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मिस्र और ग़ज़ा के बीच ‘फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर’ से परेशान है इसराइल
- Author, अला रजाई
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, अरबी
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू का कहना है कि ग़ज़ा और मिस्र के बीच सीमा पर 'फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर' इसराइल के नियंत्रण में होना चाहिए.
उन्होंने कहा है कि उस क्षेत्र में इसराइल की जंग और झड़पें कई महीनों तक जारी रह सकती हैं.
नेतन्याहू ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान कहा कि 'फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर', विशेष कर दक्षिण से ग़ज़ा में दाख़िल होने का रास्ता, हमारे कंट्रोल में होना चाहिए. इसे बंद रखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, ''यह साफ़ रहे कि कोई भी दूसरी व्यवस्था क्षेत्र को निशस्त्र करने की गारंटी नहीं दे सकती जो हम चाहते हैं.''
मिस्र के विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि मिस्र और ग़ज़ा के बीच सीमाई पट्टी पर बमबारी से दोनों देशों के बीच हालात तनावपूर्ण हो सकते हैं.
इस क्षेत्र को सुरक्षा कारणों से बफ़र ज़ोन समझा जाता है.
'फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर' क्या है?
मिस्र और ग़ज़ा की पट्टी के बीच 14 किलोमीटर का सीमाई क्षेत्र है. इसके उत्तर में भूमध्य सागर और दक्षिण में इसराइली क्षेत्र करम अबू सालेम है.
सन 1979 के मिस्र-इसराइल शांति समझौते के तहत इस कॉरिडोर को बफ़र ज़ोन घोषित किया गया था. इसकी व्यवस्था इसराइल के पास थी. मगर 2005 में इसराइल ने यह क्षेत्र ख़ाली कर दिया.
उसी साल इसराइल ने मिस्र के साथ 'फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर' पर सहमति जताई. इससे शांति समझौता रद्द या इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ बल्कि दोनों पक्षों की सैनिक उपस्थिति को सीमित किया गया.
प्रोटोकॉल के तहत मिस्र ने ग़ज़ा की सीमा पर 750 अधिकारी तैनात किए. यह सैनिक बल नहीं बल्कि पुलिस अधिकारी हैं जिनका मक़सद आतंकवाद से निपटना और घुसपैठ रोकना है.
दो साल बाद हमास ने ग़ज़ा की व्यवस्था अपने हाथ में ली और सीमा के फ़लस्तीनी क्षेत्र का कंट्रोल संभाल लिया. ग़ज़ा पर इसराइल की सख़्ती के साथ फ़लस्तीनियों की ओर से कॉरिडोर पार करके मिस्र की ओर आना-जाना बढ़ गया.
इसके बाद से मिस्र ने सीमाई पट्टी पर सुरक्षा सख़्त कर रखी है.
कई वर्षों के दौरान उस सीमाई पट्टी की ज़मीन के नीचे सैंकड़ों सुरंगें बनाई गई हैं. इसके उत्तर में समंदर, पूर्व और दक्षिण में इसराइल और पश्चिम में मिस्र हैं.
मिस्र का हमास पर आरोप
ग़ज़ा की 23 लाख आबादी के लिए यह सुरंगें लाइफ़ लाइन साबित होती हैं, जिनकी मदद से वहाँ के लोग आना-जाना कर पाते हैं.
ग़ज़ा में जारी जंग के दौरान यह देखा गया है कि हमास की सैन्य क्षमता में वृद्धि हुई है. इसराइल को आशंका है कि कॉरिडोर के नीचे मौजूद सुरंगों की मदद से हमास को हथियार उपलब्ध कराए गए हैं.
पिछले दशक के दौरान मिस्र ने अपनी उत्तर पूर्वी सीमा पर स्थित प्रायद्वीप सिनाई में लड़ाका गिरोहों के ख़िलाफ़ ऑपरेशन किया था.
इसमें ग़ज़ा से मिस्र आती सुरंगों का नेटवर्क नष्ट किया गया था. मिस्र की सरकार के अनुसार, इसका मक़सद यह था की सुरंगों की मदद से मिस्र में लड़ाका गिरोहों की घुसपैठ रोकी जाए.
मिस्र ने अक्सर हमास पर उन लड़ाका गिरोहों के समर्थन का आरोप लगाया है जो मिस्र की सेना को निशाना बनाते हैं.
ऐसा मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के सत्ता से जाने के बाद हुआ जिन्हें इख़्वानुल मुस्लिमीन का समर्थन प्राप्त था और जिनके हमास से अच्छे संबंध थे.
उसके बाद से सीमाई पट्टी के हालात बदलते रहे हैं. फ़लस्तीन की ओर हमास ने सीमाई क्षेत्रों को बुलडोज़ किया और कांटेदार तार लगाए.
दूसरी और मिस्र ने स्टील की दीवार बनवाई और वहाँ मिस्र के शहर रफ़ाह और उसके आसपास के क्षेत्रों से घरों और खेतों को ख़त्म किया ताकि सिनाई के पाँच किलोमीटर के क्षेत्र तक सीमाई बफ़र ज़ोन का विस्तार हो सके.
फ़लस्तीन और मिस्र के इलाक़ों के बीच केंद्रीय मार्ग रफ़ाह क्रॉसिंग है.
यह ग़ज़ा के निवासियों के लिए बाहरी दुनिया तक जाने का अकेला रास्ता है. इसराइल के अधिकारियों ने ग़ज़ा की पट्टी और दक्षिणी इसराइल के बीच सभी छह क्रॉसिंग बंद कर रखी हैं.
सत्तर दिन से अधिक तक सीमा स्थित क्रॉसिंग बंद रखने के बाद इसराइल ने रविवार को राहत सामग्री भेजने के लिए करम अबू सालेम क्रॉसिंग खोली थी.
मिस्र के अधिकारियों के अनुसार रफ़ाह क्रॉसिंग के फ़लस्तीन इलाक़े पर इसराइल ने चार बार बमबारी की है.
मिस्र को क्या आपत्ति हो सकती है?
मिस्र प्रशासन ने बार-बार इसराइल को बफ़र ज़ोन में सैनिक ऑपरेशन के ख़िलाफ़ चेतावनी दी है. इसराइल ने करम अबू सालेम क्रॉसिंग पर ‘ग़लती से’ मिस्र के अधिकारियों को निशाना बनाया था और इस घटना पर इसराइल खेद भी प्रकट कर चुका है.
इसराइल का ‘फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर’ के फ़लस्तीनी इलाक़ों का दोबारा कंट्रोल संभालना ग़ज़ा में जारी जंग के नतीजे पर निर्भर है.
मगर मध्य पूर्व में क्षेत्रीय मामलों के माहिर समीर ग़तास की राय है के इसके लिए इसराइल को मिस्र से सुरक्षा संपर्क बनाने होंगे.
विश्लेषकों का मानना है कि इसके लिए इसराइल और मिस्र को अपने बीच शांति समझौते के नए प्रोटोकॉल पर सहमति जितनी होगी.
यह वैसा ही एक प्रोटोकॉल होगा जैसा 2005 में जारी हुआ था.
इसराइल की योजना के बावजूद मिस्र ने इस मामले पर अब तक अपना पक्ष नहीं बताया है. मिस्र के विश्लेषक ख़ालिद ओकाशा की राय है कि राजनीतिक दृष्टि से मिस्र के वर्तमान प्रशासन परंपरावादी रहेगा क्योंकि इस मामले में इसराइल का समर्थन करना वैसा ही होगा जैसे वह फ़लस्तीन की समस्या पर कोई समझौता कर रहा है.
ओकाशा के अनुसार, सीमाई पट्टी की व्यवस्था इसराइल को देने का मतलब होगा कि इसराइल ही रफ़ाह क्रॉसिंग को कंट्रोल करेगा. यह अकेला रास्ता है जो फ़िलहाल इसराइल के कंट्रोल में नहीं और इससे फ़लस्तीनियों पर दबाव बढ़ सकता है.
समीर ग़तास के अनुसार, मिस्र को आशंका है कि अगर इसराइल को ‘फ़िलाडेल्फ़ी कॉरिडोर’ का कंट्रोल मिल गया तो इससे ग़ज़ा के निवासियों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं जो कि पहले ही खुली क़ैद में रहने पर मजबूर हैं. 'आख़िर में ग़ज़ा की पट्टी के लोग वहां से निकलने पर मजबूर हो जाएंगे.''
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