबसाइट के मुताबिक़ इंग्लैंड के कुछ खिलाड़ियों ने पाकिस्तान दौरे से लौटने के बाद खाने की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी.
इसके बाद पाकिस्तान आने वाली टेस्ट टीम के स्टाफ़ में एक शेफ़ को शामिल किया गया है.
हालाँकि टी-20 सिरीज़ के दौरान किसी भी खिलाड़ी के बीमार होने या पेट ख़राब होने की कोई ख़बर सामने नहीं आई थी.
आमतौर पर विदेशी दौरों पर टीमों के खान-पान की ज़िम्मेदारी मेज़बान क्रिकेट बोर्ड की होती है.
लेकिन इस संबंध में उन टीमों की पसंद का भी ध्यान रखा जाता है कि खिलाड़ी किस तरह का खाना चाहते हैं.
विदेशी टीमें जिन होटलों में ठहरती हैं, वहाँ भी उनकी पसंद और ज़रूरतों का भी ख्याल रखा जाता है.
विदेशी दौरों में मुस्लिम क्रिकेटरों की मौजूदगी में हलाल मीट को भी काफ़ी अहमियत मिलती है.
कौन हैं शेफ़ उमर मज़ियान?

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उमर मज़ियान मोरक्को के रहने वाले हैं. वह पिछले दो दशकों से कुकिंग से जुड़े हुए हैं.
उन्हें यह शौक़ उनके पिता से मिला है, जो एक रेस्टोरेंट के मालिक थे.
उमर मज़ियान का रिश्ता खेल की दुनिया से साल 2009 में जुड़ा था. इस दौरान वे क्रिकेट, रग्बी, फुटबॉल और रोइंग सहित इंग्लैंड की विभिन्न टीमों से जुड़े रहे हैं.
इंग्लैंड की फुटबॉल टीम ने 2018 के वर्ल्ड कप और यूरो 20 फुटबॉल में उनके खाने का लुत्फ़ उठाया है.
दिलचस्प बात यह है कि खेलों की दुनिया से इस जुड़ाव के बावजूद उमर मज़ियान ने ख़ुद कोई खेल नहीं खेला है, हालाँकि वह दो बार लंदन मैराथन में हिस्सा ले चुके हैं.
उमर मज़ियान ने रग्बी के मशहूर खिलाड़ी जेम्स होकज़ेल के साथ मिलकर कुकिंग पर एक किताब भी लिखी है.
क्या पहले भी कभी किसी टीम के साथ शेफ़ आया है?
यह पहली बार नहीं है जब किसी विदेशी क्रिकेट टीम के साथ कोई शेफ़ दौरे पर गया हो.
इसी साल पाकिस्तान का दौरा करने वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथ भी शेफ़ मौजूद था.
लेकिन इसकी ज़्यादा चर्चा नहीं हुई, जबकि ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर्स अपने साथ कॉफी मशीन और कॉफी बीन्स भी लाए थे.
साल 2013 में जब इंग्लैंड की क्रिकेट टीम एशेज सिरीज़ खेलने ऑस्ट्रेलिया गई थी तो उस दौरे पर टीम के खाने-पीने का मामला इन्हीं शेफ़ उमर मज़ियान ने संभाला था.
क्रिकेटरों की बाहर खाने की आदत

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क्रिकेट की दुनिया में यह एक आम बात है कि खिलाड़ी जिस भी देश में जाते हैं, वहां वो अपने पसंदीदा खाने तलाश करते हैं.
और वे केवल अपने होटल या मैदान में उपलब्ध कराए गए भोजन पर ही निर्भर नहीं रहते हैं, बल्कि ऐसे रेस्तरां की तलाश करते हैं, जहाँ उन्हें उनकी पसंद का खाना मिल सके.
साल 2004 में, भारतीय कप्तान सौरव गांगुली सिक्योरिटी की नज़रों से बचकर लाहौर की फूड स्ट्रीट पहुँच गए थे.
दूर जाने की ज़रूरत नहीं है. हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में हुए टी-20 विश्व कप में हिस्सा लेने वाले क्रिकेटरों को विभिन्न रेस्तरां में अपने पसंदीदा खाना खाते हुए देखा गया है.
उदाहरण के लिए पर्थ में बाल्टी रेस्तरां भारतीय क्रिकेटरों की पसंदीदा जगह थी जहाँ उन्हें भारतीय खाने मिल जाते थे.
जब पर्थ में भारतीय टीम का मैच था, तो रेस्तरां के मालिक अश्विनी नोटानी ने पूरे स्टाफ को भारतीय क्रिकेट टीम की नीली जर्सी पहनाई थी, जो दर्शकों के लिए सुखद नज़ारा था.
इसी तरह पाकिस्तानी क्रिकेटर भी ऑस्ट्रेलिया के अलग-अलग शहरों में लज़ीज़ खानों के लिए पाकिस्तानी रेस्टोरेंट्स का रुख़ कर रहे थे.
एडिलेड में 2015 के विश्व कप के दौरान, अफ़ग़ान कबाब और पुलाव पाकिस्तानी क्रिकेटरों के पसंदीदा भोजन थे और वे नियमित रूप से हिंडले स्ट्रीट पर स्थित इस रेस्तरां में जाते थे जहां ये व्यंजन उपलब्ध थे.
मशहूर खिलाड़ियों के व्यक्तिगत शेफ़

