बांग्लादेश में एक हिंदू कारोबारी की गोली मारकर हत्या, पुलिस और पिता ने क्या बताया?

राणा प्रताप बैरागी

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इमेज कैप्शन, राणा प्रताप बैरागी की सोमवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी (फ़ाइल फोटो)
    • Author, जन्नतुल तनवी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ बांग्ला, ढाका

बांग्लादेश में एक और हिंदू की कथित तौर पर सरेआम गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया है.

बताया जा रहा है कि जेस्सोर के मोनिरामपुर में राणा प्रताप बैरागी एक स्थानीय अख़बार के कार्यवाहक संपादक भी थे.

हालांकि, पुलिस के मुताबिक राणा प्रताप बैरागी के ख़िलाफ़ हत्या, बलात्कार और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अलग-अलग पुलिस थानों में तीन मामले दर्ज हैं.

घटना सोमवार शाम को मोनिरामपुर उपज़िले के एक बाज़ार में हुई. बैरागी की हत्या को लेकर सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा हो रही है.

हालांकि, उनकी हत्या की वजह अभी भी एक रहस्य बनी हुई है. घटना के बारे में पूछे जाने पर पुलिस ने कहा कि हत्या के इस मामले की जांच अभी जारी है.

मोनिरामपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी मोहम्मद राज़िउल्लाह ख़ान ने बीबीसी बांग्ला को बताया, "इस मामले में जांच प्रक्रिया चल रही है. हम मामले पर कार्रवाई कर रहे हैं. लड़के के पिता ने मामला दर्ज कराया है."

घटना वाले दिन क्या हुआ?

राणा प्रताप बैरागी का घर

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इमेज कैप्शन, राणा प्रताप बैरागी पेशे से कारोबारी थे. मोनीरामपुर उपज़िला के कपालिया बाज़ार में उनकी एक आइस-मेकिंग फ़ैक्ट्री थी

स्थानीय लोगों ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि राणा प्रताप बैरागी की हत्या उनकी आइस फ़ैक्ट्री के बगल में हुई थी.

पुलिस, परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने बताया कि घटना वाले दिन शाम छह बजे कुछ लोगों ने बैरागी को बर्फ़ की फ़ैक्ट्री से बुलाया और उन्हें पास के ही कपालिया क्लिनिक और डायग्नोस्टिक सेंटर ले गए.

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उसी जगह बहस के दौरान बैरागी को सिर में गोली मारी गई और हमलावर फ़रार हो गए.

वहीं, गोली लगने से बैरागी की मौके पर ही मौत हो गई.

मृतक के पिता तुषार कांति बैरागी ने दावा किया कि उनके बेटे का किसी से कोई कारोबार से जुड़ा विवाद नहीं था. उन्होंने कहा कि वह इस बात को समझ नहीं पा रहे और न ही उन्हें कोई अंदाज़ा है कि हत्या क्यों की गई.

उन्होंने कहा, "मुझे इसमें कोई कारोबार से जुड़ा विवाद नज़र नहीं आता. मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा कि हुआ क्या. हमें समझ नहीं आया कि यह सब अचानक क्यों हुआ, उन्होंने ऐसा क्या किया."

तुषार कांति ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि उनका बेटा घटना वाले दिन दोपहर तीन बजे कपालिया बाज़ार स्थित अपनी फैक्ट्री पर गया था.

उन्होंने कहा, "यह घटना आइस फैक्ट्री के बगल में हुई. उन्होंने उसे बुलाया और अपने साथ ले गए."

जब तुषार कांति से पूछा गया कि उनके बेटे को कौन ले गया था, वे लोग कौन थे और क्या इन्हीं लोगों पर हत्या का संदेह है? तो उन्होंने कहा, "शायद ऐसा हो. अब...हम उन्हें पहचान नहीं पाए. मेरा मतलब है कि हम घटनास्थल पर नहीं थे. ख़बर मिलने के बाद मैं यहां आया."

पुलिस ने क्या बताया?

इस बीच, जब मोनिरामपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी रज़ीउल्लाह ख़ान से पूछा गया कि हत्या में कौन शामिल था या हत्या की वजह क्या थी, तो उन्होंने कहा कि मामले की जांच चल रही है.

पुलिस फिलहाल इस मामले के बारे में ज़्यादा बात करने से परहेज़ कर रही है.

हालांकि, मोनिरामपुर पुलिस स्टेशन प्रभारी ख़ान ने ये बताया कि राणा प्रताप बैरागी को सिर में तीन गोलियां मारी गई थीं और उनका गला भी काटा गया था.

पुलिस अधिकारी ने बताया कि शव का पोस्टमॉर्टम जेस्सोर अस्पताल में होगा.

कौन थे राणा प्रताप बैरागी?

राणा प्रताप बैरागी

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इमेज कैप्शन, राणा प्रताप बैरागी (फ़ाइल फोटो)

राणा प्रताप बैरागी तुषार कांति बैरागी के बेटे हैं. तुषार केशबपुर उपज़िला के अरुआ गांव में एक स्कूल शिक्षक रह चुके हैं.

राणा दो भाई-बहनों में बड़े थे. वह पेशे से बिज़नेसमैन थे. मोनिरामपुर उपज़िला के कपालिया बाज़ार में उनकी एक बर्फ़ बनाने की फ़ैक्ट्री थी.

यह फ़ैक्ट्री उनके गांव अरुआ से पांच से छह किलोमीटर दूर है.

मृतक के पिता तुषार कांति ने बीबीसी बांग्ला को बताया, "वह लंबे समय से कारोबार में था. कपालिया बाज़ार में उसकी एक बर्फ़ की फ़ैक्ट्री है और कटखली बाज़ार में एक मछली की दुकान भी है."

तुषार कांति ने यह भी दावा किया कि उनका बेटा किसी भी तरह की राजनीति में शामिल नहीं था.

राणा प्रताप के ख़िलाफ़ अलग-अलग आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी पुरानी ख़बरें कई बार अख़बारों में छप चुकी हैं. स्थानीय लोगों राणा प्रताप लिटन दत्ता नाम के एक अन्य व्यक्ति के साथ मिलकर एक बीडी ख़बर नाम की अख़बार भी चलाते थे.

गूगल पर जब बीबीसी बांग्ला ने बीडी ख़बर को खोजने की कोशिश की तो कोई वेबसाइट नहीं मिली. हालांकि, फेसबुक पर एक पेज मिला. अख़बार की तस्वीर में राणा प्रताप बैरागी का नाम कार्यवाहक संपादक के तौर पर लिखा था. संपादक का नाम लिटन दत्ता लिखा था.

इसके अलावा बांग्लादेश नेशनल इन्फ़ॉर्मेशन पोर्टल पर लिटन दत्ता का नाम नरैल ज़िले के समाचार पत्र डेली बीडी ख़बर के संपादक के तौर पर मिला.

वहीं, स्थानीय पत्रकारों ने बताया कि कुछ साल पहले राणा प्रताप बैरागी और लिटन दत्ता ने नरैल से अख़बार का प्रकाशन शुरू किया था. शुरुआत में ये अख़बार नियमित रूप से प्रकाशित होता था लेकिन बाद में अनियमित हो गया.

मृतक के ख़िलाफ़ थे तीन मुक़दमे

बांग्लादेश में बीते कुछ दिनों में कई हिंदुओं की हत्या के मामले सामने आए हैं

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश में कुछ दिन पहले ही दीपू चंद्र दास नाम के एक शख़्स की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी

मोनीरामपुर पुलिस थाने के प्रभारी मोहम्मद रज़ीउल्लाह ख़ान ने कहा कि राणा प्रताप के ख़िलाफ़ केशबपुर और अभयनगर पुलिस थानों में मामले दर्ज हैं.

जेस्सोर के केशबपुर पुलिस थाने के प्रभारी सुखदेव रॉय ने बताया कि उनके थाने में राणा प्रताप के ख़िलाफ़ एक ही मामला दर्ज है. उन्होंने कहा, "ये विस्फोटक पदार्थ अधिनियम से जुड़ा केस है, संभवतः साल 2016 का मामला है. मैं अभी और जानकारी नहीं दे सकता. ये पुरानी घटना है और अब इस पर बात करने की कोई गुंजाइश नहीं है. आप अदालत से पूरी जानकारी पा सकते हैं."

वहीं, अभयनगर पुलिस थाने के प्रभारी एसएम नुरुज्जमान ने बताया कि उनके थाने में मृतक के ख़िलाफ़ हत्या और बलात्कार के दो मामले दर्ज हैं.

उन्होंने कहा कि हत्या का मामला साल 2014 का है और बलात्कार का 2020 का. हालांकि, वह राणा प्रताप पर लगे आरोपों के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके.

थाना प्रभारी नुरुज्जमान ने बीबीसी बांग्ला को बताया, "जांच के बाद आरोप पक्ष बहुत पहले अदालत में भेज दिया गया था. यह मामला अदालत में लंबित है लेकिन मैं इसके मौजूदा स्टेटस के बारे में कुछ नहीं कह सकता."

बीबीसी के लिए कलेक्टिवन्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.