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ज़मीन पर वन विभाग ने लिया क़ब्ज़ा, किसान ने किया आत्मदाह, जानें क्या है पूरा मामला?
- Author, शहबाज़ अनवर
- पदनाम, मेरठ से बीबीसी हिन्दी के लिए
मेरठ की मवाना तहसील में शुक्रवार दोपहर अलीपुर मोरना गांव के निवासी एक अधेड़ किसान जगबीर गुर्जर ने अपने शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी.
इसमें वो बुरी तरह से झुलस गए थे. शनिवार रात को उनकी मेरठ के एक अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. रविवार को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया.
जगबीर के परिजनों का आरोप है कि उनकी ज़मीन पर वन विभाग ने अवैध क़ब्ज़ा किया है. उनका आरोप है कि 4 जनवरी को उनकी गेहूं की फसल को नष्ट कर दिया गया. इसी से नाराज़ होकर जगबीर ने आत्मदाह कर लिया.
इस संबंध में मेरठ के एसपी देहात कमलेश बहादुर ने बीबीसी से कहा, "जगबीर गुर्जर के आत्महत्या करने का मामला जानकारी में आया है. इस मामले में अभी प्रशासनिक बातचीत चल रही है. किसान ने ऐसा क़दम क्यों उठाया, ये भी जांच का विषय है. इस मामले में फिलहाल पुलिस को कोई तहरीर नहीं मिली है."
क्या कह रहा मृतक किसान का परिवार?
जगबीर गुर्जर की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर है. उनके परिवार में दो बेटे हैं. बड़ा बेटा प्रिंस गुर्जर तक़रीबन 24 साल का है और छोटा बेटा आकाश गुर्जर स्नातक की पढ़ाई कर रहा है.
प्रिंस गुर्जर बुलंदशहर में पाइप लाइन आदि डालने का काम करते हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया, "जिस दिन घटना हुई मैं घर पर नहीं था. मेरे पास मेरे गांव के एक साथी की कॉल आई कि तेरे पिताजी ने आग लगा ली है. मैं रात में घर पहुंचा, पिताजी को अस्पताल में भर्ती कर दिया गया था, लेकिन शनिवार की रात को उनकी उपचार के दौरान मौत हो गई."
उन्होंने बताया, ''हमारे पास गांव से लगभग 4 किलोमीटर दूर नहर के नज़दीक लगभग 10 बीघा भूमि है. ये भूमि हमारे पुरखों की है. यहां हमारे पिताजी सालों से खेती करते आ रहे हैं. 4 जनवरी को वन और राजस्व विभाग के अधिकारी वहां पहुंचे. उन्होंने हमारी भूमि पर क़ब्ज़ा कर लिया. इसके बाद खेत में लगी फसल को नष्ट कर दिया. पिताजी 5 जनवरी को इसी की शिकायत को लेकर एसडीएम मवाना के ऑफिस पहुंचे थे. वहां पता नहीं क्या हुआ कि उन्होंने यह क़दम उठाया."
प्रिंस ने कहा, "हमारे पिताजी के दो भाई हैं. दोनों ने क़रीब 5 साल पहले हमारे पिता को ही अपनी ज़मीन बेच दी थी."
जगबीर गुर्जर की मौत के बाद उनके परिवार ने आर्थिक मदद के अलावा परिवार के किसी एक सदस्य को स्थायी नौकरी देने की मांग की है.
क्या कहना है अधिकारियों का
जगबीर के परिवार के आरोपों पर मवाना के एसडीएम अखिलेश यादव ने बीबीसी से कहा, "वन विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने वन विभाग की भूमि से अवैध कब्ज़े हटाए जा रहे हैं. जगबीर जिस भूमि को अपना होने का दावा कर रहे थे, वो भूमि वन विभाग की है. वन विभाग ने उसको ख़ाली कराया था. गांव के कुछ लोगों ने जगबीर को कुछ अनुचित क़दम उठाने के लिए उकसाया. आवेश में आकर जगबीर ये सब कर बैठे."
भूमि ख़ाली कराने से पहले या फसल नष्ट करने से पहले नोटिस दिए जाने के सवाल पर एसडीएम ने कहा, "जिस जगह से अवैध कब्जे हटाए गए, वहां भूमि बहुत अधिक थी, अधिकांश भूमि ख़ाली पड़ी हुई थी, लेकिन लोगों ने उस पर क़ब्ज़ा किया हुआ था. फसल भी बहुत छोटी-छोटी थी. वन विभाग ने जब इस फसल को जोता तो जगबीर की फसल भी इसमें जुत गई. वन विभाग के अफसरों को ये मालूम नहीं था कि अवैध क़ब्ज़ा किसने किया है, ऐसे में नोटिस किसको भेजा जाता. उन्होंने दावा किया कि अभिलेखों में भी भूमि वन विभाग की ही है.''
मेरठ के ज़िला वन अधिकारी (डीएफओ) राजेश कुमार ने बीबीसी से कहा, "मुख्यमंत्री पोर्टल पर जगबीर के ही गांव से किसी व्यक्ति ने शिकायत की थी कि सरकारी भूमि पर अवैध क़ब्ज़ा कर वहां खेती की जा रही है. इसको लेकर वन और राजस्व विभाग की टीम गठित कर वहां भेजा गया था. भूमि फॉरेस्ट विभाग की ही थी तो वहां चिह्निकरण कर दिया गया था. किसान ने ऐसा क़दम क्यों उठाया, ये जांच का ही विषय है. विभाग ने इस बारे में एक टीम गठित कर दी है."
भारतीय किसान यूनियन की चेतावनी
जगबीर गुर्जर की मौत के बाद भारतीय किसान यूनियन सक्रिय हो गई है. संगठन के मेरठ ज़िला अध्यक्ष अनुराग चौधरी ने बीबीसी से कहा, "देखिए किसान तो चला गया, उसके ऐसा क़दम उठाने के पीछे क्या मजबूरियां रहीं इसकी जांच की जाए. मृतक के परिवार को आर्थिक मदद और परिवार के किसी एक सदस्य को जीवनयापन के लिए स्थायी नौकरी दी जाए. हम अधिकारियों से मिले हैं, यदि 10 दिन के भीतर इस तरफ कोई काम नहीं हुआ तो भाकियू आंदोलन चलाने को मजबूर होगी."
भारतीय किसान यूनियन के अलावा समाजवादी पार्टी और अन्य दलों के नेता जगबीर के परिवार से संपर्क साध रहे हैं.
घटना वाले दिन एसडीएम और वकीलों ने क्या देखा?
जगबीर गुर्जर ने शुक्रवार दोपहर एसडीएम कोर्ट परिसर में पेट्रोल छिड़क कर आग लगाई थी. इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है. इसमें किसान आग की लपटों में घिरा हुआ है. कुछ पुलिसकर्मी और अन्य लोग आग बुझाते दिखाई दे रहे हैं. आग बुझाने वालों में एसडीएम अखिलेश यादव भी शामिल थे.
उन्होंने कहा, "मैं अपने कार्यालय में बैठा हुआ था कि बाहर अचानक शोर हुआ. मैं जब बाहर निकला तो जगबीर के शरीर में आग लगी हुई थी. मैं तुरंत दौड़ा और अपनी जैकेट निकाल कर उससे जगबीर की आग बुझाने की कोशिश की. इस प्रयास में मेरी जैकेट काफी जल गई और मेरे हाथ भी थोड़ा झुलस गया. तुरंत ही उन्हें अस्पताल भिजवाया गया, मैं भी साथ था."
मवाना एसडीएम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता इकबाल सिंह ने बीबीसी से कहा, "जब वहां शोर मचा तो हम भी वहां पहुंचे, लेकिन जब मैं चैंबर से वहां पहुंचा तो पुलिस उनको अस्पताल में भर्ती कराने ले जा रही थी. मौक़े पर लोगों की भीड़ जमा थी."
अलीपुर मोरना गांव के प्रधान सरवन कुमार ने बीबीसी से कहा, "मृतक जगबीर के परिवार की स्थिति अधिक अच्छी नहीं है. वह जिस भूमि पर खेती कर रहे थे उसे वह अपना बताते थे, पर 4 जनवरी को वन विभाग ने फसल नष्ट कर दी थी, इसी को लेकर जगबीर परेशान था."
महत्वपूर्ण जानकारी-
मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-
सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)
इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज़- 9868396824, 9868396841, 011-22574820
हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस- 080 - 26995000
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