पीएम नरेंद्र मोदी का जॉर्डन दौरा क्यों अहम है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों के चार दिवसीय दौरे पर सोमवार शाम अम्मान पहुंचे

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    • Author, राजेश डोबरियाल
    • पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की आधिकारिक यात्रा पर सोमवार शाम को जॉर्डन पहुंच गए. चार दिन के इस दौरे में दो दिन जॉर्डन में रहने के बाद प्रधानमंत्री इथियोपिया और ओमान भी जाएंगे.

जॉर्डन के इस दौरे का ख़ास महत्व इसलिए है क्योंकि जॉर्डन से भारत के राजनयिक संबंधों को 75 साल हो गए हैं. दरअसल जॉर्डन दुनिया के उन देशों में से है जिनसे स्वतंत्र देश के रूप में भारत ने शुरुआती दौर में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे.

भारत और जॉर्डन के बीच सहयोग और मैत्रीपूर्ण संबंधों के लिए पहला द्विपक्षीय समझौता 1947 में हुआ था और 1950 में दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित हो गए थे.

दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध भी दशकों से मजबूत रहे हैं दोनों देश शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति का जायजा लेने के लिए नियमित रूप से एक-दूसरे के संपर्क में रहते हैं.

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एक तिहाई आबादी से ज़्यादा शरणार्थी

जॉर्डन के किंग

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इमेज कैप्शन, जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह (फ़ाइल फोटो)

अरब के पांच देशों के बीच घिरा जॉर्डन भू-राजनैतिक रूप से एक महत्वपूर्ण देश है. इसकी ज़मीनी सीमा सऊदी अरब, सीरिया, इराक और फ़लस्तीनी क्षेत्र से जुड़ी है, जबकि अकाबा की खाड़ी में मिस्र के साथ यह समुद्री सीमा साझा करता है.

हाशमी साम्राज्य के शासन वाला जॉर्डन एक छोटा देश है जिसके पास प्राकृतिक संसाधन कम हैं, लेकिन इसने मध्य पूर्व में सत्ता संघर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. यह संयुक्त राज्य अमेरिका का एक प्रमुख सहयोगी है.

प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 1916 में ऑटोमन साम्राज्य के विरुद्ध अरब विद्रोह के बाद, इस क्षेत्र को ब्रिटेन और फ्रांस ने विभाजित किया था. इसके परिणामस्वरूप 1921 में ट्रांसजॉर्डन अमीरात की स्थापना हुई और यह ब्रिटिश संरक्षण वाला देश बन गया. जॉर्डन 1946 में स्वतंत्र हुआ.

जॉर्डन ने 1948 के अरब-इसराइल युद्ध में वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा कर लिया और इसे अपने कब्ज़े में रखा.1967 में छह दिवसीय जंग के दौरान इसराइली सेना ने इसे फिर अपने कब्ज़े में ले लिया. जॉर्डन ने 1988 में इस क्षेत्र पर अपना दावा छोड़ दिया और 1994 में इसराइल के साथ शांति संधि पर हस्ताक्षर करने वाला दूसरा अरब देश बन गया.

जॉर्डन में पेट्रा का चट्टानी शहर, पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है

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जॉर्डन में लगभग बीस लाख फ़लस्तीनी शरणार्थी रहते हैं. सीरिया में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद से, वहां से भी जॉर्डन में लगभग 14 लाख सीरियाई शरणार्थी पहुंचे. इन सबका इसके संसाधनों और बुनियादी ढांचे पर काफ़ी दबाव पड़ा है.

जॉर्डन के शासक, किंग अब्दुल्ला द्वितीय, 1999 से इस पद पर हैं. उनके पास व्यापक शक्तियां हैं. वह सरकारें नियुक्त करते हैं, क़ानून को मंज़ूरी देते हैं और संसद को भंग कर सकते हैं.

2011 में अरब जगत में हुए जन विद्रोहों के मद्देनजर राजनीतिक सुधारों की मांगों पर राजा ने तत्कालीन सरकार को बर्खास्त कर दिया था. राजनीतिक परिवर्तनों को लागू करने की देखरेख के लिए एक प्रधानमंत्री को नियुक्त किया, जो श्रृंखला की पहली कड़ी साबित हए. हालांकि जीवन यापन की लागत और वित्तीय मुद्दों को लेकर नियमित रूप से विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं.

जॉर्डन सरकार की वेबसाइट के अनुसार "जॉर्डन का क्षेत्रफल 89,213 वर्ग किलोमीटर है और 2015 की जनगणना के अनुसार, जॉर्डन की जनसंख्या 95 लाख 31 हज़ार 712 है. जॉर्डन की ज़मीन शुष्क और अर्ध-शुष्क है, जिसमें लंबी ग्रीष्म ऋतु, छोटी शीत ऋतु और कम वर्षा होती है. अक़ाबा बंदरगाह जॉर्डन का एकमात्र समुद्री मार्ग है."

भारत के साथ व्यापारिक संबंध

अम्मान की एक दुकान

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जॉर्डन की राजधानी अम्मान में भारतीय दूतावास के अनुसार पिछले कुछ सालों में वैश्विक आर्थिक मंदी के बावजूद दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ा है और भारत, जॉर्डन का चौथा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है.

लेकिन विश्लेषकों के अनुसार भारत और जॉर्डन के आर्थिक संबंध व्यापारिक आंकड़ों से अधिक लोगों और आवश्यक संसाधनों पर आधारित हैं.

अजय श्रीवास्तव दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) के प्रमुख हैं. वह भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशालय में एडिशनल डायरेक्टर जनरल फ़ॉरेन ट्रेड (एडीजीएफ़टी) के पद पर रहे हैं.

वह कहते हैं कि भारत-जॉर्डन रिश्ते की रीढ़ लगभग 25 से 30 हज़ार भारतीय कामगार हैं जो मुख्य रूप से निर्माण, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं. ये हर साल अनुमानित 25 से 35 करोड़ डॉलर की राशि घर भेजते हैं.

श्रीवास्तव कहते हैं जॉर्डन जैसी छोटी, व्यापार-निर्भर अर्थव्यवस्था (जिसका जीडीपी 50 बिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक है) से ये संबंध दिखाते हैं कि कामगारों की आवाजाही और सप्लाई चेन पर निर्भरता अब भारत के जुड़ाव को सिर्फ पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उसे और दूर तक फैला रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अम्मान पहुंचने पर जॉर्डन के प्रधानमंत्री ज़फ़र हसन ने उनका स्वागत किया

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अजय श्रीवास्तव बताते हैं, "भारत से जॉर्डन निर्यात होने वाले सामानों में चावल, मांस, चाय और कॉफी जैसे खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं. वहीं भारत मुख्य रूप से फॉस्फोरिक एसिड और कैल्शियम फॉस्फेट का आयात करता है. ये भारत के उर्वरक और रसायन उद्योग के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं."

इसके अलावा वित्त वर्ष 2023-24 में भारत-जॉर्डन द्विपक्षीय व्यापार 2.875 अरब अमेरिकी डॉलर का था, जिसमें भारत का जॉर्डन को निर्यात 1.465 अरब अमेरिकी डॉलर था और आयात 1.411 अरब अमेरिकी डॉलर था.

उससे पिछले साल 2022–23 में यह आंकड़ा और भी बड़ा 4.434 अरब अमेरिकी डॉलर का. इसमें भारत का निर्यात 2.144 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 2.290 अरब अमेरिकी डॉलर था.

भारत और जॉर्डन के बीच उर्वरक क्षेत्र में विशेष सहयोग है. जॉर्डन फॉस्फेट माइनिंग कंपनी (जेपीएमसी) और भारतीय कंपनियों जैसे इफ़्को के बीच बड़े पैमाने पर संयुक्त परियोजनाएं चल रही हैं.

इसके अलावा, दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक संयुक्त समिति की व्यवस्था 1976 से चल रही है, जो नियमित रूप से व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा करती है.

राजनयिक सांस्कृतिक संबंध

अम्मान में भारतीय लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया

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जॉर्डन में लगभग 17,500 भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें से अधिकतर कपड़ा, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों में काम करते हैं. कुछ लोग स्वास्थ्य, नर्सिंग, विश्वविद्यालयों, आईटी और वित्तीय कंपनियों, संयुक्त राष्ट्र संगठनों से जुड़े हुए हैं.

जॉर्डन ने नवंबर 2009 से भारतीय पर्यटकों के लिए आगमन पर पर्यटक वीजा (टीवीओए) योजना का विस्तार किया था. भारत सरकार ने नवंबर 2014 से जॉर्डन के नागरिकों के लिए ई-टीवी (ई-टूरिस्ट वीज़ा) योजना का विस्तार किया. जॉर्डन ने भी 2023 से भारतीय पर्यटकों को ई-वीज़ा देना शुरू कर दिया.

जॉर्डन में भारतीय कला और संस्कृति के प्रति भी काफ़ी दिलचस्पी है, विशेष रूप से बॉलीवुड फिल्में और भारतीय अभिनेता जॉर्डन के घरों में ख़ासे लोकप्रिय हैं. कुछ बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग जॉर्डन में हुई है, जिनमें 2024 में रिलीज़ हुई "बड़े मियां छोटे मियां" शामिल है. इसके अलावा, कोविड महामारी के बीच मार्च-अप्रैल 2020 में एक मलयालम फिल्म "आदुजीवितम" की शूटिंग भी जॉर्डन में हुई थी.

दोनों देशों में सांस्कृतिक मंडलियों की नियमित आवाजाही होती रही है. जुलाई 2025 में आयोजित जॉर्डन के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव, 39वें जेरश संस्कृति एवं कला महोत्सव में अमाइज़ा नृत्य मंडली ने भाग लिया.

विकसित भारत पहल के अंतर्गत 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत 27 सितंबर 2025 को इरबिद में अल बल्का एप्लाइड यूनिवर्सिटी के सहयोग से मिशन द्वारा वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया. जॉर्डन में 'आज़ादी का अमृत महोत्सव' के उपलक्ष्य में, दूतावास ने कई गतिविधियों का आयोजन किया.

मिशन संस्था हर साल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाती है. वर्ष 2025 का अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस शाही वनस्पति उद्यान में राजकुमारी बसमा बिन्त अली के संरक्षण और सहभागिता में आयोजित किया गया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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