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इस बात पर किसी को हैरान होने की ज़रूरत नहीं है कि दुनिया के कई मशहूर खिलाड़ी अपने खाने पीने के मामले को बहुत अहमियत देते हैं, इसलिए वो अपने व्यक्तिगत शेफ़ रखते हैं.
ऐसा करने वालों में बड़ी संख्या फुटबॉलर्स की है.
लियोनेल मेसी, हैरी केन, क्रिस्टियानो रोनाल्डो, ज़्लाटन इब्राहिमोविच और केविन डी ब्रुइन निजी शेफ़ को काम पर रखने में प्रमुख रहे हैं.
वेल्स के गैरेथ बेल का कहना है कि जब वह पहली बार रियाल मैड्रिड के लिए खेलने के लिए स्पेन गए, तो उन्हें वहाँ एडजस्ट होने में उनके निजी शेफ़ से बड़ी मदद मिली.
जब पॉल पोग्बा पहली बार मैनचेस्टर यूनाइटेड गए, तो वे अपने साथ एक इतालवी महिला शेफ़ को लेकर गए थे, जिन्होंने पोग्बा को खाना बनाना भी सिखाया था.
फुटबॉल की दुनिया में सबसे मशहूर शेफ़ जॉनी मार्श हैं. मैनचेस्टर सिटी के ज़्यादातर खिलाड़ी उनके बनाए खाने के प्रशंसक रहे हैं.
गोगो का मद्रास करी रेस्तरां

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साल 2008 में भारतीय टीम के ऑस्ट्रेलिया दौरे में दोनों टीमों के बीच संबंध कुछ अच्छे नहीं थे.
जब दोनों टीमें पर्थ पहुँचीं, तो पता चला कि दोनों टीमें एक ही समय गोगो के रेस्तरां में डिनर के लिए पहुँच गई थीं.
गोगो का असली नाम गोवर्धन गोविंद राज है, जिनका पर्थ में मद्रास करी के नाम से दो कमरों का एक छोटा सा रेस्तरां था, जो अब बंद हो गया है.
गोगो इस बात से परेशान थे कि एक कमरे में ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मौजूद हैं और दूसरे में भारतीय टीम खाने का इंतज़ार कर रही है.
दोनों टीमें एक-दूसरे को देखना पसंद नहीं कर रही थी. इस स्थिति को देखते हुए गोगो ने तुरंत अपने दोस्त जस्टिन लैंगर को बुलाया जो उस वक्त टीम का हिस्सा नहीं थे.
इस मौक़े पर जस्टिन लैंगर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए भारतीय क्रिकेटरों से बातचीत शुरू की और माहौल को ख़ुशनुमा बना दिया.
साल 1999 में पर्थ टेस्ट के मौक़े पर गोगो ने पाकिस्तान क्रिकेट टीम के लिए भी खाना बनाया था.
रमज़ान के चलते खिलाड़ी पूरे दिन रोजा रखे हुए थे और इफ्तार के बाद, उन्हें अच्छे खाने की तलाश थी.
इस मौक़े पर वेस्टर्न ऑस्ट्रेलियन क्रिकेट एसोसिएशन ने गोगो को बुलाया और उनसे खाना तैयार कराया था.
गोगो के पास कई क्रिकेटरों के दिए हुए तोहफ़े मौजूद हैं, जिनमें वसीम अकरम की वह कैप है, जो उन्होंने अपने आख़िरी टेस्ट में पहनी थी, सचिन तेंदुलकर का बेट, वह गेंद जिससे अनिल कुंबले ने अपना 600वां विकेट लिया था और मोहम्मद युसूफ़ के औटोग्राफ वाली शर्ट अहम हैं.
गोगो की कहानी भी अजीब है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीच में ही छोड़ कर होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई की.
भारतीय क्रिकेटरों के लिए खाना बनाना उनके लिए हमेशा एक चुनौती थी, क्योंकि मीट से परहेज़ करने वाले ये क्रिकेटर आते ही आवाज़ लगाते थे 'गोगो दाल चावल'.
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