यूपी की मोदीनगर तहसील में किसान ने अधिकारियों के सामने काटी हाथ की नस, हुई मौत

    • Author, अमित सैनी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, पश्चिम उत्तर प्रदेश से

ग़ाज़ियाबाद के मोदीनगर में अपनी ज़मीन पर हुए अवैध क़ब्ज़े से परेशान एक किसान ने शनिवार को मोदीनगर तहसील परिसर में संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान अपने हाथ की नस काटकर जान दे दी.

मृतक किसान सुशील त्यागी के परिवार का कहना है कि वो बीते डेढ़ साल से अपनी ज़मीन पर हुए अवैध क़ब्ज़े को हटवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो पा रही थी. मृतक किसान मुजफ्फरनगर की इंद्रा कॉलोनी में रहते हैं.

वो मूलरूप से मुरादनगर थाना इलाके के अपने पैतृक गांव डिडौली की ज़मीन को क़ब्ज़ा मुक्त कराने के लिए कोशिशें कर रहे थे. शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस था. इस दिन सरकारी अधिकारी आम लोगों की शिकायतें सुनते हैं और उनकी समस्या का समाधान करते हैं.

सुशील त्यागी कार्रवाई ना होने से परेशान थे. उन्होंने चाकू से अपना हाथ काट लिया और प्रार्थना-पत्र को अपने खून से रंग लिया.

मृतक की पत्नी प्रणीता कहती हैं, "शनिवार को वो बड़ी आस लिए घर से निकले थे. उन्हें देखकर जरा भी नहीं लग रहा था कि वो ऐसा भी क़दम उठा सकते हैं. दोपहर को उनके पास ख़बर आई कि उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई है. जल्दी से मेरठ अस्पताल आ जाइए. बाद में पता चला कि उन्होंने अपना हाथ काट लिया. जिसकी वजह से उनकी मौत हो गई."

प्रणीता का ये भी आरोप है कि स्थानीय पटवारी ने उनके पति से 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी.

लेकिन उनके पति ने देने से इनकार करते हुए अपने हक की लड़ाई खुद लड़ने की ठानी थी. प्रणीता अपने पति की मौत का ज़िम्मेदार पटवारी और तहसीलदार को मानती हैं. उनका कहना है कि उन्हें इंसाफ़ चाहिए.

प्रशासन का क्या कहना है?

किसान सुनील त्यागी के बड़े बेटे रवीश त्यागी नोएडा में जॉब करते हैं. वो कहते हैं कि डिडौली गांव में उनकी कुछ ज़मीन है. पिता उसे बेचना चाहते थे, लेकिन फ़िलहाल वो मौके पर कम थी.

इसी वजह से पिता उस ज़मीन की पैमाइश और पूरा कराने के मक़सद से मोदीनगर तहसील के चक्कर काट रहे थे. रवीश त्यागी भी अपने पिता की मौत का ज़िम्मेदार ज़िला प्रशासन को ठहरा रहे हैं. गाज़ियाबाद की एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास कहती हैं कि ये घटना उनके संज्ञान में है.

सुहास कहती हैं, "उन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ ले जाया गया, लेकिन वो बच नहीं सके."

प्रशासन अभी किसान की मौत की वजह कलाई काटने या ख़ून बहने को नहीं मान रहा है.

एडीएम प्रशासन कहती हैं, "प्रथम दृष्टया ब्लड बहने या इस घटना से मौत होना प्रतीत नहीं हो रहा है. बाकी मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत का कारण स्पष्ट हो पाएगा. संभवतः उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है."

गाज़ियाबाद की एडीएम प्रशासन ऋतु सुहास ये भी मानती हैं कि किसान द्वारा एक नहीं, बल्कि दो शिकायत की गई. दोनों ही सरकार के वेब पोर्टल पर दिख भी रही हैं.

प्रशासन का मानना बसावट की वजह से ज़मीन कम हुई

एडीएम के अनुसार, "किसान मुजफ्फरनगर में रहता था. जिस ज़मीन पर विवाद है, वो उनकी पैतृक ज़मीन थी. खाली होने की वजह से समय के साथ-साथ उस ज़मीन के अगल-बगल कुछ बसाहट हो गई थी. जिसको लेकर वो मानसिक रूप से परेशान हो गए थे."

एडीएम ये भी मानती है कि बसावट की वजह से ज़मीन कम हुई है, लेकिन भू माफ़िया द्वारा कब्ज़ा किए जाने की बात को वो सिरे से नकारती हैं.

वहीं, इस घटना को लेकर किसानों में भारी गुस्सा है. भारतीय किसान यूनियन ने मोदीनगर तहसील में विरोध-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है.

किसानों की मांग है कि किसान सुशील त्यागी के मामले में तुरंत मुक़दमा दर्ज हो और आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई हो.

किसान नेता बाबा प्रमेंद्र ने कहा कि जब तक आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई और पीड़ित परिवार को मुआवज़ा नहीं मिलेगा, यूनियन के सदस्य धरना खत्म नहीं करेंगे.

किसान नेता बबली गुर्जर ने कहा, "मोदीनगर तहसील में जो भी अपनी शिकायत लेकर आता है उसे टरका दिया जाता है. कार्य करने के एवज़ में रिश्वत मांगी जाती है. पीड़ित किसान सुशील त्यागी से भी डिमांड की जा रही थी. परेशान होकर किसान ने आत्महत्या कर ली. इस मामले में दोषी अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए. अगर कार्रवाई नहीं हुई तो किसान इकट्ठा होकर आंदोलन करेंगे."

ज़मीन का विवाद

भाकियू टिकैत के मेरठ मंडल उपाध्यक्ष पवन चौधरी ने कहा कि पीड़ित किसान अपनी ज़मीन की पैमाइश को लेकर लगातार चक्कर काट रहा था. जिसकी वजह से उसने समाधान दिवस में अपने हाथ की नस काट ली. आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो.

परिजनों के मुताबिक, वो मूल रूप से गाज़ियाबाद के मुरादनगर थाना इलाके के डिडौली गांव के रहने वाले थे.

अरसे पहले वो लोग मुजफ़्फ़रनगर आकर बस गए थे, लेकिन डिडौली में उनकी करीब 2500 ग़ज़ ज़मीन है.

उनमें से एक करीब एक हज़ार वर्ग गज के प्लाट को सुशील त्यागी बेचना चाहते थे. मौके पर पैमाइश कराई गई तो वो 860 गज ही निकला.

240 गज की भरपाई के लिए सुशील लगातार चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही थी.

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