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चीन की 12 साल की इस बच्ची ने ऐसा क्या कर दिया कि इतिहास बन गया
- Author, शॉन कर्न्स
- पदनाम, बीबीसी स्पोर्ट्स
चीनी छात्रा यू ज़िडी वर्ल्ड एक्वेटिक्स चैंपियनशिप में मेडल जीतने वाली इतिहास की सबसे कम उम्र की तैराक बन गई हैं.
चीन की टीम ने रिले प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज़ (कांस्य) मेडल जीता.
12 साल की यू ज़िडी ने इस हफ्ते महिलाओं की 4x200 मीटर फ्रीस्टाइल रिले के शुरुआती दौर (हीट्स) में हिस्सा लिया था. हालांकि, वो गुरुवार को हुए फ़ाइनल में नहीं उतरी थीं, लेकिन शुरुआती दौर में तैरने की वजह से उन्हें मेडल के लिए योग्य माना गया.
सिंगापुर में हुए फ़ाइनल मुकाबले में चीन की टीम तीसरे नंबर पर रही. पहले नंबर पर ऑस्ट्रेलिया और दूसरे नंबर पर अमेरिका की टीम रही.
इसी के साथ यू ज़िडी पिछले 90 सालों में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में मेडल जीतने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी बन गई हैं. इससे पहले 1936 के ओलंपिक में डेनमार्क की इंग सोरेनसन ने अपने 12वें जन्मदिन के एक महीने से भी कम समय बाद 200 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक में कांस्य पदक जीता था.
यू ज़िडी ने कहा, "यह काफी भावुक पल है, और बहुत अच्छा लग रहा है."
अक्तूबर में 13 साल की होने वाली छात्रा यू ज़िडी गुरुवार को हुए महिलाओं के 200 मीटर बटरफ़्लाई फ़ाइनल में पदक जीतने के बेहद क़रीब थीं, लेकिन मामूली अंतर से चौथे नंबर पर रहीं.
सोमवार को हुए व्यक्तिगत मेडले के फ़ाइनल में भी यू ज़िडी मेडल से सिर्फ़ 0.06 सेकेंड से चूक गईं और चौथे स्थान पर रहीं.
इससे पहले मई महीने में, यू ने 200 मीटर व्यक्तिगत मेडले में 12 साल के खिलाड़ियों का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. उन्होंने ये दूरी सिर्फ़ 2 मिनट 10.63 सेकेंड में पूरी की थी. उनके इस प्रदर्शन के बाद "वर्ल्ड एक्वेटिक्स" संस्था ने सोशल मीडिया पर उन्हें "सनसनी" बताया था.
जश्न या चिंता?
वर्ल्ड चैंपियनशिप में यू की भागीदारी को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है.
इस चैंपियनशिप में आमतौर पर खिलाड़ियों की उम्र कम से कम 14 साल होनी चाहिए, लेकिन यू को इसलिए अनुमति दी गई क्योंकि उनका टाइम एसोसिएशन के 'ए' स्टैंडर्ड के अंदर था.
यू की प्रतिभा पर किसी को शक नहीं है, लेकिन सभी लोग इस बात से सहमत नहीं हैं कि इतनी छोटी उम्र में उन्हें दुनिया के बड़े टूर्नामेंट में खेलना चाहिए.
इस मुद्दे पर बीबीसी रेडियो 5 लाइव पर चर्चा हुई, जहां चार बार की वर्ल्ड चैंपियन तैराक कैरेन पिकरिंग और ओलंपिक कांस्य पदक विजेता स्टीव पैरी की राय अलग-अलग रही.
पिकरिंग ने कहा, "इतनी छोटी उम्र की खिलाड़ी को इतने बड़े मुकाबलों में उतरते देखना एक तरफ तो हैरान कर देने वाला है, लेकिन साथ ही ये सवाल भी उठता है कि वह कितने समय से इतनी कड़ी ट्रेनिंग कर रही है?"
उन्होंने कहा, "वो किस तरह की ट्रेनिंग कर रही है? इतनी ट्रेनिंग का उनके शरीर पर क्या असर हो रहा है?''
पिकरिंग ने आगे कहा, ''मुझे चिंता होती है कि इतनी छोटी उम्र में इतनी कड़ी ट्रेनिंग का बच्चों के शरीर पर क्या असर पड़ेगा. हमने पहले भी देखा है कि जिम्नास्टिक्स में बच्चों को बहुत छोटी उम्र से दबाव में डाला जाता है और उसका उनके शरीर पर लंबे समय तक असर रहता है."
वहीं पैरी का मानना है कि यू का खेलना एक "सकारात्मक" बात है और यह ब्रिटेन की खिलाड़ी शैरन डेविस की याद दिलाता है, जिन्होंने 1976 के ओलंपिक में सिर्फ 13 साल की उम्र में हिस्सा लिया था.
पैरी ने कहा, "ये सही है कि हम सवाल कर रहे हैं, क्योंकि वो सिर्फ 12 साल की है. लेकिन मुझे याद है कि सिडनी में 15 साल के माइकल फेल्प्स ने मुझे हरा दिया था और बाद में वही दुनिया के सबसे बड़े तैराक बने.''
वो आगे कहते हैं, ''छोटी उम्र के खिलाड़ी हो सकते हैं, जैसे शैरन डेविस, यू या केटी लेडेकी. लेकिन हमें उनकी मानसिक स्थिति का ध्यान रखना होगा और यह भी देखना होगा कि उन पर शारीरिक दबाव ज़्यादा न डाला जाए.
''ऐसे छोटे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का सम्मान किया जाना चाहिए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.