जम्मू कश्मीर: जज नीलकंठ गंजू की हत्या का केस जिसकी 34 साल बाद भी हो रही है चर्चा

नीलकंठ गंजू

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से बीबीसी हिंदी के लिए

जज नीलकंठ गंजू की हत्या के केस की दोबारा जांच होने की ख़बर पर उनके परिवार ने राहत और खुशी जाहिर की है.

नीलकंठ गंजू श्रीनगर के रहने वाले थे और अल्पसंख्यक कश्मीरी पंडित समुदाय से आते थे. 1980 के दशक में मुस्लिम चरमपंथियों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी.

गंजू परिवार ने अब इंसाफ़ की उम्मीद जताई है.

उनके रिश्तेदारों ने बीबीसी को बताया, " हम इस मामले को फिर से खोलने और इसकी जांच करने का स्वागत करते हैं. हम केवल आशा कर सकते हैं कि इस जांच को अंजाम तक पहुंचाया जाएगा."

"हम उम्मीद करते हैं कि ना सिर्फ़ हमें बल्कि उन सभी परिवारों को न्याय मिलेगा जिन्होंने उस दौर में अपने परिजन को खोया है. ".

पिछले साल एक के बाद एक हुई हत्याओं केबाद कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया.

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इमेज कैप्शन, पिछले साल एक के बाद एक हुई हत्याओं केबाद कश्मीरी पंडितों ने प्रदर्शन किया.

क्या है मामला

रिटायर्ड जज नीलकंठ गंजू की हत्या को जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के संस्थापक मोहम्मद मक़बूल भट पर चले मुक़दमे से जोड़ा गया था.

मक़बूल भट्ट पर कई संगीन आरोप थे. इनमें 1968 में पुलिस अधिकारी अमर चंद की हत्या का आरोप भी शामिल था. गंजू ने मक़बूल भट्ट को मौत की सज़ा सुनाई थी.

मक़बूल को 11 फ़रवरी 1984 को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई थी.

जिसके बाद उसी महीने नीलकंठ गंजू पर पहली बार बम से हमला किया गया. उस हमले में वह बच गए थे.

फिर 1989 में श्रीनगर में गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी.

जम्मू कश्मीर पुलिस की जांच एजेंसी स्टेट इनवेस्टिगेटिव यूनिट( एसआईयू ) की ओर से एक बयान जारी किया गया है.

बयान में कहा गया है कि आम लोगों या किसी भी व्यक्ति को इस मामले में जो भी जानकारी हो, वो आगे आकर साझा करें.

एजेंसी ने कहा है कि 04 नवंबर 1989 को जस्टिस गंजू की हत्या के पीछे की बड़ी आपराधिक साज़िश का पता लगाने के लिए वो मामले की जांच करेगी.

बयान में ये भी कहा गया है, “ऐसे सभी लोगों की पहचान पूरी तरह से छुपाई जाएगी और गुप्त रखी जाएगी.”

कश्मीरी पंडित

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कश्मीर का ख़ूनी दौर

साल 1989 में कश्मीर में भारत विरोधी चरमपंथी घटनाओं की शुरुआत हुई और फिर हिंसा का एक लंबा दौर चला.

तब कई कश्मीरी पंडितों को चरमपंथियोंं ने निशाना बनाया.

कश्मीरी पंडितों के लिए काम करने वाली संस्था कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति (केपीएसएस ) के मुताबिक़, कश्मीर में वर्ष 1989 से लेकर आज तक क़रीब 700 कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई है.

हालांकि जम्मू कश्मीर सरकार ने वर्ष 2010 में आंकड़े जारी करते हुए विधानसभा में बताया था कि वर्ष 1989 से लेकर वर्ष 2004 तक कुल 219 कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी.

सरकार ने ये भी कहा था कि वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2010 तक किसी भी कश्मीरी पंडित की हत्या नहीं हुई.

लेकिन कश्मीर में बीते तीन वर्षों में कई कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई है.

1980 और 1990 के दशक की हिंसा के बाद घाटी के ढेर सारे कश्मीरी पंडितों ने वहां से पलायन शुरू कर दिया और भारत के अलग-अलग शहरों में रहने लगे.

हालांकि अब भी कश्मीर में क़रीब 800 कश्मीरी पंडित रहते हैं.

बीते 35 सालों में कश्मीरी पंडितों की हत्या के चर्चित केस

टीका लाल टपलू

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टीका लाल टपलू, नेता और वकील

जाने माने कश्मीरी पंडित नेता और वकील टीका लाल टपलू की 14 सितंबर 1989 को श्रीनगर के चिंकारा इलाके में उनके घर के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

कश्मीर में चरमपंथ शुरू होने के बाद कश्मीर घाटी में ये किसी हाई प्रोफाइल कश्मीरी पंडित की हत्या का पहला मामला था.

टीका लाल टपलू उस समय जम्मू कश्मीर भाजपा के उपाध्यक्ष भी थे.

उनके अंतिम संस्कार में बीजेपी नेता लाल कृष्ण आडवाणी भी श्रीनगर आए थे.

लासा कौल

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लासा कौल, डायरेक्टर दूरदर्शन

कश्मीरी पंडित लासा कौल (45 वर्ष ) को 14 फरवरी 1990 में श्रीनगर में उनके घर के बाहर उस समय गोली मार दो गई, जब वो श्रीनगर स्थित दूरदर्शन केंद्र के दफ्तर से अपने घर आ रहे थे.

घर पहुंचते ही जब वो गाड़ी से क़दम बाहर रख रहे थे तो उनपर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी गईं.

पुलिस ने लासा कौल की हत्या के लिए चरमपंथी संगठन जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट को ज़िम्मेदार ठहराया था.

ख़बरों के मुताबिक़, शौकत अहमद बख्शी ने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के प्रमुख अमानुल्लाह खान के कहने पर कौल की हत्या की थी.

अनंतनाग में एक कश्मीरी पंडित परिवार का वीरान पड़ा मकान.

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प्रेमनाथ भट्ट, वकील

दक्षिण कश्मीर के जिला अनंतनाग के रहने वाले कश्मीरी पंडित प्रेमनाथ भट्ट को 27 दिसंबर 1989 को अनंतनाग में उनके घर के क़रीब गोली मार दी गई.

भट्ट पेशे से एक वकील थे. वो चर्चित लेखक भी थे.

दक्षिण कश्मीर में ये किसी हाई प्रोफाइल कश्मीरी पंडित की पहली हत्या थी.

कश्मीरी पंडित

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इमेज कैप्शन, घाटी में कुछ कश्मीरी पंडित अभी भी रह रहे हैं. ऐसा ही एक परिवार अनंतनाग में.

सर्वानंद कौल प्रेमी, कवि और शिक्षक

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के सोफ शाली गाँव के जाने-माने कश्मीरी पंडित 65 साल के सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बड़े बेटे वीरेंदर कौल की वर्ष 1990 में हत्या की गई थी.

चरमपंथियोंं ने दोनों का घर से अपहरण किया फिर उनकी गोली मारकर हत्या की थी.

उनके बेटे को बाद में पेड़ से लटका दिया था.

प्रेमी कश्मीरी भाषा में कविता लिखते थे.

दर्जनों किताबें लिखने के अलावा उन्होंने हिंदू धर्म की कई किताबों का कश्मीरी और उर्दू भाषा में अनुवाद किया था.

अनंतनाग में एक मंदिर

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माखनलाल बिंद्रा, केमिस्ट

6 अक्टूबर 2021 को कश्मीर के मशहूर केमिस्ट माखनलाल बिंद्रा (70 साल ) की श्रीनगर में गोली मारकर हत्या कर दी गई.

पुलिस के मुताबिक़, श्रीनगर के इक़बाल पार्क के पास चरमपंथियों ने बिंद्रा को गोली मार दी.

पुलिस ने बिंद्रा की हत्या के बाद बताया था कि गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी मौत हो गई.

राहुल भट्ट, चरमपंथियों ने जिन्हें गोली मार दी थी.

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नदिमार्ग हत्याकांड

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा के नदिमार्ग गाँव में 23 मार्च 2003 को एक साथ 24 कश्मीरी पंडितों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टीकू ने बीबीसी से कहा कि वो नीलकंठ गंजू मर्डर केस दोबारा खोलने के फ़ैसले का स्वागत करते हैं.

उन्होंने कहा, "जिस तरह से इस मामले को दोबारा खोला गया है, उसी तरह अन्य कश्मीरी पंडितों की हत्याओं के मामलों की भी जाँच की जाए. हमारे लिए वो सब कश्मीरी पंडित अहम हैं जो कश्मीर में मारे गए. "

बीबीसी ने जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजी दिलबाग सिंह और एडीजीपी विजय कुमार से कश्मीरी पंडितों की हत्याओं के इन तमाम मामलों और उनकी जांच पर बात करने की कोशिश की और व्हाट्सप्प पर मैसेज भी भेजे, लेकिन अब तक उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया है.

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