You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अरब अमेरिकी मुसलमान क्या ट्रंप को वोट करेंगे, ट्रंप ने मुस्लिम नेताओं से क्या कहा?
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को मिशिगन की चुनावी रैली में कई मुस्लिम नेताओं को आमंत्रित किया था.
ट्रंप ने इस रैली में कहा कि अरब अमेरिकी और मुस्लिम वोटर्स इसराइल और ग़ज़ा में अमेरिका की विदेश नीति को लेकर निराश हैं या ग़ुस्से में हैं.
ट्रंप ने मिशिगन में डियरबोर्न शहर से आधे घंटे की दूरी पर स्थित डोट्रॉइट सबअर्ब ऑफ नोवी में शनिवार को कहा था, ''यहाँ के अरब मुस्लिम मतदाता अमेरिकी चुनाव को एक तरफ़ से दूसरी तरफ़ कर सकते हैं.''
पिछले साल ही अमेरिका में डियरबोर्न अरब अमेरिकी मुस्लिम बहुल आबादी वाला शहर बना था. यहाँ की 55 फ़ीसदी आबादी मध्य-पूर्व या उत्तरी अफ़्रीका की है.
अमेरिका में मुस्लिमों की आबादी वहाँ की कुल आबादी के क़रीब 1.1 प्रतिशत है.
ट्रंप ने कहा कि इस रैली से पहले उन्होंने मिशिगन के मुस्लिम नेताओं से मुलाक़ात की थी.
ट्रंप के मंच पर भी ये मुस्लिम नेता थे और ट्रंप ने इनका मिशिगन के प्रमुख नेता के तौर पर ज़िक्र किया था. इन नेताओं में इमाम बेलाल अल्ज़ुहाइरी भी थे. अल्ज़ुहाइरी ने ट्रंप को शांति का समर्थक बताया.
अल्ज़ुहाइरी ने कहा, ''हमलोग मुस्लिम वोटर्स के रूप में ट्रंप के साथ हैं. ट्रंप ने शांति स्थापित करने का वादा किया है न कि युद्ध का. हम डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन करते हैं क्योंकि इन्होंने मध्य-पूर्व और यूक्रेन में जंग ख़त्म कराने का वादा किया है.''
ट्रंप से मुसलमानों को उम्मीद
ट्रंप गज़ा में इसराइल की जंग की आलोचना खुलकर नहीं करते हैं. बल्कि दबी ज़ुबान से लोगों से संबंधों को आधार पर बोलते हैं. ट्रंप इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू और वहाँ की सेना से युद्ध को जल्दी अंजाम तक पहुँचाने के लिए कह चुके हैं.
इसके अलावा ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को इसराइल को पर्याप्त समर्थन नहीं देने के लिए आड़े हाथों भी ले चुके हैं.
हालांकि बाइडन और कमला हैरिस प्रशासन ने इसराइल की आलोचना नहीं की और न ही हथियारों की आपूर्ति बंद की.
हमास ने पिछले साल सात अक्तूबर को इसराइल के भीतर हमला किया था और सैकड़ों लोगों की जान ले ली थी. साथ ही कइयों को अब तक बंधक बनाकर भी रखा है. इस हमले की पहली बरसी पर ट्रंप ने कंजर्वेटिव रेडियो होस्ट ह्यू हेविट को इंटरव्यू दिया था. इस इंटरव्यू में ट्रंप ने ग़ज़ा को रीयल एस्टेट के नज़रिए से देखा था. ग़ज़ा क़रीब 20 लाख फ़लस्तीनियों का घर है.
ट्रंप ने इस इंटरव्यू में कहा था, ''आप अगर एक डेवलपर के रूप में देखें तो यह काफ़ी सुंदर जगह हो सकती है. वो चाहे मौसम हो, पानी हो या फिर जलवायु के लिहाज़ से भी. यह बहुत ही सुंदर हो सकता है.''
ट्रंप जब 2017 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, तब उन्होंने पहले ही महीने में मुस्लिम बहुल देश इराक़, सीरिया, ईरान, लीबिया, सोमालिया, सूडान और यमन के लोगों के अमेरिका आने पर पाबंदी लगा दी थी.
ट्रंप ने सीरियाई शरणार्थियों के आने पर भी अनिश्चितकालीन पाबंदी लगा दी थी और बाक़ी सभी शरणार्थियों के आने पर चार महीने की पाबंदी लगा दी थी. जब बाइडन 2021 में सत्ता में आए तब उन्होंने पाबंदी हटाई थी.
मुसलमानों की बाइडन से नाराज़गी
इसराइल को अमेरिका से मिल रही सैन्य मदद को लेकर अरब अमेरिकी और मुस्लिम मतदाताओं में नाराज़गी है. ट्रंप इस नाराज़गी को अपने पक्ष में करना चाहते हैं.
कहा जा रहा है कि अरब अमेरिकी और मुस्लिम मतदाताओं में बाइडन के साथ कमला हैरिस को लेकर भी निराशा है. कहा जा रहा है कि जो मतदाता युद्ध तत्काल बंद करना चाहते हैं वो ट्रंप के साथ आ सकते हैं. वहीं इसराइल समर्थकों को लगता है कि बाइडन प्रशासन इसराइल की मदद ठीक से नहीं कर रहा है.
ट्रंप न केवल अरब अमेरिकी और मुस्लिम वोटरों को लुभा रहे हैं, बल्कि यहूदियों को भी चेतावनी दे रहे हैं कि अगर वह (ट्रंप) नवंबर में हार गए तो उन्हें इसकी भारी क़ीमत चुकानी होगी.
इसी साल सितंबर में एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा था, ''यहूदी कमला हैरिस को वोट क्यों देंगे? अगर नवंबर में मेरी हार होती है तो यहूदियों को इसकी भारी क़ीमत चुकानी होगी.''
कमला हैरिस ग़ज़ा में युद्धविराम की वकालत करती रही हैं और वह फ़लस्तीनियों के लिए एक अलग देश का समर्थन करती हैं.
कमला हैरिस फ़लस्तीन समर्थकों और युद्ध विरोधी कार्यकर्ताओं के निशाने पर रही हैं. कमला हैरिस से यह पूछा जा रहा है कि मध्य-पूर्व में इसराइल को लेकर बाइडन प्रशासन की जो नीतियां हैं, उनसे उनकी नीति कैसे अलग होगी?
ट्रंप ने मिशिगन की रैली में कहा, ''मिशिगन के साथ पूरे देश के मुस्लिम और अरब मतदाता मध्य-पूर्व में जारी अंतहीन युद्ध को ख़त्म होते देखना चाहते हैं. सभी चाहते हैं कि शांति और स्थिरता लौटे.''
ट्रंप वादा कर रहे हैं कि वह सत्ता में आएंगे तो युद्ध बंद करवा देंगे. उनके इस वादे के पक्ष में यह भी कहा जा रहा है कि ट्रंप जब तक राष्ट्रपति रहे तब कोई नया युद्ध नहीं होने दिया. ट्रंप अरब मुस्लिम मतदाताओं के सामने ख़ुद को अच्छे विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं.
ट्रंप कुछ मुस्लिम देशों पर फिर लगाएंगे बैन
ट्रंप ने पिछले हफ़्ते ही उन मुसलमानों से सवाल किया था जो कमला हैरिस का समर्थन कर रहे हैं. ट्रंप ने पूर्व अमेरिकी सांसद लिज़ चेनी की ओर से कमला हैरिस को समर्थन देने पर सवाल उठाते हुए कहा था, ''कमला हैरिस मुस्लिमों से नफ़रत करने वाली लिज़ चेनी को गले लगा रही हैं. किसके पिता ने मध्य-पूर्व पर वर्षों के युद्ध और मौत को थोपा था?''
लिज़ चेनी अमेरिका के पूर्व उपराष्ट्रपति डिक चेनी की बेटी हैं. 2003 में इराक़ पर जब अमेरिका ने हमला किया था तब भी वह उपराष्ट्रपति थे और डिक चेनी ने इराक़ पर हमले का समर्थन किया था.
ट्रंप भले मुसलमानों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद भी वह कुछ मुस्लिम बहुल देशों के नागरिकों के अमेरिका आने पर पाबंदी लगाने की बात दोहरा रहे हैं.
ट्रंप ने पिछले साल 28 अक्तूबर को रिपब्लिकन यहूदी समिट को संबोधित करते हुए कहा था, ''आपको ट्रैवल बैन याद है? दोबारा सत्ता में आते ही ट्रैवल बैन फिर से लागू करूंगा. हमारे पास ट्रैवल बैन इसलिए है क्योंकि हम उन देशों के नागरिकों को नहीं चाहते हैं जो हमारे देश को नष्ट करना चाहते हैं.''
ट्रंप ने कहा था, ''हमारे चार साल के शासनकाल में एक भी ऐसी घटना नहीं हुई क्योंकि हमने वैसे लोगों को देश में आने ही नहीं दिया.''
ट्रंप ख़ुद को अक्सर युद्ध विरोधी राष्ट्रपति के रूप में पेश करते हैं. ट्रंप कहते हैं कि उनके कार्यकाल में अमेरिका किसी भी अतिरिक्त युद्ध में नहीं शामिल हुआ. ट्रंप ने मध्य-पूर्व से कुछ अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाया तो अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध के अंत की घोषणा की.
मार्च 2019 में ट्रंप ने इस्लामिक स्टेट को हराने की घोषणा की थी और इसी साल अक्तूबर में अमेरिकी सेना ने आईएस के नेता अबु बक्र अल-बग़दादी को मार दिया था. इसके अलावा तीन जनवरी 2020 को ट्रंप की सरकार में ही अमेरिका ने इराक़ में ईरान के सीनियर जनरल क़ासिम सुलेमानी को मार दिया था.
ऐसा लग रहा था कि ईरान से अमेरिका उलझ सकता है, लेकिन शांति रही. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप को नया युद्ध शुरू नहीं करने का श्रेय दिया जा सकता है लेकिन वह उन इलाक़ों में हथियार बेचने की डील भी करते रहे, जहाँ यु्द्ध की आशंका सबसे ज़्यादा रहती है.
ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के बाद पहला विदेशी दौरा सऊदी अरब का किया था. सऊदी अरब तब यमन में हूती विद्रोहियों से जंग लड़ रहा था. इसी दौरे में ट्रंप ने सऊदी अरब से 110 अरब डॉलर की हथियार डील की थी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित