बनभूलपुरा: अपने ही घरों में क़ैद लोग, थमी हुई ज़िन्दगी और अनिश्चित भविष्य

    • Author, राघवेंद्र राव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बनभूलपुरा से

शनिवार की शाम हल्द्वानी की कई सड़कों पर ऐसी चहल-पहल थी मानों कुछ हुआ ही न हो.

लोग, गाड़ियां, कुछ खुली दुकानें... हर दिन जैसा नज़ारा.

लेकिन इसी शहर का एक ऐसा कोना भी था, जहां यहाँ की एक बड़ी आबादी अपने ही घरों, गलियों और मोहल्लों में क़ैद होकर रह गई है.

ये वही कोना है जहाँ गुरुवार शाम को एक हिंसक भीड़ ने पथराव किया, गाड़ियों को आग लगा दी और पुलिसकर्मियों पर हमला किया.

ये वही कोना है जहाँ हिंसा के तांडव में पांच लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए.

ये वही कोना है जिसकी चारों तरफ से ऐसी नाकेबंदी कर दी गई है कि न तो कोई अंदर जा सकता है और न ही कोई बाहर आ सकता है.

ये बनभूलपुरा है.

'कई महीने अंदर रहने की तैयारी कर लो'

शुक्रवार शाम हल्द्वानी पहुँचने के बाद हमने सीधे बनभूलपुरा का रुख़ किया.

लेकिन इस इलाक़े तक ले जाने वाली जिस भी गली को पकड़ा, वहां पुलिस का बैरिकेड और तैनाती मिली.

अंदर जाने की कोशिश की तो एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "कर्फ्यू है. प्रेस के अंदर जाने की मनाही है. ऊपर से आर्डर हैं."

शनिवार को हमने एक कोशिश और की. पुलिस का जवाब वही था.

बनभूलपुरा, गाँधी नगर, आज़ाद नगर और ग़फ़ूर बस्ती एक-दूसरे से सटे हुए इलाक़े हैं और सभी गुरुवार की हिंसा से प्रभावित हैं.

स्थानीय लोगों के मुताबिक़ इन इलाक़ों में एक बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है.

बहुत से लोगों का मानना है कि गुरुवार की हिंसा सोच-समझ कर और तैयारी के साथ की गई थी. ज़िला प्रशासन भी कह चुका है कि ये हिंसा पूर्व नियोजित थी.

बहरहाल पुलिस ने हर गली, हर सड़क पर ऐसी नाकाबंदी की है कि इन इलाक़ों तक पहुंचना नामुमकिन हो गया है.

वहीं पुलिस ये भी सुनिश्चित कर रही है कि इन इलाक़ों में रहने वाले लोग भी बाहर न आ सकें.

एक ऐसे ही नाके पर हम खड़े थे जिस वक़्त बनभूलपुरा की तरफ से कुछ लोग बाहर आते हुए दिखे.

अपनी लाठी को ज़मीन पर पटकते हुए एक पुलिसकर्मी ने उन्हें झिड़का, "वापस जाओ."

जैसे ही वो लोग वापस जाने के लिए मुड़े तो वो पुलिसकर्मी चिल्लाया, "कई महीने अंदर रहने की तैयारी कर लो."

दंगाइयों की पहचान करती पुलिस

इस मामले में अब तक तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं और पांच गिरफ़्तारियां हुई हैं. पुलिस के मुताबिक़ सीसीटीवी फुटेज और अन्य सबूतों के आधार पर उपद्रवियों को चिन्हित कर गिरफ्तार करने का काम किया जा रहा है.

वहीँ उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोषियों पर सख़्त करवाई करने की बात की है.

पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया वेबसाइट एक्स पर लिखा, "देवभूमि उत्तराखण्ड की शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ा जाएगा. हम दंगाइयों पर इतनी सख्त कार्रवाई करेंगे कि यह कार्रवाई भविष्य के लिए मिसाल बन जाएगी."

शनिवार को एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए धामी ने कहा, "हम देवभूमि में किसी भी प्रकार की हिंसा, किसी भी प्रकार की अराजकता... ये किसी कीमत पर हम सहन करने वाले नहीं हैं. उसके लिए जो ज़रूरी काम होगा, वो ज़रूरी काम किया जाएगा."

"जिन्होंने भी बनभूलपुरा में... जो हमारे सरकारी संपत्ति का नुक़सान किया है, निजी संपत्ति का नुक़सान किया है... उन दंगाइओं से... उन अराजक तत्वों से उसकी एक-एक पाई वसूली जाएगी... चाहे कितना भी बड़ा रसूख़ वाला कोई क्यों न हो... जिसने भी ये काम किया... जिसने भी क़ानून तोड़ने का काम किया है, क़ानून उसके साथ सख्ती से काम करेगा.. बिना रुके, बिना झुके, लगातार काम करेगा."

कर्फ़्यू को लेकर भ्रम की स्थिति

शनिवार सुबह का नज़ारा कुछ अटपटा था. जहां बनभूलपुरा कि तरफ जाने वाले तमाम रास्तों को बैरिकेड लगा कर रोक दिया गया था.

वहीं शहर की मुख्य सड़कों और तिकुनिया तिराहा पर लोग इस तरह चलते-फिरते नज़र आने लगे जैसे ये कोई सामान्य दिन हो.

तिकुनिया तिराहे पर तैनात पुलिसकर्मियों से हमने जानना चाहा कि क्या वहां से कर्फ्यू हटा लिया गया है?

एक पुलिस अधिकारी ने कहा, "कर्फ्यू तो कहीं से भी नहीं हटा है अभी. लोगों को शायद जानकारी की कमी है."

देखते ही देखते पुलिस बल हरकत में आ गया और लोगों को रोक-रोक कर वापस जाने को कहने लगा. लाठियां भांजते पुलिस कर्मी ई-रिक्शा चालकों को भगाने में जुट गए.

पुलिस की गाड़ियों से लाउड स्पीकरों पर घोषणाएं होने लगीं कि कर्फ्यू अभी जारी है और लोग अपने घरों को लौट जाएं.

ये साफ़ था कि कर्फ्यू को लागू करना स्थानीय पुलिस के लिए आसान साबित नहीं हो रहा था.

जब हमने एक पुलिस अधिकारी से कहा कि ऐसा लग रहा है कि यहाँ तो कोई कर्फ्यू है ही नहीं तो उन्होंने कहा, "यहाँ भी है. लेकिन कर्फ्यू का कड़ाई से पालन बनभूलपुरा के इलाक़े में करवाया जा रहा है."

वहीं तैनात एक और पुलिसकर्मी ने कहा, "गुरुवार की रात तो क़यामत की रात थी. आपको क्या लगता है, उस इलाक़े के लोगों पर नरमी होगी?"

जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा तो ये ख़बर आई कि कर्फ्यू को हिंसा से प्रभावित इलाक़ों तक सीमित कर दिया गया है.

शाम होते होते हल्द्वानी शहर के ज़्यादातर इलाक़े सामान्य हालत की तरफ बढ़ते दिखे.

जहां शुक्रवार रात तक सिर्फ दवाइयों की दुकानों को खुला रखने की अनुमति थी, वहीं शनिवार शाम तक शहर में कई शराब की दुकानें खुली नज़र आईं.

हल्द्वानी की एक बड़ी आबादी की ज़िन्दगी पटरी पर आती दिखी.

नहीं दिखी तो बस उन सैंकड़ों परिवारों की हालत जो अपने ही घर में क़ैद हो गए हैं.

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