कौन हैं वो अमेरिकी सांसद जिन्होंने हिंदू, सिख लोगों के लिए गुट बनाया

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भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद श्री थानेदार ने हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन धर्मों को मानने वालों के लिए एक नया गुट बनने की घोषणा की है. उनका कहना है कि उन्होंने ये गुट इन लोगों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से बनाया है.
हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन लोगों के लिए बन रहे इस गुट या कॉकस को थानेदार ने औपचरिक तौर पर शुक्रवार को लॉन्च किया. उन्होंने दावा किया कि उनके इस गुट को क़रीब 27 अमेरिकी सांसदों का समर्थन हासिल है जिनमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेट नेता शामिल हैं.
मिशिगन से डेमोक्रेट नेता श्री थानेदार का कहना है कि ये गुट इन समुदायों के हितों के लिए बातचीत आगे बढ़ाने, एक-दूसरे के बीच समझ बढ़ाने और उनकी ख़ास ज़रूरतों और चिंताओं के बारे में लोगों को जागरूक करेगा.
साथ ही ये धार्मिक भेदभाव मिटाने और हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने का काम करेगा.
कॉकस दरअसल एक गुट होता है जिसमें कई नेता संविधान के दायरे में रहते हुए एक आम उद्देश्य के लिए साथ आ सकते हैं.
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गुट की ज़रूरत के बारे में क्या बोले थानेदार?
थानेदार ने कहा कि समाज में अल्पसंख्यक समूहों के लिए समावेशी माहौल बनाने, आपसी समझ बढ़ाने और इसके लिए ज़रूरी नीतियों में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उन्होंने ये गुट बनाया है.
उन्होंने कहा कि ये एक मुहिम है जो कहती है सभी धर्म, सभी संस्कृति और सभी समुदाय के लोग अमेरिका में स्वतंत्र रूप से मिलजुल कर रह सकते हैं.
इस गुट को लॉन्च करते हुए उन्होंने कहा, "मैं खुद अमेरिका की अनेकता का सबूत हूं. ये गुट इस बात की प्रतिबद्धता है कि हम धार्मिक भेदभाव, नफरत और कट्टरपंथ के ख़िलाफ़ खड़े हैं, हम समावेशी समाज चाहते हैं और एक ऐसा देश चाहते हैं जहां अनेकता में एकता की केवल बात न हो बल्कि इसका जश्न मनाया ज सके."
उन्होंने कहा, "अमेरिका की आबादी में क़रीब 30 लाख हिंदू, 12 लाख बौद्ध, 5 लाख सिख और 2 लाख जैन हैं. यहां एक हज़ार हिंदू मंदिर, एक हज़ार बौद्ध मंदिर, 800 गुरुद्वारे और सौ जैन मंदिर हैं जो समुदाय के विकास, परोपकार और आध्यात्मिक कल्याण का केंद्र बने हुए हैं."
"कुछ संस्कृतियों को कई बार ग़लत नज़रिए से देखा जाता है, उन्हें ग़लत समझा जाता है. मैं चाहता हूं कि हर कोई अपने धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र हो. हर व्यक्ति को ये हक होना चाहिए कि वो बिना डरे अपने धर्म का पालन कर सके."
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार अमेरिकन्स फ़ॉर हिंदू के चेयरमैन और संस्थापक रोमेश जापरा ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि अमेरिका में रहने वाले हिंदू, बौद्ध, सिख और जैन काफी वक्त से इसकी ज़रूरत महसूस कर रहे थे.

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कौन हैं श्री थानेदार?
दक्षिण भारत के कर्नाटक के बेलगावी में एक गरीब परिवार में जन्मे श्री थानेदार का शुरुआती जीवन मुश्किलों में बीता.
छह भाई-बहनों में वो तीसरे थे. उनके पिता सिविल कोर्ट में सीनियर क्लर्क थे और मां एक घरेलू महिला थीं.
जब वो 14 साल के हुए तो उनके पिता रिटायर हो गए और थानेदार के सामने पढ़ाई पूरा करना बड़ा सवाल बन गया. उन्होंने छोटे-मोटे काम किए लेकिन पढ़ाई जारी रखी.
उनकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार उन्होंने बचपन में ग़रीबी का सामना किया. उनके घर में न तो पीने के पानी का नल था और न ही बिजली का कनेक्शन. कई बार उनके परिवार के लिए दो वक़्त की रोटी की व्यवस्था करना भी मुश्किल होता था.
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1979 में मुंबई से केमिस्ट्री में स्नातकोत्तर करने के बाद वो पीएचडी करने के लिए अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ अक्रॉन आए. इसके बाद वो 1988 में अमेरिकी नागरिक बन गए.
उनकी वेबसाइट के अनुसार उन्होंने पढ़ाई के दौरान अपने खर्च पूरे करने के लिए चौकीदारी का काम किया और कई बार अपनी कार में ही सोए.
पढ़ाई के बाद उन्होंने कई कंपनियों में काम किया और फिर दवाओं की कंपनी बनाई. 1997, 2007 और 2016 में अर्न्स्ट एंड यंग ने एंटरप्रेन्युअर ऑफ़ द ईयर भी बताया. 2016 में थानेदार ने अपनी कंपनी बेच दी.
2018 में वो पहली बार मिशिगन के गवर्नर की पद की रेस में शामिल हुए, लेकिन ये चुनाव वो जीत नहीं सके. इसके बाद वो 2020 में मिशिगन विधानसभा के चुनाव में खड़े हुए और जीते. 2022 में वो मिशिगन से अमेरिकी संसद के लिए चुने गए.
उन्होंने बच्चों की पढ़ाई में सरकार की अधिक भागीदारी के लिए मुहिम चलाई है. एक ट्वीट में उन्होंने कहा, "कक्षा 12वीं से लेकर मास्टर डिग्री तक की मेरी शिक्षा सरकारी संस्थानों में हुई. सरकार को सभी बच्चों की पढ़ाई में निवेश करना चाहिए. ये एक अच्छा बिज़नेस है और इससे देश की अर्थव्यवस्था को मज़बूती मिलेगी."
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चार बार रिजेक्ट हुआ वीज़ा
एएनआई को दिए एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि बचपन में उनकी पढ़ाई मराठी भाषा में हुई थी. (महाराष्ट्र और कर्नाटक की सीमा के पास बसे बेलगावी में ऐसे स्कूल हैं जो कन्नड या मराठी भाषा में पढ़ाते हैं. थानेदार ने जिस स्कूल में पढ़ाई की वहां मराठी में पढ़ाया जाता था.)
थानेदार बताते हैं कि अमेरिका जाने के लिए जब उन्होंने वीज़ा के लिए आवेदन किया तो पांचवीं बार में उनका वीज़ा क्लियर हुआ.
वो कहते हैं कि पहली बार जब वो वीज़ा एप्लिकेशन के लिए गए थे तो उनका आवेदन रिजेक्ट कर दिया था. वो बेहोश हो गए.
उनका वीज़ा तीसरी बार रिजेक्ट हो गया जिसके बाद उन्होंने अमेरिका में अपने प्रोफ़ेसर से एक चिट्ठी लेकर वीज़ा के लिए आवेदन किया. महीने भर बाद उन्होंने उन्हीं दस्तावेज़ों के साथ फिर से वीज़ा के लिए आवेदन किया और उन्हें वीज़ा दे दिया गया.
खालिस्तानी अलगाववादियों के लिए उन्होंने क्या कहा
इस साल मार्च में खालिस्तान समर्थकों ने अमेरिका के सेन फ्रांसिस्को में मौजूद भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला किया था. सुरक्षा घेरे को तोड़ कर ये लोग भीतर घुस आए थे और उन्होंने वहां आग लगाने की कोशिश की थी.
एएनआई के दिए इंटरव्यू में इससे संबंधित एक सवाल के जवाब में उन्होंने खालिस्तान समर्थकों के बारे में कहा था कि "अभिव्यक्ति की आज़ादी एक बात है लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि आप हिंसा को सही ठहराएं या लोगों की जान लेना आपका अधिकार है. विरोध प्रदर्शन करना आपका अधिकार है लेकिन ये शांतिपूर्ण होना चाहिए."
उन्होंने बाइडन प्रशासन से अपील की कि दूतावासों के साथ-साथ पूजा के स्थलों की सुरक्षा की जानी चाहिए.
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पीएम मोदी से प्रेरित हैं थानेदार
इसी साल अगस्त में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आया था जिसमें श्री थानेदार भी शामिल थे.
इस दौरान समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "जब मोदी अमेरिका दौरे पर आए थे मेरी उनसे मुलाक़ात हुई थी. कांग्रेस से साझा सत्र में मैंने उनका भाषण सुना जिससे मैं प्रेरित हुआ. उसी वक्त मुझे लगा कि कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को भारत आना चाहिए."
"उस वक्त कांग्रेस के सदस्यों को लगा कि भारत के साथ रिश्ते बेहतर करना चाहते हैं क्योंकि उस वक्त हम चीन की तरफ से ख़तरा देख रहे थे. रूस के यूक्रेन पर हमला करने के बाद हम रूस की तरफ से ख़तरा देखने लगे. पूरे विश्व को देखें तो कई इलाक़ों में और ख़ासकर इंडो-पेसिफ़िक के इलाक़े में अस्थिरता है."
"भारत के साथ हमारे रिश्ते बेहद महत्वपूर्ण हैं इसलिए हम एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए. एक कारण ये भी है कि पीएम मोदी ने हमें दिल्ली आकर भारत के स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ मनाने का न्योता दिया था."
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