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रजत पाटीदार : कोहली की चमक के बीच अलग से चमकने वाला कप्तान
- Author, अनुपम प्रतिहारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
रजत पाटीदार की स्क्रिप्ट कौन लिखता है? बतौर कप्तान अपने पहले टूर्नामेंट में सबसे महत्वपूर्ण टीमों में से एक, आरसीबी को 18 सालों में अपना पहला आईपीएल ख़िताब दिलाना एक ऐसी कहानी है जिसे केवल नियति ही लिख सकती थी.
2008 में आईपीएल की शुरुआत से ही, आरसीबी में ट्रॉफ़ी के लिए एक जुनून था, जो ग्लैमर, पॉप और चमक-धमक से लिपटा था.
विराट कोहली, एबी डिविलियर्स, क्रिस गेल, अनिल कुंबले, ग्लेन मैक्सवेल, डेल स्टेन, फ़ैफ़ डु प्लेसिस और जोश हेज़लवुड जैसे इसके कुछ सबसे बड़े खिलाड़ियों ने सुनिश्चित किया कि टीम के प्रशंसकों की संख्या लगातार बढ़े.
हालांकि, इन सबके बावजूद इस सीज़न से पहले आरसीबी के लिए ख़िताब जीतना एक चुनौती थी, जब तक आरसीबी को रजत पाटीदार का नेतृत्व नहीं मिला. 32 वर्षीय पाटीदार मध्य प्रदेश से आने वाले एक मध्य क्रम के बल्लेबाज़ और घरेलू क्रिकेट के पावरहाउस हैं.
सही कप्तान
शर्मीले और कम बोलने वाले पाटीदार आरसीबी के लिए एक सही पसंद साबित हुए, जिनकी आरसीबी को अपनी चमकदार छवि को बेअसर करने और ट्रॉफ़ी जीतने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए ज़रूरत थी.
यह ट्रॉफ़ी 17 मुश्किल सालों से आरसीबी के लिए सपना बनी हुई थी.
2024-25 सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफ़ी में मध्य प्रदेश के कप्तान रहे पाटीदार ने अपनी टीम को फ़ाइनल में पहुंचाया था.
इस टूर्नामेंट में दिल्ली के ख़िलाफ़ सेमीफ़ाइनल में पाटीदार उस समय मैदान में उतरे थे, जब टीम 147 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए 46 रन पर 3 विकेट खोकर संघर्ष कर रही थी.
पाटीदार ने अपनी टीम को धमाकेदार अंदाज़ में जीत दिलाई. उन्होंने सिर्फ 29 गेंदों पर नाबाद 66 रन बनाए, जिसमें छह छक्के और चार चौके शामिल थे.
इसके बाद आगे आकर नेतृत्व करने की उनकी क्षमता किसी की नज़र से नहीं बची. टूर्नामेंट के दौरान कप्तान के रूप में उनको आरसीबी के मुख्य कोच एंडी फ्लावर और इसके निदेशक मो बोबट ने देखा था.
दोनों इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने आईपीएल का सबसे मुश्किल काम, आरसीबी की कप्तानी पाटीदार को सौंपने से पहले विराट कोहली से इस पर चर्चा की.
ये वही पाटीदार थे जो कुछ साल पहले तक मध्य प्रदेश टीम की कप्तानी करने से भी कतरा रहे थे. बतौर कप्तान पाटीदार घरेलू क्रिकेट में तैयार हो गए थे और वह 2025 आईपीएल के लिए तैयार थे.
कोच एंडी फ्लावर की मौजूदगी भी मददगार रही, जिनके साथ उन्होंने मुश्किल वक़्त में धैर्य रखने में महारत हासिल की.
कोच ने कप्तान को आज़ादी दी और इसने पाटीदार को अपने क्रिकेट संबंधी फ़ैसलों के प्रति अधिक आश्वस्त किया.
अलग कैरेक्टर
नए कप्तान ने विनम्रता, आत्मविश्वास, रणनीतिक समझ और टीम के हर सदस्य को साथ लेकर चलने की क्षमता दिखाई. उनके इस कैरेक्टर ने टीम को स्पष्ट रूप से बदल दिया.
पाटीदार ने अपने संसाधनों को बेहतरीन ढंग से इस्तेमाल किया, ख़ासकर अहम मैचों में अपने गेंदबाज़ों सही का इस्तेमाल.
पहले बल्लेबाज़ी करते हुए 190 रनों पर ढेर होने के बाद, अधिकतर जानकारों का मानना था कि यह स्कोर आईपीएल फाइनल में उचित स्कोर से 20 रन कम था.
एक कमज़ोर कप्तान बड़े मैच के दबाव में झुक जाता लेकिन पाटीदार नहीं.
पंजाब किंग्स के चतुर कप्तान श्रेयस अय्यर ने बैक ऑफ़ लेंथ गेंदों और धीमी बाउंसरों का जाल बिछाया था, जिसे उनके गेंदबाजों ने प्रभावशाली ढंग से अंज़ाम दिया.
यहां तक कि आरसीबी के करिश्माई बल्लेबाज और शायद आईपीएल के सबसे महान खिलाड़ी विराट कोहली 35 गेंदों पर 43 रनों की अपनी असामान्य रूप से शांत पारी में केवल तीन चौके लगा पाए.
आरसीबी की हर साझेदारी को ख़तरनाक रूप लेने से पहले ही ख़त्म कर दिया गया. साफ़ तौर पर, फ़ाइनल का पहला हाफ़ पंजाब किंग्स के नाम था.
फिर भी, पाटीदार और उनके साथियों ने हार मानने से इनकार कर दिया.
समझदारी भरी कप्तानी
जवाब में, पावरप्ले के बाद पंजाब किंग्स एक विकेट पर 52 रन बनाकर आराम से आगे बढ़ रही थी. तब पाटीदार ने अपने टैलेंट का भरपूर इस्तेमाल किया.
फ़ील्डिंग खुलने के बाद कप्तान अपने 'विकेट लेने वाले गेंदबाज़' क्रुणाल पंड्या को लाए.
बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर तुरंत एक्शन में आ गए. अपनी बैक ऑफ़ लेंथ फ्लाइटेड डिलीवरी के साथ, उन्होंने प्रभसिमरन सिंह और जॉश इंग्लिस दोनों को बांधे रखा और केवल तीन रन दिए.
अपने अगले ओवर में, पंड्या ने अपनी गति और लेंथ में बदलाव के साथ प्रभसिमरन को आउट किया, जो बड़ा शॉट खेलने के लालच में थे.
पंजाब का स्कोर दो विकेट पर 72 रन था. कप्तान पाटीदार ने एक और शानदार चाल चली.
जैसे ही विपक्षी कप्तान अय्यर बल्लेबाज़ी करने आए, पाटीदार रोमारियो शेफ़र्ड को ले आए. शेफ़र्ड को देखकर अय्यर को लालच आया लेकिन उन्होंने दूसरी गेंद को कीपर जितेश शर्मा के दस्तानों में पहुंचा दिया (अय्यर एक रन पर आउट हुए).
यह मैच का निर्णायक पल था क्योंकि विपक्ष के सबसे बड़े बल्लेबाज़ पर घात लगाकर हमला किया गया था. दो ओवर बाद, चतुर आरसीबी कप्तान ने क्रुणाल को वापस बुलाया जिन्होंने इंग्लिस को आउट किया.
इंग्लिस 23 गेंदों पर 39 रन के अपने स्कोर में पहले ही चार छक्के लगा चुके थे और मैच को तेज़ी से आगे बढ़ा रहे थे.
अब, पंजाब किंग्स 12.1 ओवर के बाद 4 विकेट पर 98 रन बनाकर लड़खड़ा रही थी. ऐतिहासिक जीत के बाद पाटीदार ने कहा, "क्रुणाल एक विकेट लेने वाले गेंदबाज़ हैं.''
सबसे अनुभवी गेंदबाज़ भुवनेश्वर कुमार को वापस लाया गया. 17वें ओवर में उन्होंने ज़ोरदार गेंदबाज़ी की और उन्होंने नेहाल वढेरा (15) के साथ मार्कस स्टोइनिस (6) को आउट करके दोहरी सफलता हासिल की.
यह निर्णायक झटका था क्योंकि पंजाब किंग्स छह रन से हार गई और चमचमाती ट्रॉफ़ी आरसीबी को मिली.
टी20 विश्व कप विजेता टीम के कोच रहे फ्लावर ने भी उनकी तारीफ़ की.
उन्होंने कहा, "आप उनकी उस सहजता को कम नहीं आंक सकते, जो उन्होंने एक बड़ी फ्रेंचाइज़ी के लिए कुछ बड़े खिलाड़ियों की अगुआई करते हुए दिखाई. रजत ने दबाव के बीच अच्छे फै़सले लिए. मेरे मन में उनके लिए काफ़ी सम्मान है. जिस तरह से उन्होंने खुद को पेश किया, उस पर मुझे वास्तव में गर्व है."
मुक़ाबले में जीत सबसे दृढ़ निश्चयी खिलाड़ी की होती है. रजत पाटीदार ने दृढ़ता तो दिखाई ही, साथ ही उन्होंने इस ऐतिहासिक जीत को टीम के सबसे करिश्माई खिलाड़ी कोहली को समर्पित करते हुए गरिमा भी दिखाई.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित