रिंकू सिंह: टीम इंडिया के नए फ़िनिशर जो आख़िरी गेंद तक उम्मीद नहीं छोड़ते

    • Author, विमल कुमार
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

बात अब से कुछ ही महीने पहले टीम इंडिया के आयरलैंड दौरे की है. रिंकू सिंह पहली बार बिज़ेनस क्लास की फ़्लाइट लेकर भारत से आयरलैंड की जमीं पर उतरे थे.

संयोग से ये लेखक एयरपोर्ट पर टीम इंडिया के लिए पहुंचे थे और यहीं रिंकू से मेरी पहली औपचारिक मुलाकात हुई.

इस युवा खिलाड़ी में छोटे शहरों वाला चिर-परिचित शर्मीला रवैया तो दिखा लेकिन उनके आत्म-विश्वास ने ये भी जताया कि वो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कुछ करना चाहते हैं.

वे सिर्फ आईपीएल में अपने 5 छक्कों वाले ओवर के लिए हमेशा याद नहीं किये जाना चाहते हैं.

कुछ ही दिनों के बाद रिंकू डबलिन में अपना पहला अंत्तराष्ट्रीय टी20 मुकाबला खेल रहे थे.

उस शहर में संजू सैमसन के हज़ारों दीवाने हैं और उस मैच को देखने आए ज़्यादातर दर्शकों ने संजू के लिए ही टिकट खरीदे थे.

लेकिन, जब रिंकू बल्लेबाज़ी करने के लिए उतरे तो पूरे मैदान में “रिंकू-रिंकू" का नारा गूंज रहा था.

एक युवा खिलाड़ी जो कि अपना पहला मैच खेल रहा था उसके लिए विदेशी ज़मीं पर भारतीय फैंस का ऐसा उत्साह आंखों पर यकीन नहीं करने के बराबर था.

रिंकू की दीवाने

मैच ख़त्म होने के बाद जब रिंकू पवेलियन की तरफ लौट रहे थे तो उस वक़्त कप्तान जसप्रीत बुमराह ने उन्हें बुलाया और कहा कि वो जाकर युवा फैंस के साथ सेल्फी खिंचाये और उन्हें ऑटोग्राफ़ भी दें.

रिंकू के चेहरे पर अचानक चौंकाने वाले भाव के साथ साथ एक मासूम सी मुस्कान भी थी. और शायद इसी मुस्कान से उन्होंने अपने छोटे से करियर में सुरेश रैना से लेकर सूर्यकुमार यादव तक को अपना कायल बना रखा है.

रिंकू ने कई मौकों पर खुद कहा है कि वो रैना के बहुत बड़े फैन हैं जो उनके ही राज्य उत्तर प्रदेश से आते हैं और कई मौकों पर टीम इंडिया के पूर्व दिग्गज ने इस युवा बल्लेबाज़ की हर तरीके से मदद की है.

रैना खुद मध्य-क्रम में टीम इंडिया के लिए दबाव वाले लम्हों में शानदार पारियां खेल चुके हैं और ख़ासकर महेंद्र सिंह धोनी के साथ उनकी साझेदारियां मशहूर रही हैं.

रिंकू भी इत्तेफाक से धोनी जैसी ही एकाग्रता और शांत स्वभाव की झलक दबाव वाले लम्हों में देते हैं.

ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टी20 सीरीज़ से पहले घरेलू क्रिकेट में भी रिंकू ने शानदार खेल दिखाया था.

हाल ही में अपने राज्य यूपी के लिए सैय्यद मुश्ताक अली टी20 मुकाबलों में रिंकू ने 7 पारियों में 170.66 की स्ट्राइक रेट से 256 रन बनाये थे.

अब तक अपने 7 टी20 वाले करियर में रिंकू का औसत 128 रनों और स्ट्राइक रेट 216 का रहा है.

ये करियर के शुरुआत में असाधारण आंकड़ें हैं.

यही वजह है कि मौजूदा टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने धोनी का नाम लिए बिना ही रिंकू में पूर्व भारतीय कप्तान की झलक दिखने की तरफ़ इशारा किया.

रिंकू के क़िस्से

लेकिन, आज जो लोग रिंकू की तारीफ़ करते हुए थक नहीं रहे हैं उनमें से बहुत कम लोगों को पता होगा कि इस खिलाड़ी ने पिछले कुछ सालों में किस तरह का दबाव झेला है.

रिंकू के परिवार और उनकी आर्थिक कठिनाई वाले किस्सों का ज़िक्र तो हम कर ही नहीं रहे हैं जिसके बारे में शायद हर कोई सैकड़ों मर्तबा सुन चुका हो.

लेकिन कितने लोगों को ये बात पता है कि मई 2019 में बीसीसीआई ने रिंकू पर तीन महीने का प्रतिंबंध लगा दिया था क्योंकि वो बोर्ड की इजाज़त लिये बिना आबूधाबी में एक टी20 टूर्नामेंट खेलने चले गये थे.

उस वक्त रिंकू काफ़ी निराश और दुखी हुए थे लेकिन ये ग़लती उनसे जानबूझकर नहीं बल्कि अनजाने में हुई थी.

छोटे शहरों से आने वाले खिलाड़ियों को कई मौकों पर बीसीसीआई के हर नियम और कायदे की जानकारी नहीं होती है. लेकिन, रिंकू ने इस घटना का असर अपने क्रिकेट पर पड़ने नहीं दिया.

जिस खिलाड़ी ने यूपी अंडर 19 के दौर से ही अपने परिवार के कर्ज ( 5 लाख का लोन) को उतारने की ज़िम्मेदारी ले ली थी वो इस खेल को लेकर कभी भी ढीला-ढाला रवैया अपना ही नहीं सकता था.

सिर्फ़ टी 20 के खिलाड़ी नहीं

रिंकू को सिर्फ टी20 फॉर्मेट का एक धुंरधर खिलाड़ी समझने की भूल भी आप नहीं करें.

करियर के शुरुआत में ही (2018-19 रणजी ट्रॉफी सत्र में), रिंकू एलीट डिविज़न में दूसरे सबसे कामयाब बल्लेबाज़ रहे थे जब उन्होंने महज 13 पारियों में 953 रन 105.88 की औसत से बनाए थे.

इसमें 4 शतक और 3 अर्धशतक शामिल रहे.

साल 2021-22 की विजय हजारे ट्रॉफी में रिंकू अपने राज्य यूपी को खुद के बूते नॉक ऑउट तक ले गये थे जहां उन्होंने 6 पारियों में 379 रन बनाये थे.

इसमें 4 अर्धशतक भी थे. इस दौरान उनका औसत 100 (94.75) के क़रीब रहा था.

इस साल अगस्त के महीने में ही रिंकू को कैरेबियाई दौरे पर चुनने की बात ज़बरदस्त चर्चा में थी.

लेकिन, हार्दिक पंड्या की कप्तानी वाली टीम का वो आखिर में हिस्सा नहीं हो पाये थे.

इंडिया खेलने की ज़िद

रिंकू को उस वक्त (6 जुलाई 2023) यानी चयन के अगले दिन देखा तो ये महसूस हुआ कि ये खिलाड़ी अंदर से मायूस ज़रूर हुआ है लेकिन टीम इंडिया के लिए हर हाल में खेलने की उसकी खामोश जिद ने और मज़बूती पा ली थी.

टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज़ दिनेश कार्तिक ने हाल ही में सोशल मीडिया में अपने एक पोस्ट में खुलासा किया है कि किस तरह से मुंबई के पूर्व बल्लेबाज़ और कोलकाता नाइट राइडर्स के सहायक बल्लेबाज़ी कोच अभिषेक नायर ने उनकी ज़बरदस्त देखभाल की है.

कार्तिक ने बताया कि कैसे रिंकू को नायर ने मुंबई में आईपीएल के बाद अपने फ़्लैट में ही रखा और उन्हें क्रिकेट के लिए उनका जज़्बा बरकरार रखने में मदद की.

ये वही नायर है जिन्होंने अतीत में कार्तिक और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ियों के लिए भी दोस्त और सहयोगी की भूमिका निभाई है.

कार्तिक के मुताबिक साल 2018 से ही नायर ने रिंकू की प्रतिभा को पहचान लिया था और हमेशा उन्हें कुछ बड़ा सोचने और कर दिखाने की बात को लेकर उनका मनोबल बढ़ाते रहते थे.

कार्तिक का कहना था कि रिंकू ने उस मैच में आखिरी गेंद पर छक्का लगाकर जीत दिलाई जिस मैच में उनके कोच नायर कमेंटेटर की भूमिका में.

सोशल मीडिया में वैसे नायर और रिंकू का भरत-मिलन वायरल हो चुका है.

बहरहाल, ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ बचे हुए तीन मैचों में अगर रिंकू का बल्ला यूं ही चलता रहा तो जल्द ही वो टी20 वर्ल्ड कप के लिए फिनिशर के तौर पर अपनी दावेदारी को और मज़बूत ही करेंगे.

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