पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में आम लोगों पर किसने बरसाए बम और सेना पर क्यों उठे सवाल?

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह

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इमेज कैप्शन, जुलाई महीने में ही तीराह घाटी में एक घर पर मोर्टार शेल गिरने से एक बच्ची की मौत हुई थी, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए थे
    • Author, अज़ीज़ुल्लाह ख़ान और ज़ुबैर ख़ान
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की तीराह घाटी में रविवार रात को हुई घटना में कुल 23 आम लोग मारे गए. इस घटना को लेकर मीडिया में हवाई बमबारी की चर्चा है.

मगर पाकिस्तानी सेना की ओर से अब तक इस इलाके में किसी तरह की कार्रवाई के बारे में कोई बयान सामने नहीं आया है.

इस बीच ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने आम नागरिकों की मौत की घटना की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं 'अस्वीकार्य और दुखद' हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि 'सेना प्रांत में जो अभियान चला रही है, वह संविधान के तहत उसका अधिकार है.'

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया कि इस हमले में मारे गए 23 लोगों में से सात महिलाएं और चार बच्चे भी शामिल हैं.

बीबीसी ने पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (आईएसपीआर), ख़ैबर ज़िले के डिप्टी कमिश्नर व डीपीओ (डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफ़िसर) और राज्य सरकार के प्रवक्ता बैरिस्टर सैफ़ से संपर्क करने की कोशिश की और उन्हें इस घटना से जुड़े सवाल भेजे लेकिन इन सभी संबंधित अधिकारियों की ओर से कोई जवाब नहीं मिल सका.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर ने मरने वाले नागरिकों के परिवार वालों को एक-एक करोड़ रुपए देने का एलान किया है.

सेना की भूमिका पर सवाल

मीडिया रिपोर्टों में इसे सेना की कार्रवाई बताया जा रहा है लेकिन सेना की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है

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इमेज कैप्शन, मीडिया रिपोर्टों में इसे सेना की कार्रवाई बताया जा रहा है लेकिन सेना की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है (सांकेतिक तस्वीर)

इधर पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी रविवार की रात तीराह में कथित हवाई बमबारी के बाद बच्चों समेत कई नागरिकों के मारे जाने की सूचना पर दुख प्रकट करते हुए इसकी तुरंत और निष्पक्ष जांच करवाने और ज़िम्मेदार लोगों को न्याय के कठघरे तक पहुंचाने की मांग की है.

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पेशावर हाई कोर्ट के बाहर मीडिया से ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री ने कहा, "आतंकवादी एक्शन कर रहे हैं और हमारी सेना भी आतंकवादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही है. लेकिन किसी भी तरह से नागरिकों की क्षति या उनकी हत्या हमें अस्वीकार्य है."

मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर इन अभियानों में कोई नागरिक मारा जाता है, तो हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए. लेकिन इस युद्ध में ऐसा बार-बार हो रहा है."

अली अमी गंडापुर ने कहा, "चरमपंथियों के ख़िलाफ़ ज़मीनी कार्रवाई के साथ-साथ मोर्टार शेल का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है और विमानों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. संविधान के तहत यह सेना का अधिकार है."

"हमारे पास इसे रोकने की शक्ति नहीं है, लेकिन इस युद्ध को कैसे लड़ा जाना चाहिए, इस पर हमारा रुख यह है कि बातचीत होनी चाहिए और जो कार्रवाई हो रही है, वह समस्या का समाधान नहीं है."

उन्होंने आगे ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए क्षेत्र के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, सभी राजनीतिक दलों के नेताओं और मुशरान के इलाक़े के जिरगे की मुलाकात सेना के उच्च अधिकारियों के साथ कराने का फ़ैसला किया.

इससे पहले, ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के कई इलाक़ों जैसे टांक, तीराह घाटी और बाजौड़ में हाल के दिनों में जहां शांति भंग की घटनाएं बढ़ी हैं, वहीं सुरक्षा बलों की टारगेटेड कार्रवाइयों के दौरान आम लोगों की कथित मौतों पर स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किए हैं.

पिछले कुछ महीनों के दौरान ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में आम नागरिकों की मौत की ऐसे दो घटनाएं हो चुकी हैं. जुलाई में तीराह में ही एक मकान पर मोर्टार गोला गिरने से एक बच्ची की मौत हुई थी. इसके बाद होने वाले विरोध प्रदर्शन पर फ़ायरिंग में पांच लोग मारे गए थे.

इसके अलावा जुलाई में ही बाजौड़ में सैन्य कार्रवाइयों के दौरान तीन नागरिकों की मौत हुई थी.

उस समय भी ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री सरदार अली अमीन गंडापुर ने कहा था कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ ऑपरेशन में आम नागरिकों की मौत का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और सेना और जनता के बीच भरोसा कम हो रहा है.

स्थानीय लोगों का क्या कहना है?

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मानवाधिकार आयोग के अनुसार तीराह की घाटी में हुई इस घटना में कथित तौर पर दो घरों को निशाना बनाया गया है और मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.

अपने बयान में मानवाधिकार आयोग का कहना था कि राज्य संवैधानिक तौर पर नागरिकों के जीवन के सभी अधिकारों की सुरक्षा करने का पाबंद है जिसे निभाने में वह बार-बार नाकाम रहा है.

बीबीसी ने कुछ स्थानीय लोगों और राजनीतिक नेताओं से बात की जिसमें हमले के बारे में विरोधाभासी बातें सामने आई हैं.

मोहम्मद इसहाक़ का संबंध तीराह की घाटी से है और वह राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता हैं. इसहाक़ का दावा है कि जिस स्थान पर यह घटना हुई है वहां से उनका घर लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर है.

उन्होंने बताया, "रात के तीन-साढ़े तीन बजे हमने और दूसरे लोगों ने जहाज़ों की तेज़ आवाज़ सुनी. इसके बाद तीन धमाके हुए."

उन्होंने कहा कि चूंकि उनके इलाक़े में मोबाइल फ़ोन सिग्नल्स नहीं होते और सही समय पर संपर्क नहीं हो पाता, "इसलिए रात के समय यह पता नहीं चल सका कि धमाके कहां और किस तरह के हुए हैं."

उन्होंने बताया कि सुबह की अज़ान और नमाज़ के बाद "स्थानीय मस्जिदों से एलान होना शुरू हो गया और बताया गया कि बहुत से बच्चे और महिलाएं मलबे के नीचे दबे हुए हैं जिन्हें निकालने के लिए मदद की ज़रूरत है. यही एलान सुनकर मैं घटनास्थल पर पहुंचा जहां पहले ही काफ़ी लोग मौजूद थे."

इसहाक़ ने कहा कि उन्होंने देखा कि वॉलंटियर्स दबे हुए लोगों को निकाल रहे थे. "स्थानीय वॉलंटियर्स ने एक घर से उन्नीस लाशें निकालीं. इनमें बच्चे, औरतें भी शामिल थीं. इस घर से सटे एक और घर के मलबे से दो लाशें निकाली गईं."

मलिक अताउल्लाह ख़ान आवामी इंक़लाबी लीग के प्रमुख हैं और उनका संबंध तहसील बाड़ा से है. तीराह घाटी बाड़ा तहसील का ही हिस्सा है. वह बताते हैं, "हमने इस घटना के बाद सोमवार की सुबह बाड़ा में विरोध प्रदर्शन शुरू किया और जब जनाज़ों के निकलने का एलान हुआ तो तीराह चले गए. वहां कुछ स्थानीय नेताओं ने यह राय दी कि लाशों को पेशावर ले जाया जाए मगर उनके घरवालों का कहना था कि वह लाशों की बेहुरमती (अनादर) नहीं चाहते हैं."

बाड़ा तहसील के चेयरमैन कफ़ील ने बताया कि उन्होंने दूसरे क़बायली नेताओं और प्रतिनिधियों के साथ इलाक़े का दौरा किया है और मरने वालों की नमाज़-ए-जनाज़ा में शामिल हुए हैं.

उन्होंने कहा कि उन्होंने ख़ुद उस जगह का दौरा किया जहां मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं.

नेताओं की प्रतिक्रिया और जांच की मांग

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इमेज कैप्शन, ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में पाकिस्तानी सेना चरमपंथियों के ख़िलाफ़ अभियान में ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रही है

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह असेंबली के स्पीकर सलीम स्वाति ने भी इस घटना पर अफ़सोस जताते हुए केंद्र व राज्य सरकार से मांग की है कि इस घटना की पारदर्शी और तत्काल जांच कराई जाए. उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए ज़िम्मेदारी तय की जाए और प्रभावित परिवारों को तुरंत राहत और मुआवज़ा दिया जाए.

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म 'एक्स' पर अपने संदेश में उनका कहना था कि यह दुखद घटना "हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम किस तरफ़ जा रहे हैं और इन सब का भविष्य में क्या असर होगा."

इस मामले पर ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह के मुख्यमंत्री के विशेष सहयोगी सोहैल आफ़रीदी ने पश्तो भाषा में आफ़रीदी समुदाय को संबोधित किया. उन्होंने कहा, "आफ़रीदी समुदाय अपने अधिकारों के लिए एकजुट हो जाए और शुक्रवार के दिन 'अवामी पासोन' (जन आंदोलन) आयोजित होगा. इसमें सभी क़बायल और नेता शामिल होंगे."

इसके बारे में स्पीकर सलीम स्वाति ने कहा कि इस मामले पर विशेष कमेटी बना दी गई है.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित