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पाकिस्तान चुनाव: नवाज़ शरीफ़ और बिलावल भुट्टो की पार्टियों के बीच क्या गठबंधन मुमकिन है?
- Author, रोहान अहमद
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
पाकिस्तान के चुनाव में तहरीक-ए-इंसाफ़ के समर्थन वाले निर्दलीय प्रत्याशियों ने सबसे अधिक सीटें हासिल की हैं लेकिन दूसरे और तीसरे पायदान पर रहीं मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी सत्ता हासिल करने के लिए गठजोड़ बनाने को लेकर एक दूसरे से संपर्क कर रही हैं.
पाकिस्तान चुनाव आयोग के मुताबिक़, निर्दलीय उम्मीदवारों ने 101 सीटों पर जीत दर्ज की है और बीबीसी उर्दू के मुताबिक इनमें 93 सीटें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी यानी इमरान ख़ान समर्थित उम्मीदवारों की हैं.
दूसरे नंबर पर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के खाते में 75 सीटें आई हैं. तो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी 54 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर रही जबकि एमक्यूएम पाकिस्तान के खाते में 17 सीटें आई हैं.
अब जबकि किसी भी पार्टी के पास सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं है तो संभावित गठबंधन सरकार की रूपरेखा क्या होगी?
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) के नेता नवाज़ शरीफ़ ने आम चुनाव में जीत की घोषणा की है और अपने छोटे भाई शहबाज़ शरीफ़ से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, मुत्ताहिदा क़ौमी मूवमेंट पाकिस्तान, जमीयत उलेमा इस्लाम और अन्य दलों के साथ बात करने को कहा है.
पाकिस्तान के चुनाव नियम
दूसरी ओर, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ के चेयरमैन बैरिस्टर गौहर ख़ान ने नेशनल असेंबली में सर्वाधिक सीटें जीतने का दावा किया और घोषणा की कि उनकी पार्टी केंद्र, ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह और पंजाब में सरकार बनाएगी.
उधर, मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी दोनों पार्टियों ने कहा कि सरकार के गठन को लेकर दोनों दलों के बीच अब तक कोई औपचारिक बातचीत नहीं शुरू हुई है.
इन चुनावों से पहले चुनाव आयोग ने तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी की मान्यता ख़ारिज करते हुए उसके चुनाव चिह्न बैट को रद्द कर दिया था. लिहाजा चुनाव में इमरान ख़ान की पार्टी के सदस्य बतौर निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतरे थे.
पाकिस्तान के चुनाव नियमों के मुताबिक़, सभी चुने गए निर्दलीय प्रत्याशियों के पास नतीजे घोषित किए जाने के तीन दिनों के भीतर किसी पार्टी में शामिल होने का मौक़ा होता है, उसके बाद उनकी सदस्यता बतौर निर्दलीय ही बनी रहती है.
इसे देखते हुए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ने संकेत दिया है कि जीतने वाले इसके सभी निर्दलीय प्रत्याशी विधानसभाओं में एक छोटी पार्टी में शामिल हो सकते हैं और सरकार बनाने की पेशकश कर सकते हैं.
संभावित गठबंधन सरकार की रूपरेखा क्या होगी?
साल 2022 में इमरान ख़ान के नेतृत्व वाली तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी की सरकार के गिरने के बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम और अन्य पार्टियां क़रीब डेढ़ साल तक पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के तौर पर एक साथ सरकार में रही हैं.
हालांकि अब तक इनमें से किसी भी दल ने पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ मिलकर सरकार बनाने का एलान नहीं किया है.
चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़), पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम और मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान ने दूसरे की आलोचना करते भी देखे गए थे.
हालांकि, अब जबकि किसी भी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, पाकिस्तान में अगली सरकार गठबंधन की ही बन सकती है, ऐसे में इसकी संभावित रूपरेखा क्या हो सकती है?
आसिफ़ अली ज़रदारी और शहबाज़ शरीफ़ के बीच लाहौर में बैठक के सवाल पर पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने कहा कि सरकार के गठन को लेकर किसी भी राजनीतिक दल के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के साथ भी नहीं.
राजनीतिक सहमति
बिलावल भुट्टो ज़रदारी ने शनिवार को निजी चैनल जियो न्यूज़ से हुई बातचीत में कहा, "पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने अभी तक पीएमल (नवाज़), पीटीआई या किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ कोई औपचारिक बातचीत नहीं की है."
इस बातचीत में उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी सभी नतीजों की घोषणा होने का इंतज़ार कर रही है. इस चुनाव से पहले पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने बिलावल भुट्टो ज़रदारी को पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था.
इस बारे में उन्होंने कहा, "अगर हमें यह फ़ैसला बदलना पड़ा तो हम एक बार फिर पार्टी की केंद्रीय कार्यसमिति की बैठक बुलाएंगे और सर्वसम्मति से इस पर निर्णय लेंगे."
बिलावल भुट्टो ने कहा कि वो चाहते हैं कि इसे लेकर देश में राजनीतिक सहमति बने क्योंकि उनके मुताबिक़ सर्वसम्मति के बग़ैर कोई भी सरकार अपना काम नहीं पर सकेगी. साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ निर्दलीय निश्चित रूप से हमारे संपर्क में हैं.
सरकार गठन को लेकर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की प्रवक्ता मरियम औरंगज़ेब मीडिया से कहा कि "पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और चर्चा का शुरुआती दौर चल रहा है."
नई सरकार 'पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट' से कितनी अलग होगी?
सरकार गठन को लेकर अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है. ऐसे में चर्चाएं ये भी चल रही हैं कि चुनाव प्रचार के दौरान एक दूसरे पर हमलावर रहीं इन पार्टियों ने अगर एक बार फिर गठबंधन बनाकर सरकार का गठन किया तो यह पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के पिछले कार्यकाल से कितना अलग होगा?
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट के नेता हैदर अब्बास रिज़वी ने सरकार गठन के मसले पर बीबीसी उर्दू से कहा, "बीती रात शहबाज़ शरीफ़ का फ़ोन मक़बूल सिद्दिकी के भाई के पास आया और उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है."
क्या पीएमएल (नवाज़) सरकार में शामिल होगी के सवाल पर हैदर अब्बास रिज़वी ने कहा, "पहले तो यह तय होना चाहिए कि पीएमएल (नवाज़) वाकई सरकार बनाने जा रही है या नहीं?"
उन्होंने कहा, "उनके लिए कुछ भी कहना बहुत जल्दबाज़ी होगी क्योंकि निर्दलीय प्रत्याशियों को भी देखना होगा कि वे क्या निर्णय लेते हैं, तो अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. दिल्ली अभी दूर है."
पाकिस्तान की राजनीति पर नज़र रखने वाले जानकारों का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ से बात किए बग़ैर कोई भी सरकार सफल हो पाएगी.
लाहौर स्थित पत्रकार और विश्लेषक अजमल जामी ने बीबीसी उर्दू से कहा कि नवाज़ शरीफ़ के भाषण के बाद लगता है कि पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट 2.0 का गठन तो होगा लेकिन अहम सवाल ये है कि क्या पीडीएम की सरकार सफल हो पाएगी?
"उनके सामने सबसे अहम चुनौती इस वक़्त देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाना होगा. लेकिन क्या ये गठबंधन की सरकार ऐसा कर पाएगी, तो मुझे लगता है कि ऐसा करना उनके लिए संभव नहीं होगा."
उनके मुताबिक, इमरान ख़ान की पार्टी के समर्थन वाले निर्दलीय प्रत्याशी ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं और पीडीएम की गठबंधन सरकार के लिए यह मुश्किल चुनौती होगी.
अजमल जामी ने कहा, "पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में सरकार का गठन करेगी और अन्य प्रांतों के जाने माने चेहरे वहां शाही मेहमान के तौर पर होंगे. ऐसा लगता है कि इस वक़्त देश में दो सरकारें चल रही हैं."
'अब गेंद आसिफ़ अली ज़रदारी के पाले में है'
अजमल जामी का मानना है कि पूर्व राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी नई सरकार के गठन में अहम किरदार में होंगे.
वे कहते हैं, "तो अब गेंद आसिफ़ ज़रदारी के कोर्ट में है. सवाल ये है कि क्या वे अपने बेटे के लिए प्रधानमंत्री का पद मांगेंगे? मुझे बताया गया है कि ऐसा हो सकता है."
अजमल जामी के मुताबिक़, "इस वक़्त सरकार गठन के कई फ़ॉर्मूला सामने आ रहे हैं, इनमें से एक ये भी है कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) साथ आ कर ढाई-ढाई साल के लिए शासन करें."
वे कहते हैं, "एक फ़ॉर्मूला ये भी है कि बिलावल भुट्टो ज़रदारी प्रधानमंत्री बनाए जाएंगे और शहबाज़ शरीफ़ या मरियम नवाज़ को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा."
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ को लेकर वे कहते हैं, "राजनीतिक दलों के नेताओं को इमरान ख़ान से भी बात करनी होगी देश हित को ध्यान में रखते हुए अन्य लोगों से भी बात करना ज़रूरी है."
क्या पीडीएम सरकार देश में राजनीतिक स्थिरता ला पाएगी?
पंजाब की राजनीति पर पैनी नज़र रखने वाले राजनीतिक विश्लेषक सलमाम ग़नी कहते हैं, "मेरे विचार से चाहे पीडीएम की सरकार ही देश की सत्ता में क्यों न आए राजनीतिक स्थिरता नहीं आएगी."
वे बीबीसी से कहते हैं, "बैरिस्टर गौहर ने चुनाव की समीक्षा करने वाले अधिकारियों के दफ़्तरों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है और यह उनकी नहीं बल्कि पार्टी की राय है."
वे सवाल करते हैं कि "क्या इसे राजनीतिक स्थिरता का संकेत कहा जा सकता है?" फिर वे बोलते हैं, "यह मेरी पत्रकारिता का नज़रिया है कि जल्द ही फिर से चुनाव होंगे."
पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के बीच बातचीत पर सलमान ग़नी कहते हैं, "मेरी जानकारी के मुताबिक़ दोनों दलों के बीच समझौता हो गया है, लेकिन शहबाज़ शरीफ़ ने कहा है कि वे इस पर नवाज़ शरीफ़ से चर्चा करेंगे. वे इसकी मंजूरी लेंगे."
वे कहते हैं, "ये भी हो सकता है कि शहबाज़ शरीफ़ फिर से प्रधानमंत्री बन जाएं और आसिफ़ अली ज़रदारी भी एक बार और राष्ट्रपति के पद पर बैठें."
"या शायद नवाज़ शरीफ़ राष्ट्रपति बनें और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी से कोई पीएम बने."
विश्लेषकों की राय में शहबाज़ शरीफ़ के प्रधानमंत्री बनने के आसार अधिक हैं.
शहबाज़ शरीफ़ ने पहले भी कहा था कि अगर उनकी पार्टी को बहुमत मिलता है तो प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ बनेंगे.
डॉन न्यूज़ से जुड़ी पत्रकार और विश्लेषक आरिफ़ा नूर कहती हैं, "शहबाज़ शरीफ़ ने ख़ुद कहा था कि अगर गठबंधन की सरकार बनती है तो पीएम के प्रत्याशी पर फ़ैसला आपसी सलाह से किया जाएगा."
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के गठबंधन पर आरिफ़ा नूर कहती हैं, "लगता है कि वे एक साथ अपने आप नहीं बल्कि किसी की गुज़ारिश पर आ रहे हैं."
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