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भारत-इंग्लैंड टेस्ट: कप्तान गिल के शतक से भारत मज़बूत, लेकिन एक मोर्चे पर चिंता भी
- Author, संजय किशोर
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
बर्मिंघम में एजबेस्टन टेस्ट का पहला दिन क्रिकेट प्रेमियों के लिए जितना रोमांचक रहा, उतनी ही चर्चा भारत की प्लेइंग इलेवन को लेकर रही.
खेल से ज़्यादा बहस इस बात पर हो रही थी कि टीम इंडिया ने पहला टेस्ट गंवाने के बाद भी जसप्रीत बुमराह जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज़ को क्यों आराम दिया.
इसके साथ ही तीन बड़े बदलावों ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें आकाश दीप, नितीश कुमार रेड्डी और वॉशिंगटन सुंदर को मौक़ा मिला.
अब तक मैच बराबरी पर
इन सबके बीच मैदान पर मुक़ाबला संतुलित नज़र आया. पहले दिन का खेल ख़त्म होने तक भारत ने 5 विकेट खोकर 310 रन बना लिए थे.
कप्तान शुभमन गिल 114 रन पर नाबाद हैं और उनके साथ रवींद्र जडेजा 41 रन बनाकर मज़बूती से टिके हुए हैं.
नई गेंद ली जा चुकी है और भारत के निचले क्रम में अधिकतर ऑलराउंडर हैं, ऐसे में गुरुवार का पहला सत्र बेहद अहम होने वाला है.
इंग्लैंड भी अपने प्रदर्शन से पूरी तरह निराश नहीं होगा. क्रिस वोक्स ने घर पर एक बार फिर शानदार गेंदबाज़ी की. उन्हें क़िस्मत का थोड़ा और साथ मिलता तो आंकड़े और बेहतर दिखते.
ब्राइडन कार्स और शोएब बशीर ने भी लगातार सटीक लाइन-लेंग्थ से गेंदबाज़ी की और भारत को खुलकर रन बनाने नहीं दिए.
शतक की चमक में धुंधले पड़े सवाल
शुभमन गिल की कप्तानी में यह सिर्फ़ दूसरा टेस्ट है और उनका लगातार दूसरा शतक भी.
पहले दिन उन्होंने अपने संयम, कौशल और धैर्य से यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ़ नाम के कप्तान नहीं, बल्कि आगे बढ़कर नेतृत्व करने वाले खिलाड़ी हैं.
रवींद्र जडेजा के साथ उनकी 99 रन की साझेदारी ने चाय के बाद लगे दो झटकों को और गहरा होने से रोक दिया.
जब शुभमन गिल ने टॉस के बाद एलान किया कि जसप्रीत बुमराह इस टेस्ट में नहीं खेलेंगे, तो क्रिकेट जगत में हलचल मच गई.
सिरीज़ में 0-1 से पीछे चल रही टीम से उसके सबसे घातक गेंदबाज़ को बाहर बैठाने के फ़ैसले पर सवाल उठने लगे.
विशेषज्ञों से लेकर पूर्व खिलाड़ियों तक ने इस निर्णय को 'जोखिम भरा' बताया. लेकिन गिल शायद पहले ही तय करके आए थे. जवाब शब्दों से नहीं, बल्ले से दिया जाएगा.
जब शाम को अपने शतक का जश्न मनाते हुए हेलमेट हवा में लहराया तो पूरा एजबेस्टन तालियों से गूंज उठा. यह सिर्फ़ 24 वर्षीय कप्तान का शतक नहीं था, यह उनकी सोच, संयम और साहस का प्रतीक था.
इंग्लैंड में कप्तान के रूप में लगातार दो शतक लगाने वाले वह मोहम्मद अज़हरुद्दीन के बाद दूसरे भारतीय कप्तान बन गए हैं.
बुमराह को आराम देना ग़लत संदेश: रवि शास्त्री
गिल के शतक के बावजूद दिन की सबसे बड़ी चर्चा जसप्रीत बुमराह के बाहर बैठने को लेकर रही.
जब कप्तान शुभमन गिल ने टॉस के बाद बताया कि बुमराह को 'आराम' दिया गया है, तो पूर्व कोच रवि शास्त्री भड़क उठे.
सोनी स्पोर्ट्स पर मैच की कॉमेंट्री के दौरान रवि शास्त्री ने कहा, "यह सिरीज़ का सबसे अहम टेस्ट है. ऐसे मैच में बुमराह को बिठाना एक ग़लत संदेश है. पहले बराबरी करो, फिर आराम की सोचो."
इंग्लैंड के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ स्टुअर्ट ब्रॉड ने भी इस रणनीति पर सवाल उठाए.
कॉमेंट्री के दौरान उनका कहना था, "एक हफ़्ते का ब्रेक तेज़ गेंदबाज़ के लिए काफ़ी होता है. बुमराह का न खेलना मुझे हैरान करता है. यह भी चौंकाने वाला है कि उन्होंने सिरीज़ से पहले ही कह दिया था कि वो सिर्फ़ तीन टेस्ट खेलेंगे. ऐसा नहीं करना चाहिए था. अपनी रणनीति को छिपाकर रखना चाहिए."
भारत ने बुमराह की जगह युवा गेंदबाज़ आकाश दीप को मौक़ा दिया, साथ ही शार्दुल ठाकुर की जगह वॉशिंगटन सुंदर को टीम में शामिल किया गया और नितीश कुमार रेड्डी को साई सुदर्शन की जगह मौक़ा मिला.
