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पीरियड्स न आने या देरी से आने के ये हो सकते हैं आठ कारण
पीरियड्स के न आने या ग़ायब हो जाने की स्थिति को एमेनोरिया कहा जाता है. एमेनोरिया के कई कारण हो सकते हैं.
पीरियड्स नहीं आने का एक कारण गर्भावस्था हो सकता है लेकिन इसके अलावा भी इसकी कई वजहें हो सकती हैं.
आमतौर पर प्रजनन आयु की महिलाओं में माहवारी सामान्य तौर पर 28 दिनों में आती है. हालांकि ये आम है कि इससे कुछ दिन पहले या कुछ दिन बाद भी माहवारी शुरू हो सकती है.
कभी-कभार पीरियड्स न आना गंभीर समस्या नहीं माना जाता, लेकिन विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर यह बार-बार हो रहा हो तो यह किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है.
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स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमीरा अल्कोर्डिन मार्टिनेज़ ने बीबीसी से कहा, "आपको खुद को और अपने शरीर को समझना होगा, ताकि आपको पता चल सके कि क्या ऐसा है जो सही नहीं है. हर महिला का शरीर पूरी तरह से अलग तरीके से काम करता है. कोई भी दो महिला एक जैसी नहीं होती हैं."
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस का कहना है, "यदि कोई महिला गर्भवती नहीं हैं और उन्हें लगातार तीन महीने पीरियड नहीं आया है या 45 साल की उम्र से पहले पीरियड आना बंद हो गया हो तो उन्हें डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए."
अमेरिका की मेयो क्लीनिक भी उन लड़कियों के लिए स्वास्थ्य जांच की सलाह देती है, जिन्हें 15 साल की उम्र होने तक भी पीरियड आने की शुरुआत नहीं हुई है.
इन दोनों ही संस्थानों के अनुसार, गर्भावस्था को छोड़कर एमेनोरिया के आठ कारण हो सकते हैं.
1. तनाव
डॉक्टर अमीरा कहती हैं, "तनाव सबसे अहम वजह हो सकता है. तनाव हमारे समय में एक महामारी की तरह है."
तनाव से हमारे शरीर में एड्रेनलिन जैसे हार्मोन तेज़ी से बढ़ जाते हैं, जिससे वह किसी भी संभावित ख़तरे से बचाने के लिए शरीर को सतर्क अवस्था में ले आता है.
इन हार्मोन्स के लंबे समय तक प्रभाव में रहने की वजह से पीरियड्स साइकल प्रभावित हो सकता है. कभी-कभी पीरियड्स नहीं आता या पीरियड्स के दौरान दर्द ज़्यादा हो सकता है.
वहीं कुछ मामलों में, तनाव के कारण महिलाओं को एक पीरियड्स साइकिल (चार सप्ताह का चक्र) में दो बार भी पीरियड आ सकते हैं.
अगर पीरियड के न आने की वजह तनाव है तो एनएचएस इसके उपाय के तौर पर नियमित एक्सरसाइज़ करने या सांस संबंधी प्रैक्टिस की सलाह देती है. अगर ये तरीके कारगर न हों तो कॉग्निटिव बिहेवरियल थेरेपिज़ (सीबीटी) तनाव और घबराहट से लड़ने में मदद कर सकती हैं.
2. अचानक वजन कम होना
अगर शरीर में कैलोरी की मात्रा अत्यधिक कम कर दी जाए तो शरीर में ओव्यूलेशन (अंडाशय से अंडा निकलने की प्रक्रिया) के लिए आवश्यक हार्मोन का उत्पादन रुक सकता है.
एक रजिस्टर्ड न्यूट्रिशनिस्ट (आहार विज्ञानी) इससे प्रभावित लड़कियों और महिलाओं की वजन बढ़ाने में मदद कर सकता है.
वहीं अगर वजन कम होने की वजह, खाने के डिसऑर्डर से जुड़ा है तो इसमें मनोचिकित्सक की मदद लेनी चाहिए.
3. वजन ज़्यादा होना या मोटापा
वजन ज़्यादा होने से शरीर में अत्यधिक इस्ट्रोजन रिलीज़ होता है. ये उन हार्मोन में से एक है जो महिलाओं के रिप्रोडक्शन सिस्टम को नियंत्रित करते हैं.
इस्ट्रोजन के स्तर में किसी तरह की बढ़ोतरी मासिक धर्म की नियमितता को प्रभावित कर सकती है और कुछ मामलों में पीरियड्स पूरी तरह बंद भी हो सकते हैं.
जो महिलाएं एमेनोरिया का अनुभव कर रही हैं और जिनका वजन अधिक है या बॉडी मास इंडेक्स 30 से ऊपर है, उन्हें डॉक्टर अक्सर आहार विज्ञानी (न्यूट्रिशनिस्ट) से सलाह लेने को कहते हैं ताकि वे हेल्दी वज़न हासिल कर पाएं.
4. अत्यधिक शारीरिक व्यायाम
ज़रूरत से ज़्यादा शारीरिक व्यायाम के बाद उपजे फ़िजिकल स्ट्रेस से भी वैसे हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं जो पीरियड्स को नियंत्रित करते हैं.बहुत ही ज़्यादा बॉडी फ़ैट (वसा) भी ओव्यूलेशन को रोक सकता है.
पेशेवर खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स मेडिसिन स्पेशलिस्ट उन्हें ये बता सकते हैं कि वो किस स्तर के एक्सरासाइज़ से इसे सही कर पाएंगे.
5. पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
ओवरी (वो जगह जहां अंडाणु बनते हैं) के भीतर बड़ी संख्या में अंडाणु के विकास के लिए थैलीनुमा संरचनाएं यानी फॉलिकल्स होते हैं.
आम तौर पर ओवरी में अंडाणु विकसित होते हैं और उनमें से एक फर्टिलाइज़ेशन के लिए तैयार होता है.
लेकिन पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) की स्थिति में ओवरी में एक साथ कई फॉलिकल्स बन जाते हैं, जो विकसित अंडाणु नहीं दे पाते.
इस स्थिति से ग्रस्त महिलाओं में ये थैलियां अक्सर अंडाणु (एग) को बाहर नहीं निकाल पातीं, जिससे ओव्यूलेशन (अंडा रिलीज़ होना) नहीं हो पाता.
ब्रिटेन में एनएचएस का अनुमान है कि हर दस में से एक महिला पीसीओएस से प्रभावित होती हैं. माहवारी न आने के मामलों में लगभग 33 फ़ीसदी ये ही कारण होता है.
पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, ओवरीज़ के सामान्य कामकाज को प्रभावित करता है और ओव्यूलेशन को रोक सकता है.
6. मेनोपॉज़ और प्रीमेच्योर मेनोपॉज़
गर्भावस्था और ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) की तरह मेनोपॉज़ भी पीरियड्स के न आने के कारणों में से एक है.
जब महिलाएं मेनोपॉज़ फेज़ से गुज़र रही होती है तो उनके शरीर में इस्ट्रोजन का स्तर घटने लगता है और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया अनियमित हो जाती है.
मेनोपॉज़ महिलाओं को आमतौर पर 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है.
हालांकि, कई मेडिकल स्टडी में सामने आया है कि हर सौ में से एक महिला को 40 साल की उम्र से पहले मेनोपॉज़ हो जाता है. इस स्थिति को प्रीमेच्योर मेनोपॉज़ कहा जाता है.
7. कॉन्ट्रासेप्टिव यानी गर्भनिरोधक
कुछ गर्भनिरोधक गोलियां, इंजेक्शन, इम्प्लांट्स और गर्भाशय में लगाए जाने वाले उपकरण भी एमेनोरिया का कारण बन सकते हैं.
यहाँ तक कि जब आप ओरल कॉन्ट्रासेप्टिव लेना बंद कर देते हैं तो शरीर को फिर से नियमित रूप से ओव्यूलेशन शुरू करने में कुछ समय लग सकता है.
8. अन्य समस्याएं और दवाइयां
मासिक धर्म न आने का कारण डायबिटीज़ या हार्मोनल डिसऑर्डर जैसे कि हाइपरथायरायडिज्म या हाइपोथायरायडिज्म भी बंद हो सकता है.
मेयो क्लिनिक के अनुसार, एमेनोरिया का कारण कुछ दवाइयां भी हो सकती हैं. जैसे कि एंटीसाइकोटिक्स, कीमोथेरेपी, एंटीडिप्रेसेंट और हाई ब्लड प्रेशर और एलर्जी के इलाज के लिए दी जाने वाली दवाइयां.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित
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