पाकिस्तान: इमरान ख़ान समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों के पास क्या विकल्प हैं?

    • Author, सहर बलोच
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू

पाकिस्तान चुनाव आयोग से मिल रहे शुरुआती रूझानों के अनुसार आम चुनावों में बड़ी संख्या में स्वतंत्र उम्मीदवार जीत रहे हैं. इनमें से ज़्यादातर को इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ का समर्थन हासिल है.

अब तक, लगभग 60 स्वतंत्र उम्मीदवारों ने नेशनल असेंबली (पाकिस्तानी संसद) की सीटें जीती हैं. इनमें तहरीक-ए-इंसाफ के अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली ख़ान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष लतीफ खोसा, पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर असद कैसर और पार्टी सदस्य अली अमीन गंडापुर शामिल हैं.

इसके अलावा तहरीक-ए-इंसाफ़ के समर्थन वाले स्वतंत्र उम्मीदवारों को ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह की विधानसभा में बड़ा बहुमत हासिल होता दिख रहा है.

पंजाब विधानसभा में भी स्वतंत्र प्रत्याशियों ने नवाज़ शरीफ़ की मुस्लिम लीग को अच्छी टक्कर देते हुए अब तक पचास से अधिक सीटें जीती हैं.

यहां यह उल्लेख भी ज़रूरी है कि चुनाव आयोग ने इमरान ख़ान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ़ में पार्टी के भीतर चुनावों को रद्द करते हुए उनका चुनावी सिंबल 'बल्ला' वापिस ले लिया था.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फ़ैसले को सही ठहराया था. यही वजह है कि पीटीआई के उम्मीदवार पार्टी के सिंबल पर न लड़कर, स्वतंत्र तौर पर चुनाव में लड़े हैं.

पीटीआई समर्थित स्वतंत्र उम्मीदवारों के पास क्या हैं विकल्प

चुनाव कानूनों का हवाला देते हुए विश्लेषकों का कहना है कि स्वतंत्र उम्मीदवारों को कानूनी तौर पर राजनीतिक दलों में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है. यानी वे चाहें तो राष्ट्रीय या प्रांतीय विधानसभा में स्वतंत्र क्षमता में रह सकते हैं.

हालाँकि उनसे अक्सर विभिन्न कारणों से किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की उम्मीद की जाती है.

राजनीतिक विश्लेषक रफीउल्लाह काकड़ के अनुसार, किसी राजनीतिक दल में शामिल होने के पीछे एक स्वतंत्र उम्मीदवार का उद्देश्य अपना राजनीतिक करियर बनाना, खुद को किसी राजनीतिक विचारधारा से जोड़ना या संसद में अधिक सक्रिय भूमिका निभाना हो सकता है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि जीतने के बाद इन उम्मीदवारों के पास तीन दिन का समय होगा, जिस दौरान उन्हें एक राजनीतिक पार्टी में शामिल होना होगा.

उनका कहना है कि चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक़, निर्दलीय उम्मीदवार केवल उसी पार्टी में शामिल हो सकते हैं जिसका चुनाव चिह्न उन्हें मतपत्र में दिया गया है.

रफ़ीउल्लाह काकड़ कहते हैं, "पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ अब सक्रिय नहीं है, इसलिए इन स्वतंत्र उम्मीदवारों के लिए यह तय करना एक बड़ी चुनौती होगी कि वे किस पार्टी में शामिल हों."

चुनाव से पहले तहरीक-ए-इंसाफ़ के नेताओं की ओर से संकेत दिया गया था कि वे किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल हो सकते हैं.

पाकिस्तान चुनाव आयोग ने कई घंटों की देरी के बाद देश में आम चुनाव के नतीजों की घोषणा शुरू की.

अब तक आए अनौपचारिक नतीजों के मुताबिक, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में, मुस्लिम लीग-एन पंजाब में आगे चल रही है, जबकि पाकिस्तान पीपल्स पार्टी सिंध में आगे है.

ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह में स्वतंत्र उम्मीदवारों की आश्चर्यजनक सफलता के बाद उन्हें दो प्रमुख दलों से शामिल होने के प्रस्ताव मिल रहे हैं.

बिलावल भुट्टो जरदारी ने इन प्रत्याशियों को पीपुल्स पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन ने भी कहा कि उन्हें स्वतंत्र उम्मीदवारों को अपनी पार्टी में शामिल करने में कोई दिक्कत नहीं है.

इस मुद्दे पर रफीउल्लाह काकड़ ने कहा कि दो चीजें हो सकती हैं.

वे कहते हैं, "इन स्वतंत्र उम्मीदवारों को पीटीआई में शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए. दूसरे, अगर वे चाहें तो पीपुल्स पार्टी और एक छोटी पार्टी के साथ सरकारी गठबंधन बना सकते हैं."

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना ​​है कि इस समय पाकिस्तान 'खंडित जनादेश' की ओर बढ़ रहा है.

रफीउल्लाह ने कहा, "जहां उत्तरी पंजाब में पीएमएल-एन जीत रही है, मध्य पंजाब में वो हार रही है. पंजाब प्रांत में पीएमएल-एन के 80 सदस्यों तक के जीतने की संभावना है, वहीं पीपुल्स पार्टी के 50 या 55 सदस्यों के सफल होने की भी संभावना है. ऐसे ऐसे में निर्दलीय उम्मीदवार आपकी पार्टी की संख्या बढ़ाने में मदद कर सकते हैं."

गौरतलब है कि एक बड़े चुनावी उलटफेर में पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग-एन के नेता नवाज शरीफ नेशनल असेंबली के एक निर्वाचन क्षेत्र में पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार से हार गए हैं.

चुनाव आयोग के अनुसार, शहजाद मोहम्मद ग़स्तास्प खान ने नेशनल असेंबली निर्वाचन क्षेत्र एनए-15 मनसेहरा में नवाज शरीफ को भारी अंतर से हराया है.

नवाज शरीफ लाहौर में नेशनल असेंबली निर्वाचन क्षेत्र 130 से मुस्लिम लीग के उम्मीदवार थे जहां उन्होंने जीत हासिल की है.

क्या स्वतंत्र उम्मीदवार मिलकर अपना प्रधानमंत्री चुन सकते हैं?

जब रफीउल्लाह काकड़ से पूछा गया कि क्या स्वतंत्र उम्मीदवार अपना प्रधानमंत्री चुन सकते हैं, तो उन्होंने जवाब दिया कि वे ऐसा कर सकते हैं.

वे कहते हैं कि अगर उनके पास 266 सदस्यीय नेशनल असेंबली में 134 सीटें हैं, तो वे ऐसा बिल्कुल कर सकते हैं.

हालांकि, उन्होंने कहा कि स्वतंत्र उम्मीदवारों के लिए अपना प्रधानमंत्री चुनना व्यावहारिक नहीं माना जाता है. लेकिन कानून में इस पर कोई रोक नहीं है.

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