ग़ज़ा अस्पताल पर हमले से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और अन्य सबूत क्या बताते हैं?

    • Author, पॉल ब्राउन, जोशुआ चीथम, सीन सेडॉन और डानिएल पालुम्बो
    • पदनाम, बीबीसी वेरिफ़ाई

बीबीसी संवाददाता रुश्दी अबु अलूफ़ ने ग़ज़ा के अल-अहली अरब बैप्टिस्ट अस्पताल में धमाके वाली जगह का दौरा किया. उनके मुताबिक़, यहां लोग अभी भी मृतकों के शवों के टुकड़ों को इकट्ठा कर रहे हैं.

ग़ज़ा शहर के भीड़ भरे अल-अहली अस्पताल में हुए जानलेवा धमाके में सैकड़ों लोगों की मौत होने की ख़बर है.

हमास के नियंत्रण वाले ग़ज़ा के फ़लस्तीनी प्रशासन ने हमले के तुरंत बाद इसराइल को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराते हुए इसे सोच-समझकर किया गया हमला क़रार दिया.

हालांकि, इसराइल ने इस हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया है.

एक-दूसरे पर लगाए जा रहे इन आरोपों के बीच इस बात का पता लगाना बहुत मुश्किल हो गया है कि सच क्या है.

बीबीसी वेरिफ़ाई हमले से जुड़े वीडियो, तस्वीरों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों समेत अन्य सबूतों की मदद से इस घटना के सभी पहलुओं को सामने लाने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा इसमें बीबीसी के संवाददाता से भी मदद ली गई जिन्होंने घटनास्थल का दौरा किया, जहां लोगों का पहुंचने बेहद मुश्किल है.

इस घटना को लेकर हर समय कोई न कोई नई जानकारी आ रही है. इसलिए, जैसे ही हमें और बातों का पता चलेगा या हम सबूतों को लेकर किसी विशेषज्ञ से बात करेंगे. साथ-साथ पाठकों तक जानकारी पहुंचाने के लिए हम इस रिपोर्ट को भी अपडेट करते रहेंगे.

इस बात का ध्यान रखना भी ज़रूरी है कि ज़मीन पर जारी युद्ध के इतर सूचनाओं को लेकर इंटरनेट पर भी एक अलग जंग चल रही है. ऐसा पहली बार नहीं है कि इसराइल या ग़ज़ा के प्रशासन ने किसी धमाके को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं. हम उनके दावों और बयानों पर भी नज़र रख रहे हैं.

जब धमाका हुआ

अस्पताल में धमाका मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार शाम सात बजे (जीएमटी के अनुसार शाम 4 बजे) हुआ. सोशल मीडिया पर 20 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसे देखने पर लगता है कि धमाके के वक्त का ये पहले वीडियो सबूत है.

इसमें आप आसमान से आते किसी प्रॉजेक्टाइल (हवा से मार करने वाले हथियार) से आ रही सीटी जैसी आवाज़ सुन सकते हैं. इसके बाद धमाका होता है और भयंकर आग नज़र आती है.

स्थानीय समय के अनुसार छह बजकर 59 मिनट पर अल-जज़ीरा मीडिया नेटवर्क पर प्रसारित लाइव फ़ुटेज में ग़ज़ा के आसमान पर एक चमकीली रोशनी ऊपर की ओर जाती हुई नज़र आती है. रास्ता बदलने से पहले ये रोशनी दो बार तेज़ी से चमकती है और फिर ये चीज़ फट जाती है.

इसके बाद दूर से ज़मीन पर एक धमाका होता दिखता है, इसके तुरंत बाद एक और बड़ा धमाका होता है जो एक कैमरा ऑपरेटर के पास होता है. हम कैमरे वाली जगह का सटीक पता लगाने में कामयाब रहे.

कुछ विश्लेषक मानते हैं कि यह शायद कोई रॉकेट था जो फटता या टूटता हुआ नज़र आ रहा है.

सोशल मीडिया चैनलों पर आए अन्य वीडियो में यही धमाका अलग-अलग एंगल और दूरियों से नज़र आ रहा है.

बीबीसी ने हथियारों के मामले में काम करने वाले 20 थिंक टैंक, यूनिवर्सिटी और कंपनियों से बात की. उनमें से 9 ने अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, पांच से प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है. लेकिन छह जानकारों से बात करने में हम सफल रहे.

हमने विशेषज्ञों से पूछा कि क्या इन सबूतों, जैसे कि धमाके के आकार और उससे पहले सुनाई दी आवाज़ से इसके कारण का पता लगाया जा सकता है?

अभी तक हम इस बारे में किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं. तीन जानकार कहते हैं कि इसराइल आम तौर पर अधिक असलहे का इस्तेमाल करता है और यहां ऐसा कुछ नहीं दिखा.

अमेरिका की वांडरबिल्ट यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफ़ेसर आंद्रे गैनन कहते हैं कि लग रहा है कि धमाका छोटा था, यानी धमाके के बाद जो गर्मी पैदा हुई, वह रॉकेट में बचे हुए ईंधन के जलने के कारण पैदा हुई, न कि किसी हथियार से हुए धमाके के कारण.

ब्रिटेन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टिट्यूट (रूसी) में वरिष्ठ शोधार्थी जस्टिन ब्रॉन्क भी इस बात से सहमत हैं. वह कहते हैं कि इतना जल्दी पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है. लेकिन वह कहते हैं कि ऐसा लगता है कि धमाका किसी नाकाम हो चुके रॉकेट का हिस्सा कार पार्किंग पर गिरने से हुआ जिसके ईंधन में आग लग गई थी.

गैनन कहते हैं कि वीडियो को देखकर यह पता नहीं लगाया जा सकता कि आसमान से गिरे प्रॉजेक्टाइल के निशाने पर यही जगह थी. उनका कहना है कि आसमान में दिख रही चमक से लगता है कि प्रॉजेक्टाइल कोई रॉकेट था, जिसके इंजन ने ज़रूरत से ज़्यादा गर्म हो जाने पर काम करना बंद कर दिया था.

रिस्क मैनेजमेंट कंपनी सिबिलीन में मध्य पूर्व मामलों की विश्लेषक वैलेरी स्कूतो कहती हैं कि इसराइल हवा के ज़रिये, ड्रोन का इस्तेमाल करके हमले कर सकता है और हेलफ़ायर मिसाइल का भी इस्तेमाल कर सकता है.

यह मिसाइल बहुत अधिक गर्मी पैदा करती है लेकिन यह ज़रूरी नहीं कि वह ज़मीन पर बड़ा गड्ढा भी छोड़े. वैलेरी कहती हैं कि अपुष्ट वीडियो फ़ुटेज में अस्पताल के पास आग लगने का जो पैटर्न दिखता है, वह इससे मेल नहीं खाता.

धमाके वाली जगह से मिले सबूत

अल अहली अस्पताल की इमारतों के डिज़ाइन का मेल सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध उपग्रह की तस्वीरों से करने के बाद बीबीसी यह पुष्टि कर पाया है कि धमाका अस्पताल वाली जगह की हुआ है.

उपलब्ध सबूतों से लगता है कि धमाका अस्पताल के परिसर में हुआ. धमाके के बाद घटनास्थल से आई तस्वीरों में आसपास मौजूद अस्पताल की इमारतों में कोई ख़ास नुक़सान हुआ नज़र नहीं आता. हालांकि, तस्वीरों में झुलसने के निशान और जली हुई कारें नज़र आ रही हैं.

इस अस्पताल को एंग्लिकन चर्च चलाता है. यरूशलम के सैंट जॉर्ज कॉलेज के डीन कैनन रिचर्ड सेवेल ने बीबीसी को बताया कि इस अस्पताल के परिसर में क़रीब 1000 विस्थापितों ने शरण ली हुई थी और जिस समय यहां धमाका हुआ, तब 600 मरीज़ और कर्मचारी अस्पताल के अंदर मौजूद थे.

पीड़ितों का हाल

बीबीसी संवाददाता रुश्दी अबु अलूफ़ बुधवार सुबह अल अहली अस्पताल गए. प्रत्यक्षदर्शियों ने उन्हें तबाही के कई मंज़रों के बारे में बताया. कुछ का कहना था कि अभी भी शव इकट्ठा किए जा रहे हैं.

एक शख़्स ने उन्हें बताया कि जब धमाका हुआ तो महिलाएं, बच्चे और बूढ़े भी अस्पताल में थे.

हम पीड़ितों की तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण कर रहे हैं. उन्हें किस तरह की चोटें आई हैं, इससे धमाके के बारे में पता लगाने में मदद मिल सकती है.

बीबीसी ने पीड़ितों की जो तस्वीरें देखी हैं, वो दिल को दहला देने वाली हैं. कई लोगों को गंभीर चोटें आई हैं.

यूके में फ़िज़िशियन्स फ़ॉर ह्यूमन राइट्स संस्था के संस्थापक, पैथोलॉजिस्ट डेरिक पाउंडर ने पीड़ितों की कुछ तस्वीरें देखी हैं.

उनका कहना है कि जिस तरह के घाव के निशान पीड़ितों के शरीर पर देखे गए हैं, धमाके के बाद निकलने वाले बम के टुकड़ों से वैसे निशान पड़ते हैं.

हालांकि, वह कहते हैं कि पीड़ितों की तस्वीरों से स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा जा सकता क्योंकि ऐसी कम ही तस्वीरें हैं जिनकी पुष्टि की जा सकती है.

फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने अनुसार, बुधवार को बताया कि धमाके में 471 लोगों की जान गई है.

वहीं, इसराइली सेना ने कहा कि यह संख्या बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई है. हालांकि, सेना ने अपनी तरफ़ से मृतकों का आंकड़ा जारी नहीं किया है.

स्वतंत्र संस्थाओं के लिए इस इलाक़े में जाना अब तक संभव नहीं हो सका है. ऐसे में मृतकों के सही आंकड़े के बारे में जानकारी की पुष्टि करना मुश्किल है.

हमें अभी क्या पता नहीं है

धमाके के बाद बना गड्ढा किस तरह का है, यह काफ़ी अहम सबूत है.

इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्सेस (आईडीएफ़) का कहना है कि बड़ा गड्ढा न बनना और साथ की इमारतों को धमाके से नुक़सान पहुंचना साबित करता है कि यह धमाका उनके हथियारों से नहीं हुआ.

आप एक छोटा गड्ढा देख सकते हैं. हम यह भी देख रहे हैं कि वहां दिख रहे बाक़ी निशान किसी और गड्ढे के तो नहीं हैं.

एक और सबूत जो अभी नहीं मिल पाया है, वह है- मिसाइल के टुकड़े. अक्सर हवा से मार करने वाले हथियारों की पहचान उनके खोल से की जाती है. इससे पता लगाया जा सकता है कि इसे कहां से दाग़ा गया था. लेकिन अभी हमें इस मामले में कोई सबूत नहीं मिला है.

इसराइली सेना ने एक रिकॉर्डिंग जारी करते हुए दावा किया है कि इसमें हमास के दो लड़ाके स्वीकार कर रहे हैं कि यह प्रॉजेक्टाइल फ़लस्तीनी इस्लामिक जिहाद (पीआईजे) नाम के संगठन ने दाग़ा था.

हमास के बाद पीआईजे ग़ज़ा में फ़लस्तीन का दूसरा सबसे बड़ा चरमपंथी समूह है और उसने इसराइल पर सात अक्टूबर को हुए हमले का समर्थन किया था.

इस रिकॉर्डिंग की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना संभव नहीं है. पीआईजे ने एक बयान जारी करके इस धमाके के लिए इसराइल को ज़िम्मेदार बताया है.

अतिरिक्त रिपोर्टिंग: द विज़ुअल जर्नलिज़्म टीम, टॉम स्पेंसर, शायन सरदारीज़ादेह, एमा पेन्गाली और जेमी रायन

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