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प्रिया सरोज कौन हैं, जिनसे हुई है क्रिकेटर रिंकू सिंह की सगाई?
''ये दिन हमारे दिलों में लंबे समय से था - तक़रीबन तीन सालों से - और इसके इंतज़ार में गुज़रा हर सेकंड बेमिसाल था''.
सगाई की चार अलग-अलग तस्वीरें और उनके साथ लिखी गई ये चंद पंक्तियां क्रिकेटर रिंकू सिंह और समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर साझा की हैं.
दोनों जल्द ही शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. इससे पहले 8 जून को लखनऊ के एक होटल में दोनों ने राजनीतिक और क्रिकेट जगत की कई बड़ी हस्तियों की मौजूदगी में सगाई की.
इस दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद अखिलेश यादव, उनकी पत्नी और सांसद डिंपल यादव,एसपी सांसद जया बच्चन जैसे जाने-माने चेहरे नज़र आए.
वहीं कई पूर्व क्रिकेटर्स और बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ने भी सगाई समारोह में शिरकत की.
एक-दूसरे को अंगूठी पहनाने के दौरान क्रिकेटर रिंकू सिंह की भावी जीवनसाथी प्रिया सरोज भावुक नज़र आईं. सोशल मीडिया पर उनकी ये तस्वीरें काफ़ी शेयर की जा रही हैं. वहीं एक उत्सुकता उनके बारे में और जानने की भी बनी हुई है.
कौन हैं प्रिया सरोज?
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में देश के अलग-अलग हिस्से से चुनकर संसद तक का सफ़र करने वाली सबसे युवा महिलाओं में से एक प्रिया सरोज भी थीं. तब उनकी उम्र महज़ 25 साल थी. प्रिया एक राजनीतिक परिवार से आती हैं. उनके पिता तूफ़ानी सरोज समाजवादी पार्टी से तीन बार के सांसद रह चुके हैं.
वर्तमान में वो उत्तर प्रदेश के केराकत से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं. ये सीट मछलीशहर लोकसभा के अंतर्गत ही आती है. मछलीशहर, वही सीट है जिससे साल 2024 में प्रिया सरोज सांसद चुनी गईं. उन्हें कुल 4,51,292 वोट मिले थे.
मछलीशहर लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए रिज़र्व है.
संसद डॉट इन के मुताबिक़ प्रिया सरोज का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी में 23 नवंबर, साल 1998 को हुआ. उन्होंने नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई की है. इससे पहले उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से सोशियोलॉजी से ग्रेजुएशन किया था.
साल 2024 में अपने राजनीतिक डेब्यू से पहले प्रिया सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस करती थीं और भविष्य में जज बनने की इच्छा रखती थीं.
लेकिन साल 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जब पार्टी ने उन्हें चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया तो प्रिया ने तय किया कि अब वो फुल टाइम पॉलिटिक्स ही करेंगी.
तब उन्होंने एक निजी मैगज़ीन से बात करते हुए कहा था, ''अब मैं कार्यकर्ता लोगों का केस लेना शुरू करूंगी''.
कैसे हुई राजनीति में एंट्री?
वैसे तो समाजवादी पार्टी पहले प्रिया के पिता तूफ़ानी सरोज को ही मछलीशहर से अपना उम्मीदवार बनाना चाहती थी लेकिन वो पहले से ही पार्टी के विधायक थे. ऐसे में पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रिया सरोज को एक मज़बूत विकल्प के तौर पर देखा.
प्रिया सरोज चुनावी मैदान में उतरने को तैयार हो गईं.
चुनाव जीतने के बाद एक निजी टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रिया ने कहा था,''दस साल पहले जब मैं अपने पिता के साथ कभी-कभी लोकसभा में आती थी तो लोग कहते थे सांसद जी की बेटी हैं और आज दस साल बाद जब मैं संसद में आई तो लोगों ने मेरे पिता को कहा कि वो सांसद जी के पिता हैं.''
इसी इंटरव्यू में शादी के सवाल पर उन्होंने कहा था कि ये तय करना उनके पिता का काम है.
रिंकू सिंह से मुलाक़ात
इसी साल जनवरी महीने में रिंकू सिंह और प्रिया सरोज की शादी की ख़बरें ज़ोर पकड़ने लगी थीं. बाद में इसकी पुष्टि भी हो गई कि दोनों जल्द शादी के बंधन में बंध सकते हैं.
8 जून को दोनों की सगाई से पहले समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में प्रिया सरोज के पिता तूफ़ानी सरोज ने रिंकू सिंह और उनकी बेटी के रिश्ते के बारे में बात की.
उन्होंने कहा, ''रिंकू और प्रिया एक साल से ज़्यादा वक़्त से एक दूसरे को जानते हैं. वो दोनों एक-दूसरे को पसंद करते थे लेकिन परिवार की सहमति चाहिए थी. दोनों परिवार इस शादी के लिए तैयार हैं. शादी इसी साल 18 नवंबर को होनी है.''
प्रिया ने जहां बचपन से ही पावर और पॉलिटिक्स को क़रीब से देखा, वहीं रिंकू का सफ़र संघर्षों से भरा रहा है. क्रिकेट सुपरस्टार बनने से पहले तक उनका परिवार एक मुश्किल दौर से गुज़र रहा था.
एक टीवी प्रोग्राम के दौरान रिंकू सिंह ने बताया था कि उन्हें एक वक़्त पर कोचिंग सेंटर में पोंछा लगाने की नौकरी मिली थी. लेकिन उन्होंने अपने क्रिकेट पर फ़ोकस किया और बहुत मेहनत की.
रिंकू सिंह का सफ़र
रिंकू के पिता खुद गैस सिलेंडर डिलिवर किया करते थे.आईपीएल के साल 2023 के सीज़न में जब रिंकू ने एक ओवर में पांच छक्के जड़े तो वो रातोंरात लोकप्रिय हो गए. वो कोलकाता नाइट राइडर्स की तरफ़ से खेल रहे थे. तब आईपीएल की इस टीम ने रिंकू के सफ़र से जुड़ा एक वीडियो शेयर किया था.
इसमें रिंकू कहते हैं, ''मेरे पिता चाहते थे कि मैं अपना खाली समय क्रिकेट खेलने में बिताऊं. यह उनकी वजह से ही था कि मैंने क्रिकेट के प्रति अपने जुनून को नहीं छोड़ा. मेरे पास गेंद खरीदने के लिए भी पैसे नहीं थे. लेकिन इस सफर के दौरान कुछ लोगों ने मेरी मदद की.''
रिंकू उत्तरप्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं. कम लोग ये जानते हैं कि मई 2019 में बीसीसीआई ने रिंकू पर तीन महीने का प्रतिबंध लगा दिया था क्योंकि वो बोर्ड की इजाज़त लिये बिना आबूधाबी में एक टी20 टूर्नामेंट खेलने चले गये थे.
उस वक्त रिंकू काफ़ी निराश और दुखी हुए थे लेकिन अपनी इस ग़लती को उन्होंने कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और खुद को तराशते रहे.साल,2023 के अगस्त महीने में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना डेब्यू किया था.
हालांकि प्रिया सरोज ने एक निजी टीवी चैनल को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि भले ही उन्होंने संघर्षों भरी ज़िंदगी नहीं जी लेकिन उनके पिता ने काफ़ी चुनौतियों को पार कर राजनीति में अपनी जगह बनाई है.
वो कहती हैं, ''अनुसूचित जाति से आने और तमाम भेदभाव झेलने के बावजूद उन्होंने अपने लिए जगह बनाई. मेरे दादाजी किसान थे. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. साल 1999 में जब पिताजी ने पहली बार संसदीय चुनाव लड़ा तब उन्होंने लोगों से चंदा इकट्ठा कर के चुनाव का ख़र्च वहन किया था. उन्होंने मोटर साइकिल से ही अपना पूरा चुनाव प्रचार किया था.''
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित