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कोलकाता रेप-मर्डर केस: क्या है ‘नबान्न अभियान’ और बीजेपी ने क्यों बुलाया 12 घंटे का बंद
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज की एक ट्रेनी डॉक्टर के रेप और हत्या मामले के ख़िलाफ़ मंगलवार को छात्रों ने राज्य सचिवालय यानी ‘नबान्न भवन’ तक विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया था. इस विरोध मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस कर्मियों के बीच झड़प देखने को मिली है.
एक नए छात्र संगठन ‘पश्चिम बंग छात्र समाज’ ने इस विरोध मार्च को ‘नबान्न अभियान’ नाम दिया है, जिसको लेकर राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने पद से इस्तीफ़ा दें.
इस मार्च को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सचिवालय यानी ‘नबान्न भवन’ और आस-पास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की थी. साथ ही हावड़ा ब्रिज बंद कर दिया गया था.
विरोध प्रदर्शन में बल प्रयोग करने और छात्रों को गिरफ़्तार करने के ख़िलाफ़ बीजेपी ने अब 12 घंटे के बंद का आह्वान किया है. उधर सत्तारुढ़ टीएमसी ने कहा है कि बीजेपी राज्य में 'अराजकता पैदा करना चाहती है.'
बीजेपी ने क्या कहा
छात्रों के मार्च के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करने पर बीजेपी नेताओं ने भी कोलकाता पुलिस मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. इसमें राज्य के बीजेपी प्रमुख और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार भी शामिल हुए.
बीजेपी कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय के सामने लगे बैरिकेड्स को भी गिरा दिया. बीजेपी की मांग है कि प्रदर्शन के दौरान जिन छात्रों को गिरफ़्तार किया गया है उन्हें रिहा किया जाए.
बीजेपी नेता सुकांत मजूमदार ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि पुलिस और ममता बनर्जी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन में हिंसा फैलाई है, उन्होंने शांतिपूर्ण तरीक़े से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले दागे और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया.
सुकांत मजूमदार ने बताया कि ‘पश्चिम बंगाल में बुधवार को 12 घंटे का बंद बुलाया गया है, हमारी मांग बहुत साधारण है कि जिन छात्रों को गिरफ़्तार किया गया है उन्हें रिहा किया जाए.’
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''हालात काफी नाज़ुक हैं. कोलकाता में तीन जगहों पर एक लाख छात्र और आम लोग जमा हैं. उनकी एक ही मांग है कि ममता बनर्जी अपने पद से इस्तीफा दे दें. हालांकि उन्हें रोकने के लिए 15 से 20 हज़ार पुलिस वाले तैनात कर दिए हैं."
"कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में भिड़ंत हुई. इसमें कुछ लोग घायल हुए हैं. इसके लिए राज्य सरकार ज़िम्मेदार है.’’
टीएमसी का बीजेपी पर पलटवार
बीजेपी के 12 घंटे के बंद की घोषणा के बाद राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने कहा है कि इससे ‘बीजेपी का गेम प्लान पता चल गया है कि वो कैसे एक महिला डॉक्टर के रेप और मर्डर मामले पर लोगों के दर्द का इस्तेमाल कर राज्य में अराजकता पैदा करना चाहती है.’
ये बंद बुधवार की सुबह 6 बजे से शुरू होगा जिसको लेकर पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने कहा है कि प्रशासन ये सुनिश्चित करेगा कि बंद के दौरान आम जनजीवन प्रभावित न हो.
बीजेपी के बंद के आह्वान पर टीएमसी नेता कुणाल घोष ने कहा, “हम शुरुआत से कह रहे हैं कि छात्र समाज के नबान्न अभियान को बीजेपी का समर्थन है. यह बात आज स्पष्ट हो गई कि छात्र प्रदर्शनकारियों के भेष में उपद्रवियों ने किस तरह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के नाम पर बड़े पैमाने पर उपद्रव मचाया. यह भी स्पष्ट है कि बीजेपी ने अशांति फैलाने के लिए बंद का आह्वान करने में कोई समय नहीं गंवाया.”
उन्होंने कहा कि ‘राज्य की जनता बीजेपी के गेम प्लान को नाकाम कर देगी.’
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मुख्य सलाहकार अलापन बंदोपाध्याय ने राज्य सचिवालय में कहा, “पश्चिम बंगाल सरकार बुधवार को किसी भी बंद को अनुमति नहीं देगी. हम लोगों से अनुरोध करते हैं कि वो भाग न लें. राज्य सरकार आम जनजीवन चलते रहने के लिए सभी ज़रूरी क़दम उठाएगी. दुकानें, बाज़ार और शॉपिंग मॉल्स खुले रहेंगे.”
ये कौन-सा छात्र संगठन है
छात्रों के प्रदर्शन के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करने की कांग्रेस ने निंदा की है. पश्चिम बंगाल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता है कि प्रदर्शनों को रोकने के लिए इतने उच्च बंदोबस्त क्यों किए गए?
उन्होंने पत्रकारों से मुर्शिदाबाद में कहा, “जब आंदोलन छेड़ा जाता है तो उसका असर होना चाहिए और वो हो रहा है. लेकिन किसी भी पार्टी को आंदोलन के दौरान ज़रूरत से ज़्यादा इंतज़ाम की क्या ज़रूरत है. सुना जा रहा है कि स्टेशन पर पाबंदियां लगा दी गई हैं.”
“सरकार पहले ही कह चुकी है कि ये अवैध है. इस आंदोलन को सही ढंग से चलाना और हिंसा न हो इसके लिए सत्तारुढ़ और विपक्ष को बैठक करके सहमति बनानी चाहिए. अगर ऐसा नहीं होगा तो सिर्फ़ सियासत होगी और कुछ नहीं होगा.”
वहीं पश्चिम बंग छात्र समाज का कहना है कि वो एक ग़ैर रजिस्टर्ड छात्र संगठन है.
उसका कहना है कि वो ग़ैर राजनीतिक संगठन है. साथ ही उसने ये भी कहा है कि उसका बीजेपी, आरएसएस या एबीवीपी से कोई संबंध नहीं है.
इस छात्र संगठन के अलावा संग्रामी जौठ मंच ने भी राज्य सचिवालय तक मार्च करने का आह्वान किया था. ये राज्य सरकार के कर्मचारियों का संगठन है. जो लंबे समय से केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तरह ही महंगाई भत्ता (डीए) देने की मांग कर रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित