नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ पर क्या कह रहे हैं वो कुली जो हैं घटना के चश्मदीद

शनिवार रात नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो चुकी है. इस घटना में क़रीब 20 लोग घायल भी हुए हैं, जिनमें पांच को गंभीर चोटें आई हैं.
प्रयागराज में चल रहे कुंभ मेले में बड़ी संख्या में देशभर से लोग स्नान करने के लिए पहुंच रहे हैं. इस दौरान रेलवे स्टेशनों से लेकर प्रयागराज और इसके आसपास की सड़कों पर भी लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है.
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन को राजधानी दिल्ली के सबसे बड़े और ख़ास स्टेशनों में गिना जाता है. इस स्टेशन पर पहले भी भगदड़ की घटना हो चुकी है, जिसकी वजह से त्योहारों के दौरान यहां ख़ास व्यवस्था देखी जाती है.
कुछ चश्मदीदों का कहना है कि शनिवार को कुंभ मेले के लिए रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी, लेकिन इस दौरान कोई विशेष व्यवस्था नहीं देखी गई. इसे लेकर लोगों के अपने आरोप हैं और रेल अधिकारियों की अपनी सफाई है. आइए जानते हैं कि हादसे के वक़्त स्टेशन पर मौजूद कुलियों ने क्या देखा.

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'प्लेटफॉर्म बदलने से हुआ हादसा'
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि शनिवार रात को इतनी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर जमा हो गए थे कि सांस लेने की जगह नहीं थी.
उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "हालात ऐसे थे कि कुंभ जाने वालों की भीड़ काफी अधिक थी. पुलिस ने काफी रोकथाम की लेकिन एकदूसरे से... लोग बिछ गए, नीचे दब गए."
"हमने खुद देखा, 14 और 15 नंबर प्लेटफॉर्म से खुद लाशों को उठा-उठाकर एंबुलेंस में भरा, उन्हें अस्पताल लेकर गए. बच्चे, महिलाएं आदमी, सब भीड़ में दब गए, घायल हो गए. सांस लेने की जगह नहीं मिली."
नई दिल्ली स्टेशन पर जहां यह भगदड़ हुई वह प्लेटफॉर्म अजमेरी गेट की तरफ है और इसी तरफ दिल्ली के कई मशहूर हॉस्पिटल भी मौजूद हैं.
हादसे का शिकार हुए लोगों को सबसे पहले स्टेशन के पास ही मौजूद लोक नायक जय प्रकाश हॉस्पिटल पहुंचाया गया.
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर कई साल से कुली का काम कर रहे एक अन्य व्यक्ति ने बताया, "मैं साल 1981 से कुली का काम कर रहा हूं, मैंने इतनी भीड़ कभी नहीं देखी."
उन्होंने कहा, "प्रयागराज स्पेशल ट्रेन 12 नंबर प्लेटफॉर्म से जाने वाली थी, लेकिन उसे 16 नंबर कर दिया. 12 नंबर प्लेटफॉर्म पर जो लोग थे वो 16 नंबर पर जाने लगे. वहां बाहर से भी लोग आने लगे थे, जिस कारण वहां काफी भीड़ हो गई थी."
"इसी कारण वहां भगदड़ मच गई, लोग सीढ़ियों पर एकदूसरे पर गिर गए और नीचे दब गए. कुलियों ने रास्ता रोककर लोगों की मदद की और लाशें उठाईं. 15 लाशें तो हमने उठाई थीं, आगे का हमें नहीं पता."
हालांकि रेल अधिकारी प्लेटफॉर्म बदलने के किसी मामले को स्वीकार नहीं कर रहे हैं. उनका कहना है कि प्लेटफॉर्म नंबर 12 जहां से कुंभ स्पेशल ट्रेन चलनी थी और प्लेटफॉर्म नंबर 14 जहां से प्रयागराज एक्सप्रेस चलनी थी, इन दोनों के बीच भागने में यात्री हादसे का शिकार हुए हैं.
'बच्ची सांस लेने लगी, तो हम खुश हुए'
नई दिल्ली स्टेशन पर मौजूद एक अन्य कुली मोहम्मद हाशिम ने हादसे के बारे में बताया कि "हम लोग स्टेशन के बाहर काम कर रहे थे, स्टेशन के भीतर से तेज़ आवाज़ें आने लगी."
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "हम लोग भागकर भीतर गए तो देखा कि लोग इधर-उधर भाग रहे थे. हमने कई बच्चों को देखा जो दबे हुए थे. हमने बच्चों को उठा-उठाकर बाहर निकाला. कई लोग बेहोश हो गए थे. "
एक बच्ची की घटना बताते हुए वो कहते हैं, "हमने चार साल की एक बच्ची को बाहर निकाला. उसकी मां ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी. बच्ची बेहोश थी. दो मिनट बाद उसकी सांस आ गई और वो रोने लगी. उसकी मां खुशी से रोने लगी. ये देखकर हम लोग भी खुश थे."
"महिलाएं और बच्चे भीड़ का सामना नहीं कर सकते थे, वो लोग नीचे दब गए थे, हम उन्हें निकाल-निकाल कर बाहर ला रहे थे. यहां क़रीब डेढ़ हज़ार कुली हैं, आधे उस वक्त यहां नहीं थे. जो सभी कुली यहां थे, उन्होंने लोगों की मदद की. हमने अपनी ज़िंदगी में इस तरह का मंज़र देखा."
"हमारे पास हाथ गाड़ी होती है, उसी में लोगों को लाद-लादकर हम बाहर लेकर आ रहे थे और एंबुलेंस तक पहुंचा रहे थे."
दरअसल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन देश के सबसे व्यस्ततम स्टेशनों में से एक है. यहां हर रोज़ औसतन तक़रीबन 5 लाख़ मुसाफिरों का दबाव होता है.
नई दिल्ली स्टेशन में मौजूद 16 प्लेटफॉर्म के लिहाज से बात करें तो हर रोज़ औसतन एक प्लेटफॉर्म पर क़रीब 30 हज़ार मुसाफ़िर पहुंचते हैं. लेकिन यह संख्या दिनभर यानी पूरे चौबीस घंटे के दौरान की है.
ऐसे में एक ही समय में कई प्लेटफॉर्म पर हज़ारों की भीड़ जमा हो तो, इसे संभालने के लिए ख़ास योजना की ज़रूरत होगी, जैसा कि आमतौर पर त्योहारों के दौरान स्टेशन पर देखने को मिलता है.
'पहले से तैयारी होनी चाहिए थी'
जीतेश मीणा नाम के एक और कुली ने बताया कि शनिवार रात सवा नौ बजे स्टेशन पर बड़ी भीड़ थी.
वो कहते हैं, "एक बच्ची की मौत हो गई थी. उसके पिता बच्ची को गोद में लेकर बाहर आए. उनकी पत्नी खो गई थी और उनके पैरों में चप्पल नहीं थे."
"उनके पास पैसे भी नहीं थी. वो बच्ची को अस्पताल ले जाएं, इसलिए हमने ऑटो करवा दिया और उन्हें भेज दिया. उस वक्त यहां एंबुलेंस नहीं थी."
"शनिवार रात यहां जबर्दस्त भीड़ थी, हमने अपनी ज़िंदगी में ऐसी भीड़ नहीं देखी थी."
कुली का काम करने वाले बुरहान ने बीबीसी हिंदी को बताया कि रेलवे ने छठ जैसी तैयारी की होती तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता.
आम तौर पर छठ जैसे त्योहार के दौरान स्टेशन परिसर में अलग से वेटिंग एरिया बनाकर, टैंट और अन्य सुविधाओं के साथ ही स्पेशल टिकट काउंटर खोले जाते हैं ताकि मुसाफ़िरों को भी सुविधा मिल सके और भीड़ को भी एक जगह इकट्ठा होने से रोका जा सके.
बुरहान ने बताया, "शनिवार को लापरवाही थी. 12 नंबर प्लेटफॉर्म से स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस जाती है जो प्रयागराज होती हुई जाती है. रात को 14 नंबर से मगध एक्सप्रेस जाती है और 16 नंबर से कुंभ स्पेशल ट्रेन जाती है. इन ट्रेनों में जाने कि लिए लोग खड़े थे."
"16 प्लेटफॉर्म पर ट्रेन आनी शुरू हुई तो भगदड़ शुरू हुई. स्थिति ख़राब हो गई, कुलियों ने मिलकर कई लोगों को वहां से बाहर निकाला."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित


















