बांग्लादेश सरकार के क़ानूनी सलाहकार क्यों बोले, 'भारत समझ ले, ये शेख़ हसीना का बांग्लादेश नहीं है'

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इमेज कैप्शन, भारत और बांग्लादेश में एक दूसरे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं. (फ़ाइल फ़ोटो)

भारत और बांग्लादेश के बीच लगातार तनाव बढ़ता दिख रहा है.

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए त्रिपुरा की राजधानी अगरतला स्थित बांग्लादेश उप उच्चायोग में वीजा और वाणिज्य दूतावास से जुड़े सारे कामकाज रोक दिए.

सोमवार को लगभग 50 लोग त्रिपुरा में बांग्लादेश के उप उच्चायोग की इमारत में घुस गए थे. उन पर वहां कथित तौर पर तोड़फोड़ के आरोप हैं. हालांकि इस मामले में भारत सरकार ने डीएसपी समेत चार पुलिस अफसरों के ख़िलाफ़ एक्शन लिया है और साl प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार किया है.

अगरतला में सोमवार को विरोध-प्रदर्शन हिंदू संघर्ष समिति के बैनर तले हुआ था.

बांग्लादेश ने इस घटना पर सख़्त आपत्ति जताई थी. इसके बाद भारत सरकार ने इस घटना पर अफ़सोस जाहिर करते हुए कार्रवाई की.

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने ढाका में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा को बुलाकर उनके सामने त्रिपुरा में बांग्लादेश के उप उच्चायोग में लोगों के घुसने की घटना पर विरोध भी जताया.

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बांग्लादेश और भारत में लगातार एक-दूसरे के ख़िलाफ़ प्रदर्शन जारी हैं.

बांग्लादेश में हिंदू संगठन सनातन जागरण मंच और इस्कॉन से जुड़े चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ़्तारी के बाद भारत में त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल समेत कई जगहों पर प्रदर्शन हो रहे हैं.

ये प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी हैं. वहीं बांग्लादेश में भी ढाका यूनिवर्सिटी में छात्रों ने भारत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया.

मंगलवार को ऑल त्रिपुरा होटल्स ऑल त्रिपुरा होटल एंड रेस्टोरेंट ओनर्स एसोसिएशन (एटीएचआरओए) बांग्लादेश में कथित तौर पर भारतीय ध्वज के अपमान को लेकर विरोध जताया. एसोसिएशन ने बांग्लादेशी नागरिकों को सर्विस न देने का ऐलान किया है.

दो दिन पहले त्रिपुरा के सबसे बड़े प्राइवेट अस्पताल आईएलएस ने बांग्लादेशी लोगों का इलाज न करने का ऐलान किया था.

'भारत समझ ले, ये शेख़ हसीना का बांग्लादेश नहीं है'

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इमेज कैप्शन, शेख़ हसीना को भारत समर्थक माना जाता है (फ़ाइल फ़ोटो)
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उधर, सोमवार की रात ढाका यूनिवर्सिटी के कैंपस में सैकड़ों छात्रों ने भारत विरोधी नारे लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया.

इस विरोध-प्रदर्शन में कई छात्र संगठन के छात्र शामिल थे. सोमवार को अगरतला में बांग्लादेश के उप-उच्चायोग के कैंपस में तोड़फोड़ और राष्ट्र ध्वज उतारने के ख़िलाफ़ इन छात्रों ने आक्रामक विरोध-प्रदर्शन किया.

ढाका यूनिवर्सिटी में हुए विरोध-प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने त्रिपुरा में बांग्लादेश के उप उच्चायोग की इमारत में घुसने और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि भारत एक अच्छे पड़ोसी की तरह पेश आए.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने संयुक्त राष्ट्र से बांग्लादेश में शांति रक्षक दल भेजने की मांग की थी.

इसके साथ ही ममता बनर्जी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बांग्लादेश के कुछ इलाकों में कथित तौर पर हमले के पीड़ित अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निजी तौर पर पहल करने की अपील भी की थी.

ममता बनर्जी के इस बयान की आलोचना करते हुए बांग्लादेश की स्वतंत्रता और संप्रभुता रक्षा कमेटी के संयोजक सईद अहमद सरकार ने बीबीसी बांग्ला से मंगलवार को कहा, ''भारत के मीडिया में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ प्रौपेगेंडा चलाया जा रहा है और गलतफ़हमियां फैलाई जा रही हैं. उन्हें ये बात समझने की जरूरत है कि यहां पर बड़ा जन विद्रोह हुआ है.''

उन्होंने कहा, '' बांग्लादेश के साथ भारत का पहले जैसा बर्ताव उसकी गलती होगी. भारत जहां है वहीं रहे. यहां दखल न दे. हमारे देश में हिंदू जैसी कोई चीज नहीं है. हम सभी बांग्लादेशी हैं.''

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इमेज कैप्शन, ढाका यूनिवर्सिटी में भारत विरोधी प्रदर्शन

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के कानूनी सलाहकार आसिफ नज़रुल ने भी त्रिपुरा की घटना और ममता बनर्जी के बयान को लेकर नाराजगी जताई है.

बीबीसी बांग्ला के मुताबिक़ उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा, '' भारत को ये समझना होगा कि ये शेख़ हसीना का बांग्लादेश नहीं है.''

उन्होंने लिखा, ''हम बराबरी के स्तर पर दोस्ती के समर्थक हैं. शेख़ हसीना सत्ता में बने रहने के लिए भारत के तुष्टिकरण की नीति पर चलती थीं. वो बगैर जनादेश के कुर्सी पर बैठे रहना चाहती थीं.''

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख़ हसीना को भारत समर्थक के तौर पर देखा जाता रहा है.

ढाका यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सोमवार को भारत के रुख़ की आलोचना करते हुए कहा कि भारत की सरकार ने अपने संबंधों को शेख़ हसीना के साथ आगे बढ़ाया न कि बांग्लादेश के लोगों के साथ.

इन छात्रों ने आरोप लगाया कि भारत शेख़ हसीना के सत्ता से बाहर होने से ख़ुश नहीं है.

आसिफ नज़रुल ने लिखा, ''ये बांग्लादेश एक स्वतंत्र, संप्रभु और स्वाभिमानी देश है. बांग्लादेश एक निडर और युवा देश है.''

ममता बनर्जी के बयान पर उन्होंने लिखा, ''भारत सरकार को बांग्लादेश में शांति सैनिक भेजने की मांग पर यूएन से बात करनी है तो करके देख ले. यहां (बांग्लादेश) की बात करने के बजाय उन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में अल्पसंख्यकों और दलितों के साथ हो रहे बर्ताव पर शर्म आनी चाहिए.''

बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफ़िक़ुर रहमान ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देश के डिप्लोमैटिक मिशन को सुरक्षा देने में नाकाम रहा है.

शफ़िक़ुर रहमान ने कहा, ''भारत के पास बांग्लादेश में सांप्रदायिक सद्भाव की बात करने का कोई अधिकार नहीं है. बांग्लादेश की जनता किसी के प्रभुत्व को स्वीकार नहीं करेगी. बांग्लादेश के लोगों से आग्रह है कि वे सतर्क रहें. ऐसे मामलों में राष्ट्रीय एकता बहुत ज़रूरी है.''

जमात-ए-इस्लामी पर शेख़ हसीना की सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा था, लेकिन हसीना के सत्ता से बाहर होते ही अंतरिम सरकार ने प्रतिबंध हटा दिया था.

चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका पर सुनवाई टली

चिन्मय कृष्ण दास

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इमेज कैप्शन, चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर को चटगांव मे गिरफ़्तार कर लिया गया था

इस बीच, बांग्लादेश में इस्कॉन से जुड़े रहे चिन्मय कृष्ण दास की जमानत याचिका पर सुनवाई एक बार फिर टाल दी गई.

चिन्मय कृष्ण दास को देशद्रोह के मामले में गिरफ़्तार किया गया था. सम्मिलिती सनातनी जागरण जोत ने बताया कि चटगांव मेट्रोपोलिटन सेशन कोर्ट के जज सैफ़ुल इस्लाम ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई 2 जनवरी, 2025 के लिए टाल दी. ख़बरों में कहा जा रहा है कि दास की पैरवी के लिए वहां कोई वकील तैयार नहीं है.

बीबीसी बांग्लादेश के मुताबिक़ चटगांव जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नाज़िमुद्दीन चौधरी ने पत्रकारों से कहा, ''आज अभियुक्त (चिन्मय कृष्णदास) की ओर से पैरवी करने के लिए कोई वकील मौजूद नहीं था. इसलिए सुनवाई नहीं हो सकी. अब अगली सुनवाई 2 जनवरी 2025 को होगी.''

बांग्लादेश की अदानी पावर से बिजली ख़रीद में कटौती की ख़बर

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इमेज कैप्शन, बांग्लादेश में बिजली कटौती के ख़िलाफ़ कुछ महीने पहले प्रदर्शन देखने को मिले थे (फ़ाइल फ़ोटो)

इस बीच मीडिया ख़बरों में कहा गया है कि बांग्लादेश ने भारतीय कंपनी अदानी पवार से बिजली खरीद घटा कर आधी कर दी है. अदानी पावर के साथ पहले ही 65 करोड़ डॉलर के बकाये को लेकर बांग्लादेश का विवाद चल रहा है.

देर से भुगतान होने की वजह से अदानी पावर ने पहले भी बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली सप्लाई घटा दी है. बांग्लादेश पर अब अदानी पावर का बकाया बढ़कर 90 करोड़ डॉलर तक पहुंच चुका है.

मीडिया ख़बरों के मुताबिक़ बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड के अध्यक्ष रियाज़ुल करीम ने कहा, ''अदानी पावर ने जब हमारी बिजली काट दी थी तो हम सदमे में आ गए थे. बांग्लादेश के लोगों के बीच इसे लेकर काफी गुस्सा था. अब जाड़े में बिजली की मांग कम हो गई है इसलिए हमने उनसे कहा है कि बिजली प्लांट की दोनों यूनिटों (अदानी पावर की यूनिटों) को चलाने की ज़रूरत नहीं है.''

ये पहली बार नहीं है कि बकाया भुगतान को लेकर अदानी पावर और बांग्लादेश के बीच विवाद हुआ है. मई 2024 में त्रिपुरा स्टेट इलेक्ट्रिसिटी कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 100 करोड़ रुपये के बकाये के बाद बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड को बिजली सप्लाई रोक दी थी.

गौतम अदानी

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इमेज कैप्शन, गौतम अदानी जिनकी कंपनी अदानी पावर बांग्लादेश को बिजली सप्लाई कर रही है

इस साल अगस्त महीने में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना की सरकार के पतन के साथ ही वहां भारत के ख़िलाफ़ प्रदर्शन देखने को मिले थे.

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भारत शेख़ हसीना का समर्थन कर रहा है जो यहां अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को दबा कर शासन कर रही हैं. उन्होंने शेख हसीना पर बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया था.

शेख़ हसीना ने अपनी सरकार के पतन के बाद भारत में शरण ले ली थी.

लेकिन शेख़ हसीना की सरकार के पतन के बाद ही देश के कई इलाकों में हिंदुओं समेत दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले की ख़बरें आने लगीं.

भारत ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी और बांग्लादेश में हिंदू समेत दूसरे अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की मांग की थी.

दोनों देशों के बीच एक बार फिर तनाव देखने को मिला जब बांग्लादेश में इस्कॉन और सनातन जागरण मंच से जुड़े महंत चिन्यम कृष्ण दास को गिरफ़्तार कर लिया गया.

इस मामले पर भारत और बांग्लादेश के बीच बयानबाजी देखने को मिली. चिन्मय कृष्ण दास फिलहाल देशद्रोह के आरोप में बांग्लादेश की जेल में बंद हैं.

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