गावसकर क्यों बोले- 'हैरान हूं'
भारतीय टीम मैनेजमेंट ने इस बार भी कुलदीप यादव को टीम में नहीं लिया और रवींद्र जडेजा के साथ वॉशिंगटन सुंदर को दूसरा स्पिनर चुना.
पूर्व कप्तान सुनील गावसकर ने इस चयन पर हैरानी जताते हुए सोनी स्पोर्ट्स पर कहा, "मैं थोड़ा हैरान हूं कि कुलदीप को नहीं चुना गया. ऐसी पिच पर जहां टर्न मिलने की उम्मीद है, वहां कुलदीप का शामिल न होना अजीब है."
कप्तान गिल ने स्पष्टीकरण दिया कि टीम को निचले क्रम से और अधिक रन चाहिए थे, इसलिए वॉशिंगटन को तरजीह दी गई. लेकिन एक्सपर्ट्स इस तर्क से सहमत नहीं दिखे.
कुलदीप यादव ने अक्तूबर 2024 में न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ़ अपना आख़िरी टेस्ट खेला था.
कुलदीप ने 2017 में डेब्यू के बाद अब तक सिर्फ़ 13 टेस्ट खेले हैं. वो भी तब, जब हर बार उन्होंने चयनकर्ताओं को अपने प्रदर्शन से जवाब दिया है.
बाएं हाथ के चाइनामैन स्पिनर का टेस्ट रिकॉर्ड शानदार रहा है, लेकिन लगातार नज़रअंदाज़ किया जाना अब चयन नीति पर सवाल खड़े कर रहा है.
एक्स पर #WhereIsBumrah और #JusticeForKuldeep जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे. फ़ैंस चयन को लेकर नाराज़ दिखे.
शतक से चूके जायसवाल
पहले दिन जहां गिल ने टिककर खेला, वहीं यशस्वी जायसवाल ने एक बार फिर आक्रामक शैली में बल्लेबाज़ी की. 87 रन की लाजवाब पारी में उन्होंने 13 चौके जमाए और इंग्लिश गेंदबाज़ों ख़ासतौर पर जोश टंग को निशाना बनाया.
लेकिन जैसे लगने लगा था कि वो लगातार दूसरा शतक जड़ देंगे, इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने एक बाहर जाती गेंद डाल दी और जायसवाल ने उसे विकेटकीपर को थमा दिया. विकेट गिरते ही इंग्लैंड के खेमे में ख़ुशी की लहर दौड़ गई.
जब मैदान पर भिड़े जायसवाल और स्टोक्स
इस दौरान मैदान पर एक वाकया भी देखने को मिला, जब भारत की पारी के 17वें ओवर में यशस्वी जायसवाल और इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स के बीच हल्की नोक-झोंक हो गई.
स्टोक्स ने गेंदबाज़ी के दौरान जायसवाल से कुछ कहा, जिस पर युवा बल्लेबाज़ ने भी पलटकर जवाब दिया. यह लम्हा कैमरे में क़ैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
लेकिन खेल की विडंबना देखिए-जायसवाल 87 रन पर बेन स्टोक्स की गेंद पर आउट हुए.
इसके बाद स्टोक्स, जिनसे थोड़ी देर पहले जायसवाल की कहासुनी हुई थी, मुस्कुराते हुए गेंद उठाते नज़र आए.
केएल की नाकामी और नायर की वापसी
केएल राहुल की पारी 26 गेंदों पर 2 रन में सिमट गई. यह पारी जितनी धीमी थी, उतनी ही असहज भी.
करुण नायर भी दूसरे टेस्ट में मिली ठीक शुरुआत को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके.
उन्होंने 31 रन बनाए और जायसवाल के साथ 80 रन की साझेदारी निभाई, लेकिन लंच से ठीक पहले कार्स की एक उछलती हुई गेंद ने उन्हें चकमा दे दिया. नायर अपना बल्ला गेंद की लाइन से हटा नहीं पाए और ब्रुक ने आसान सा कैच लपक लिया.
पंत का पलटवार
लीड्स में पहले टेस्ट में दो शतक लगाने के बाद ऋषभ पंत अपनी रन बनाने की लय को जारी रखना चाहते थे.
पंत ने चाय से पहले एक शानदार छक्का जड़ा और फिर चौकों से पारी को गति दी. लेकिन फिर वही पुरानी कहानी-एक जोखिम भरा शॉट, और सीमा रेखा पर कैच.
इंग्लैंड के स्पिनर शोएब बशीर की चाल में पंत फंस गए. हवाई शॉट खेलने की कोशिश में उनकी पारी अधूरी रह गई. गेंद लॉन्ग ऑन पर जैक क्रावली के हाथों में जा समाई.
पंत का आउट होना और फिर जल्द ही नितीश रेड्डी का बोल्ड हो जाना इंग्लैंड के लिए बड़ा मौक़ा बन गया. एक समय भारत 182/3 पर मज़बूत दिख रहा था, लेकिन चाय के बाद स्कोर अचानक 197/5 हो गया.
इसके बाद गिल और जडेजा की जोड़ी ने मज़बूती से टीम को संभाल लिया.
पहले दिन का खेल केवल रन बनाम विकेट नहीं था. यह एक दबाव और खेल को दिशा देने की लड़ाई थी.
दूसरे दिन यह कहानी और गहराएगी और तब शायद टीम इंडिया को बुमराह की ग़ैरहाज़िरी की असल क़ीमत पता चले.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित