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पीरियड्स के दौरान इन बातों का रखें ख़्याल
- Author, नित्या पांड्यन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
आज भी कई घरों में पीरियड्स को लेकर कम बातचीत होती है. वहीं, अगर मेंस्ट्रुअल हाइजीन (माहवारी के दौरान स्वच्छता) की बात करें तो इस बारे में और कम बात होती है.
आप अपने आप से सवाल करिए कि आपके परिवार में पीरियड्स के बारे में कितनी बार खुलकर बात हुई है?
पहले के मुकाबले पीरियड्स को लेकर लोगों के बीच जागरूकता ज़रूर आई है, लेकिन आज भी इस पर बात करना कहीं न कहीं 'टैबू' माना जाता है.
हां, अब हमें ज़रूर सोशल मीडिया पर ऐसे पोस्ट और वीडियो दिखते हैं, जिनमें महिलाएं अपने अनुभव के बारे में बता रही होती हैं. इस दौरान महिलाएं मेंस्ट्रुअल हाइजीन की ज़रूरत के बारें में भी बात करती है.
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लेकिन यह चर्चा आपके घरों तक या स्कूल तक कम ही पहुंच पाती है. इस चुप्पी का असर अक्सर लड़कियों के स्वास्थ्य पर तो पड़ता ही है बल्कि कहीं न कहीं वो ये मान बैठती हैं कि इस बारे में बात करना सही नहीं है.
हर साल 28 मई को 'मेंस्ट्रुअल हाइजीन डे' मनाया जाता है. तो आइए समझते हैं कि अच्छे मेंस्ट्रुअल हाइजीन का क्या मतलब है? ऐसी कौन सी ग़लतियां हैं, जो महिलाएं सामान्य तौर पर करती हैं?
इसे ही समझने के लिए बीबीसी ने गायनेकोलॉजिस्ट और मद्रास मेडिकल कॉलेज की पूर्व प्रोफ़ेसर डॉ. प्रेमलता से बात की है.
कौन सा सैनिटरी पैड इस्तेमाल करना चाहिए?
डॉ. प्रेमलता का कहना है कि कॉटन फाइबर से बने सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करना चाहिए.
कॉटन से बने पैड, सिंथेटिक मैटेरियल की तुलना में कहीं अधिक खून सोखते हैं और अधिक आरामदायक होते हैं.
नायलॉन या अन्य आर्टिफ़िशियल कपड़े से बने पैड भले ही थोड़े सस्ते मिल जाएं, लेकिन स्वास्थ्य और आराम के लिहाज से कॉटन फाइबर से बने सैनेटरी पैड लेना फायदेमंद है.
रीयूज़ेबल कॉटन से बने पैड जैसे कि पीरियड्स पैंटीज़ और हाइब्रिड क्लोथ पैड्स के उपयोग से तब तक बचना चाहिए जब तक उन्हें हर इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह से धोकर और पूरी तरह सूखने नहीं दिया जाए.
हालांकि, ये पर्यावरण के लिए अच्छे होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं, लेकिन अगर इनका इस्तेमाल ठीक तरह से नहीं किया जाए तो इंफ़ेक्शन का ख़तरा बढ़ सकता है.
मेंस्ट्रुअल कप का इस्तेमाल करते हुए किन बातों का रखना चाहिए ख़्याल
मेंस्ट्रुअल कप भी सैनिटरी पैड की तरह ही सुरक्षित हो सकते हैं. उनमें लीक होने का ख़तरा नहीं होता. मेंस्ट्रुअल कप खून को इकट्ठा करते हैं न कि सोखते हैं.
ये वैजाइना में फिट हो जाते हैं और इनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है.
अपने हिसाब से सही आकार का कप चुनें. इसके आकार का महिलाओं में होने वाले रक्तस्राव की मात्रा से कोई संबंध नहीं होता.
हालांकि, इस बात का ध्यान रखें कि इस्तेमाल करने से पहले कप साफ़ और सूखा हो.
उसके अंदर जमा हुए खून को टॉयलेट में खाली करें और अच्छी तरह धो लें. एक बार पीरियड्स में इस्तेमाल होने के बाद कप को चार मिनट तक गर्म पानी में उबाल लें और इसे किसी हल्के, बिना खुशबू वाले साबुन से धो लें.
अगर आपके पास एक से ज़्यादा कप हों तो ज़्यादा बेहतर है. एक दिन में आप इसे बदलकर इस्तेमाल कर सकती हैं.
डॉक्टर प्रेमलता कहती हैं, "मासिक धर्म एक बिल्कुल जैविक प्रक्रिया है. इस दौरान कई महिलाओं को पेट में दर्द की शिकायत होती है जो कि आम बात है. इस दौरान डॉक्टर से बात कर दर्द निवारक दवाएं लेना भी ठीक है."
एक दिन में कितनी बार पैड बदलना चाहिए?
आमतौर पर एक दिन में चार बार सैनिटरी पैड बदलना अच्छा माना जाता है.
जब मेंस्ट्रुअल कप का उपयोग किया जा रहा हो तो ये सलाह दी जाती है कि हर 6 से 8 घंटे में कप को खाली किया जाए.
हालांकि, कुछ महिलाओं या लड़कियों को ज़्यादा ब्लीडिंग होती है, ऐसे में ये सलाह दी जाती है कि वो पूरे पैड के भीगने का इंतज़ार करने के बजाय हर तीन घंटे में इसे बदलें.
दोबारा इस्तेमाल में आने वाले पीरियड्स प्रोडक्ट्स कैसे साफ़ करें
डॉक्टर प्रेमलता कहती हैं कि वो आमतौर पर पीरियड पैंटीज़ और रीयूज़ेबल कॉटन पैड जैसे प्रोडक्ट्स की सलाह नहीं देती हैं.
वो कहती हैं, "लेकिन अब ये चीज़ें बाज़ार में उपलब्ध हैं, जिन्हें किफ़ायती और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिहाज़ से तैयार किया गया है. इसलिए अगर आप इनका इस्तेमाल करती हैं तो उचित साफ-सफाई का ध्यान रखें."
सुरक्षित इस्तेमाल के कुछ तरीके
इस्तेमाल के तुरंत बाद उस प्रोडक्ट को गर्म पानी में डालें.
हल्के साबुन से अच्छी तरह धोएं- तेज़ डिटर्जेंट या एंटीसेप्टिक का उपयोग न करें.
सबसे ज़रूरी बात- इसे पूरी तरह सूखने के लिए धूप में रखें. धूप एक प्राकृतिक कीटाणुनाशक की तरह काम करता है.
इन चीजों की आदत डालनी चाहिए
लड़कियों और महिलाओं को ऐसा कॉटन (सूती) अंडरवियर पहनना चाहिए जो हवा आने-जाने दे, ताकि नमी कम हो और संक्रमण से बचा जा सके.
मासिक धर्म के दौरान वैजाइना के आसपास की त्वचा बेहद संवेदनशील होती है, और शेविंग करने से छोटे कट्स हो सकते हैं, जिससे बैक्टीरिया और वायरल संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है.
डॉक्टरों का सुझाव है कि पूरी तरह शेव करने की बजाय बालों को छोटा करके ट्रिम करना बेहतर होता है. प्यूबिक हेयर, संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करते हैं.
अगर अधिक ब्लीडिंग हो या तेज़ दुर्गंध आ रही हो, तो महिलाओं को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. ये किसी स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों का भी संकेत हो सकता है.
वेजाइना की सफाई हमेशा आगे से पीछे की ओर करनी चाहिए. इससे मलाशय से योनि में बैक्टीरिया जाने का ख़तरा नहीं होता है. इससे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (यूटीआई) से भी बचाव होता है.
अगर आपको जलन, बदबू या किसी भी तरह की समस्या लगे तो बिना देर किए डॉक्टर से मिलें.
2022 की वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में करीब 50 करोड़ महिलाओं की पहुंच सुरक्षित और साफ़ सैनिटरी प्रोडक्टस तक नहीं है.
लेकिन समस्या सिर्फ़ इतनी ही नहीं है.
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पीरियड्स महिलाओं में एक सामान्य जैविक प्रक्रिया है, फिर भी महिलाओं को इसके लिए कई तरह की समस्याओं और भेदभाव का सामना करना पड़ता है. अब भी कई जगह महिलाएं इस बारे में खुलकर बात तक नहीं कर पाती हैं.
सही जानकारी की कमी, हेल्दी प्रोडक्ट्स तक पहुंच की कमी से महिलाएं कई ऐसे विकल्प चुनती हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर साबित हो सकते हैं.
विश्व बैंक की ये रिपोर्ट कहती है, "पीरियड्स को लेकर कई पीढ़ियों से चले आ रहे ग़लत चलन ने सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को और भी बढ़ा दिया है, जिससे महिलाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र मानव विकास तक पहुंच सीमित हो जाती है."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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